
शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ का ऐतिहासिक दर्जा प्रदान कर दिया है। यह निर्णय यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है, जो यूजीसी एक्ट 1956 की धारा 3 के तहत ‘डे-नोवो’ श्रेणी में आता है।
मंत्रालय ने आधिकारिक ट्वीट के माध्यम से घोषणा की, “यूनियन मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन ने यूजीसी की सलाह पर एनसीईआरटी को डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी घोषित किया है।” इस कदम से एनसीईआरटी को शैक्षणिक अनुसंधान, पाठ्यक्रम विकास और उच्च शिक्षा में अभूतपूर्व स्वायत्तता मिलेगी, जो नई शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के लक्ष्यों को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा।
आवेदन प्रक्रिया और संस्थान
एनसीईआरटी ने यूजीसी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन दाखिल किया था, जिसमें इसके छह प्रमुख संस्थानों- रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन (आरआईई) अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूर, शिलांग और नॉर्थ-ईस्टर्न रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड एजुकेशन (एनई-आरआईएसई), शिलांग- को शामिल किया गया। यूजीसी की विशेषज्ञ समिति ने इनका गहन मूल्यांकन कर ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ जारी करने की सिफारिश की, जिसमें कुछ शर्तें जोड़ी गईं। आयोग ने इसे मंजूरी दी और शिक्षा मंत्रालय ने अंतिम अधिसूचना जारी कर दी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इसे शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षा सुधारों को मजबूत करने वाला बताया।
छात्रों के लिए नए अवसर
इस दर्जे से एनसीईआरटी अब स्वतंत्र रूप से डिग्री कार्यक्रम चला सकेगा, जैसे बीएड, एमएड और अनुसंधान-आधारित कोर्स। स्कूलों की किताबों के साथ कॉलेज स्तर की डिग्री की सुविधा का दावा वायरल हो रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि यह स्कूली शिक्षा को उच्च शिक्षा से जोड़ने का ब्रिज बनेगा।
कक्षा 9 से 12वीं तक सीबीएसई स्कूलों में एनसीईआरटी किताबें अनिवार्य हैं, और अब ये संस्थान ओपन लर्निंग मॉडल के तहत डिप्लोमा-डिग्री एकीकृत कर सकेंगे। छात्रों को फायदा होगा क्योंकि स्कूली पाठ्यक्रम राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ) के अनुरूप मजबूत होगा, जो 9-10वीं में सात अनिवार्य विषयों पर केंद्रित है।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम देश की शिक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा। एनईपी 2020 के तहत स्कूल-कॉलेज के बीच गैप कम होगा, शिक्षकों का प्रशिक्षण बेहतर होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्ता शिक्षा पहुंचेगी। हालांकि, विशेषज्ञ चेताते हैं कि शर्तों का पालन जरूरी है, वरना स्वायत्तता का दुरुपयोग हो सकता है। 2026 तक चर्चा है कि एनसीईआरटी डिग्री कोर्स शुरू करेगा, लेकिन छात्रों को आधिकारिक वेबसाइट ncert.nic.in पर नियम जांचने चाहिए।
शिक्षा क्रांति का कदम
यह फैसला न केवल एनसीईआरटी को सशक्त करेगा, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य को नई दिशा देगा। शिक्षा क्षेत्र में यह क्रांतिकारी परिवर्तन सराहनीय है, जो भारत को स्किल्ड नेशन बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।









