
केंद्र सरकार के करीब 49 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनभोगियों की नजरें कैबिनेट की बैठकों पर टिकी हैं, लेकिन महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी की घोषणा का इंतजार लंबा खिंचता जा रहा है। जनवरी 2026 से लागू होने वाली इस सैलरी बढ़ोतरी पर अप्रैल का पहला हफ्ता भी निकल गया, बिना किसी सुगबुगाहट के। 8 अप्रैल को हुई कैबिनेट मीटिंग में 1.74 लाख करोड़ रुपये की कई महत्वाकांक्षी योजनाओं को मंजूरी मिली, मगर DA हाइक पर खामोशी बरकरार रही।
केंद्रीय कर्मचारियों का लंबा इंतजार
यह पहली बार नहीं है जब सरकारी कर्मचारी संगठन खुलकर नाराजगी जता रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों के पैटर्न को देखें तो DA की घोषणा आमतौर पर मार्च के आखिर या अप्रैल की शुरुआत में हो जाती थी। 28 मार्च 2025 को जनवरी 2025 के लिए घोषणा हुई थी, जबकि 12 मार्च 2024 को पिछली बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया गया था। लेकिन इस बार 7वें वेतन आयोग की समयसीमा- 31 दिसंबर 2025- समाप्त होने के बाद भी देरी हो रही है।
कर्मचारी यूनियनें चेतावनी दे रही हैं कि अगर जल्द फैसला नहीं आया तो आंदोलन की नौबत आ सकती है। वर्तमान में DA 58% पर अटका है, जबकि AICPI-IW आंकड़ों के आधार पर इसे 60% तक ले जाने की गणना तैयार है।
देरी की असली वजह
कई जानकारों का मानना है कि देरी पॉलिसी से ज्यादा प्रक्रियागत है। मिडिल ईस्ट में इजराइल-ईरान तनाव और वैश्विक महंगाई के बीच बजट दबाव तो एक कारण हो सकता है, लेकिन मुख्य मुद्दा 8वें वेतन आयोग की ओर संक्रमण है। 7वें आयोग के तहत DA की गणना उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित है, जो जनवरी 2026 से 60.33% तक पहुंच चुका है। सरकार इसे गोल कर 60% घोषित कर सकती है, साथ ही जनवरी से अप्रैल तक के एरियर्स का भुगतान।
हालांकि, पुराने 18 महीनों के एरियर्स पर कोई राहत नहीं मिलेगी, जैसा कि महामारी काल में फ्रीज DA का मामला था। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 8वें CPC के लागू होने पर DA को नए बेसिक पे में मर्ज कर जीरो से रीसेट किया जाएगा, जिससे यह घोषणा रणनीतिक रूप से टाली जा रही है।
अप्रैल के दूसरे-तीसरे हफ्ते में संभावना
जानकारों के मुताबिक, अप्रैल के दूसरे या तीसरे हफ्ते में कैबिनेट की अगली मीटिंग में DA हाइक पर मुहर लग सकती है। अगर 2% की बढ़ोतरी हुई तो न्यूनतम सैलरी (18,000 रुपये बेसिक) पर 360 रुपये मासिक का फायदा होगा, जो 60% DA पर कुल 28,800 रुपये तक पहुंचेगा। पेंशनर्स के लिए भी DR में यही राहत होगी। पिछले ट्रेंड्स से साफ है कि घोषणा के बाद एरियर्स मई-जून की सैलरी में जमा हो जाते हैं। लेकिन अगर देरी बढ़ी तो कर्मचारियों का सब्र बांध टूट सकता है, क्योंकि महंगाई की मार- ईंधन से लेकर किराने तक- बढ़ रही है।
केंद्र सरकार के इस फैसले का असर न केवल कर्मचारियों की जेब पर पड़ेगा, बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी दिखेगा। खुदरा खर्च बढ़ने से बाजार को बल मिलेगा। फिलहाल, कर्मचारी संगठन ‘तुरंत स्पष्टीकरण दो’ की मांग कर रहे हैं। क्या अप्रैल की अगली मीटिंग लाएगी खुशखबरी? इंतजार ही अंतिम सच बनेगा।









