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Sainik School vs Regular School: क्या आम स्कूलों से बेहतर हैं सैनिक स्कूल? जानें बच्चों के भविष्य और लाइफस्टाइल पर इसका असर।

क्या आप अपने बच्चे के लिए सही स्कूल चुनते समय उलझन में हैं? जानें सैनिक स्कूल की सख्त दिनचर्या और एक रेगुलर स्कूल की पढ़ाई के बीच का बड़ा अंतर। अनुशासन, फिटनेस और लीडरशिप के मामले में कौन सा विकल्प आपके बच्चे के सुनहरे भविष्य के लिए बेस्ट है, विस्तार से समझें।

By Pinki Negi

Sainik School vs Regular School: क्या आम स्कूलों से बेहतर हैं सैनिक स्कूल? जानें बच्चों के भविष्य और लाइफस्टाइल पर इसका असर।
Sainik School vs Regular School

अक्सर माता-पिता यह सोचकर हिचकिचाते हैं कि सैनिक स्कूल में दाखिले का मतलब बच्चे को अनिवार्य रूप से सेना में भेजना है। लेकिन हकीकत में, सैनिक स्कूल बच्चों के व्यक्तित्व को पूरी तरह बदल देने वाला संस्थान है। यहाँ केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व (लीडरशिप) जैसे गुण कूट-कूट कर भरे जाते हैं।

यह स्कूल बच्चों को मानसिक और शारीरिक रूप से इतना मजबूत बनाता है कि वे भविष्य में सेना के अलावा डॉक्टर, इंजीनियर या आईएएस जैसे किसी भी क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकें। सरल शब्दों में कहें तो, सैनिक स्कूल बच्चों को एक जिम्मेदार और आत्मनिर्भर इंसान बनाने की पाठशाला है।

अनुशासन और लाइफ स्किल्स की बेहतरीन पाठशाला

सैनिक स्कूल में बच्चों की शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यहाँ उन्हें जीवन जीने का सही तरीका सिखाया जाता है। यहाँ की दिनचर्या बहुत ही व्यवस्थित होती है, जिसकी शुरुआत सुबह जल्दी उठने और फिजिकल ट्रेनिंग से होती है। हर काम एक तय समय पर होने के कारण बच्चों में जिम्मेदारी और वक्त की अहमियत समझने की आदत पड़ जाती है। पढ़ाई के साथ-साथ ड्रिल, परेड और एनसीसी (NCC) के जरिए बच्चे टीम के साथ मिलकर काम करना और नेतृत्व करना सीखते हैं। इतना ही नहीं, डिबेट, क्विज और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से उनकी बोलने की कला और आत्मविश्वास को भी निखारा जाता है, जो उन्हें हर क्षेत्र में सफलता दिलाने में मदद करता है।

सैनिक स्कूल और CBSE बोर्ड

सैनिक स्कूल मुख्य रूप से CBSE बोर्ड से जुड़े होते हैं, जिसका मतलब है कि यहाँ भी छात्र गणित, विज्ञान, अंग्रेजी और सामाजिक विज्ञान जैसे वही विषय पढ़ते हैं जो अन्य स्कूलों में पढ़ाए जाते हैं। हालांकि, यहाँ की खासियत पढ़ाई का अनुशासन और उसे समझाने का प्रैक्टिकल तरीका है। स्कूल का प्राथमिक लक्ष्य छात्रों को NDA (राष्ट्रीय रक्षा अकादमी) और अन्य रक्षा सेवाओं की प्रवेश परीक्षाओं के लिए तैयार करना है। इसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को विशेष शारीरिक फिटनेस रूटीन, व्यक्तित्व विकास की कक्षाएं और रक्षा क्षेत्र के अनुकूल माहौल प्रदान किया जाता है।

सैनिक स्कूल का कमाल

यह एक बड़ा मिथक है कि सैनिक स्कूल से पढ़ाई करने का मतलब केवल सेना में जाना है। वास्तव में, यहाँ से निकले छात्र डॉक्टर, इंजीनियर, IAS, IPS और सफल बिजनेसमैन बनकर देश की सेवा कर रहे हैं। सैनिक स्कूल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहाँ बच्चे मानसिक (Academic) और शारीरिक (Physical) दोनों रूपों में बेहद मजबूत बनते हैं। अनुशासन और आत्मविश्वास की जो नींव यहाँ रखी जाती है, उसी के दम पर ये बच्चे जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी बड़ी आसानी से संभाल लेते हैं। सरल शब्दों में कहें, तो सैनिक स्कूल किसी भी प्रोफेशन में लीडर बनने की पूरी ट्रेनिंग देता है।

सैनिक स्कूल के छात्रों की 3 बड़ी खासियतें:

  • बहुमुखी प्रतिभा (Versatility): पढ़ाई में अव्वल होने के साथ-साथ खेलों और अन्य गतिविधियों में भी माहिर।
  • संकट प्रबंधन (Crisis Management): मुश्किल हालातों में घबराने के बजाय सही फैसला लेने की अद्भुत क्षमता।
  • मजबूत व्यक्तित्व: अटूट आत्मविश्वास और अनुशासन, जो उन्हें भीड़ से बिल्कुल अलग बनाता है।
Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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