
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारें ग्राहकों को कई तरह के फायदे दे रही हैं। इनमें सब्सिडी, GST में छूट और रोड टैक्स में राहत जैसे प्रमुख लाभ शामिल हैं। इन फायदों के साथ ही अक्सर यह चर्चा होती है कि क्या इलेक्ट्रिक कारों को टोल टैक्स से भी मुक्ति मिली हुई है? कई लोगों के मन में यह भ्रम है कि पूरे देश में इलेक्ट्रिक कारों के लिए टोल फ्री है।
लेकिन सच्चाई थोड़ी अलग है। नेशनल हाईवे और अलग‑अलग राज्यों में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए टोल टैक्स के नियम अभी भी बहुत हद तक पेट्रोल‑डीजल वाहनों की तरह ही लागू हैं, सिर्फ महाराष्ट्र जैसे चुनिंदा राज्यों में ही EVs के लिए विशेष छूट दी गई है।
इलेक्ट्रिक कारों पर टोल टैक्स नियम क्या हैं?
फिलहाल भारत में यह नियम नहीं है कि “सभी इलेक्ट्रिक वाहन देश भर में टोल से मुक्त हैं”। NHAI और अधिकांश राज्यों के टोल प्लाजा पर टोल टैक्स के दायरे में EV और पेट्रोल‑डीजल वाहन दोनों एक सामान्य श्रेणी में आते हैं। यानी अगर आप दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान या तमिलनाडु जैसे राज्यों के नेशनल हाईवे पर इलेक्ट्रिक गाड़ी चलाते हैं, तो आपको भी सामान्य टोल या आधा टोल नियम के हिसाब से शुल्क देना अनिवार्य है; अलग से “EV‑टोल‑फ्री” का प्रावधान अभी उन राज्यों में नहीं है।
सरकार ने EV उपयोग बढ़ाने के लिए रोड टैक्स में छूट, रजिस्ट्रेशन फीस में राहत और कुछ राज्यों में सब्सिडी जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन यह सब टोल टैक्स से अलग फायदे हैं। इसलिए आम भ्रम उत्पन्न होता है कि अगर EV रोड टैक्स में छूट लेती है, तो टोल भी फ्री हो जाएगा। ऐसा नहीं है, दोनों शुल्क अलग विभागों और अलग नियमों से नियंत्रित होते हैं।
इस राज्य में मिलती है छूट
यह जानकारी देशभर के EV मालिकों के लिए राहत भरी है कि फिलहाल महाराष्ट्र ही एकमात्र राज्य है, जहाँ इलेक्ट्रिक वाहनों को टोल टैक्स में बड़ी छूट मिल रही है। महाराष्ट्र सरकार ने अपनी नई EV पॉलिसी 2025 के तहत एक विशेष व्यवस्था शुरू की है, जिसके अनुसार राज्य के भीतर चलने वाले कुछ चुनिंदा राजमार्गों पर इलेक्ट्रिक वाहनों से कोई टोल नहीं लिया जाता।
- मुंबई‑पुणे एक्सप्रेसवे, अटल सेतु (मुंबई बाय ट्रांस‑हार्बर लिंक) और समृद्धि एक्सप्रेसवे जैसे तीन प्रमुख राज्य एक्सप्रेसवे इस टोल‑फ्री योजना के दायरे में आते हैं।
- यह छूट प्राइवेट इलेक्ट्रिक कारों, पैसेंजर गाड़ियों, राज्य परिवहन की इलेक्ट्रिक बसों और सार्वजनिक परिवहन वाले EV वाहनों पर लागू होती है।
इस नीति का साफ उद्देश्य देश की सबसे रोड‑टैक्स भारित और ट्रैफिक‑भरी राजधानी‑मुंबई के आस‑पास इलेक्ट्रिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना और पब्लिक इलेक्ट्रिक बस सेवाओं को आर्थिक रूप से बेहतर बनाना है।
गुड्स कैरियर्स और बाकी राजमार्गों पर क्या?
हालांकि यह टोल‑छूट सभी तरह के इलेक्ट्रिक वाहनों पर लागू नहीं है। उदाहरण के लिए, इलेक्ट्रिक गुड्स कैरियर्स या इलेक्ट्रिक ट्रक्स को टोल से कोई छूट नहीं मिलती; उन्हें सामान्य फील्ड वाहनों की तरह पूरा टोल टैक्स देना पड़ता है। यह नियम तर्कसंगत भी है, क्योंकि माल ढोने वाले वाहन नेशनल हाईवे पर अधिक भार और अधिक ट्रैफिक दोनों के लिए जिम्मेदार होते हैं, इसलिए उनसे टोल बराबर लिया जाता है।
साथ ही, महाराष्ट्र के उन तीन ओर ज्यादा खास एक्सप्रेसवे के अलावा, राज्य के दूसरे राजमार्गों और नेशनल हाईवे पर EV वाहनों से सिर्फ 50 फीसदी टोल टैक्स लिया जाता है। यानी अगर एक पेट्रोल कार से 200 रुपये का टोल लिया जाता है, तो इलेक्ट्रिक कार से सिर्फ 100 रुपये लिए जाते हैं। यह नियम सफर को पहले के मुकाबले न केवल किफायती बनाता है, बल्कि ईVEVs की ओर रुझान बढ़ाने में भी मदद करता है।
बाकी राज्यों में क्या हालत है?
फिलहाल भारत के बाकी राज्य – दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक और तमिलनाडु – में टोल प्लाजा के नियम पेट्रोल और डीजल वाहनों के लिए जो हैं, वही इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए भी लागू हैं। यहाँ न कोई “EV‑टोल‑फ्री” नीति है, न ही किसी राज्य‑स्तरीय आधिकारिक घोषणा के तहत आधा टोल जैसा विशेष व्यवस्था शुरू हुई है।
ऑटोमोबाइल जानकारों का मानना है कि जैसे‑जैसे महाराष्ट्र में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री बढ़ेगी और लोगों का रुझान EV वाहनों की तरफ बढ़ेगा, वैसे‑वैसे दूसरे राज्य भी टोल‑छूट या आधा टोल जैसी प्रणाली लाने पर विचार कर सकते हैं। लेकिन अभी के लिए देश के अधिकांश हिस्सों में टोल टैक्स देना अनिवार्य है, चाहे वाहन बिल्कुल इलेक्ट्रिक ही क्यों न हो।









