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तलाक लेना है नामुमकिन! दुनिया के इन देशों में शादी तो होती है पर ‘Divorce’ पर है पाबंदी; जानें इसके पीछे की वजह।

दुनिया के 8 देश जहां तलाक पूरी तरह बैन! फिलीपींस, वेटिकन, माल्टा से सूडान तक - शादी को आजीवन बंधन मानते हैं। कैथोलिक और इस्लामी प्रभाव से कानून झुकते हैं। सिर्फ एनुलमेंट का रास्ता, वो भी जटिल। क्या ये परंपराएं टिकेंगी? जानिए क्यों अलग होना इन देशों में सपना है!

By Pinki Negi

तलाक लेना है नामुमकिन! दुनिया के इन देशों में शादी तो होती है पर 'Divorce' पर है पाबंदी; जानें इसके पीछे की वजह।

सोचिए, एक ऐसा देश जहां शादी तोड़ने का ख्याल ही गुनाह जैसा लगे। फिलीपींस वैसा ही है। यहां कैथोलिक चर्च की इतनी गहरी पैठ है कि कानून भी धर्म के आगे सिर झुका लेता है। शादी को भगवान का दिया आजीवन रिश्ता माना जाता है। भले ही आप विदेश जाकर तलाक ले लें, लेकिन वापस लौटने पर वो यहां मान्य नहीं होगा। लाखों लोग इसी वजह से फंसे रहते हैं, चाहे रिश्ता कितना भी बिगड़ जाए। ये देश हमें याद दिलाता है कि कभी-कभी परंपराएं कानून से भी ऊपर चढ़ जाती हैं।

वेटिकन सिटी: धर्म का सबसे पवित्र कोना

अगर दुनिया का सबसे छोटा देश हो, तो नियम भी सबसे सख्त होंगे न? वेटिकन सिटी में तो तलाक का नामोनिशान ही नहीं। कैथोलिक सिद्धांत कहते हैं – विवाह जीवन भर की कसम है, इसे तोड़ा नहीं जा सकता। बस एक रास्ता है, एनुलमेंट यानी शादी को शुरू से ही अमान्य घोषित कराना। ये प्रक्रिया इतनी लंबी और जटिल है कि ज्यादातर लोग हार मान लेते हैं। यहां रहने वाले पवित्र जीवन जीते हैं, और शादी उसी का हिस्सा है। क्या हम कभी सोच सकते हैं कि कानून न हो तो धर्म ही राज करे?

माल्टा: यूरोप का अकेला विद्रोही

यूरोप में सब जगह तलाक आसान है, लेकिन माल्टा अपवाद है। ये छोटा-सा द्वीप राष्ट्र कैथोलिक प्रभाव में डूबा हुआ है। तलाक पर पूरी तरह बैन है, हालांकि कुछ खास मामलों में शादी रद्द की जा सकती है। लेकिन वो भी आसान नहीं – सालों की कानूनी लड़ाई, कोर्ट के चक्कर। स्थानीय लोग कहते हैं, ये उनकी संस्कृति का हिस्सा है। आधुनिक यूरोप में ये पुरानी सोच जैसे चमक रही हो। माल्टा हमें सिखाता है कि बदलाव हर जगह एक जैसा नहीं आता।

हैती: पवित्र बंधन की मजबूत जड़ें

कैरीबियन के इस गरीब देश में शादी को तोड़ना सपना जैसा है। कैथोलिक मान्यताओं के चलते तलाक गैरकानूनी है। हां, अगर शादी धोखे या जोर-जबरदस्ती से हुई हो, तो रद्द करने का रास्ता खुल सकता है। लेकिन ये प्रक्रिया इतनी मुश्किल कि ज्यादातर कपल्स साथ निभा लेते हैं। हैती की सड़कों पर घूमते हुए लगता है, यहां जिंदगी कठिन है, लेकिन रिश्ते और मजबूत। ये देश दिखाता है कि आस्था कभी-कभी कानून से ज्यादा ताकतवर होती है।

सिर्फ एनुलमेंट ही एकमात्र रास्ता

कई देशों में तलाक न होने पर लोग सोचते होंगे, फिर अलग कैसे हों? जवाब है एनुलमेंट। ये वो तरीका है जहां शादी को शुरू से ही गलत साबित किया जाता है। लेकिन ये आसान नहीं – डॉक्टरों, वकीलों, चर्च के पंडितों की लंबी जांच। दंपतियों के लिए ये भावनात्मक और आर्थिक रूप से थकाऊ साबित होता है। दुनिया के इन कोनों में लोग इसी से जूझते हैं। क्या ये सही है या गलत? ये बहस का विषय है।

लेबनान: धर्म के अलग-अलग नियम

मिडिल ईस्ट का ये खूबसूरत देश धार्मिक विविधता से भरा है। यहां हर समुदाय के अपने तलाक नियम हैं – मुस्लिम, ईसाई, ड्रूज सबके। तलाक अंतिम हथियार है, और प्रक्रिया सालों चलती है। धार्मिक अदालतें फैसला लेती हैं, जो जटिल और महंगी होती है। लेबनान की गलियों में बातें करें तो लोग कहते हैं, ये उनकी परंपरा है। लेकिन युवा पीढ़ी बदलाव की मांग कर रही है।

ग्वाटेमाला: संस्कृति और कानून का दबाव

मध्य अमेरिका के ग्वाटेमाला में तलाक न सिर्फ कानूनी बाधा है, बल्कि समाज भी इसे बुरा मानता है। शादी को तोड़ना परिवार और रिश्तेदारों के लिए शर्मिंदगी का सबब। कानूनी प्रक्रिया लंबी है, और सामाजिक दबाव तो और भी। यहां लोग कहते हैं, विवाह टूटने से समाज टूटता है। ये मानसिकता जड़ों में बसी है।

सूडान: इस्लामी कानून की सख्ती

अफ्रीका का सूडान इस्लामी शरिया से बंधा है। तलाक सिर्फ सीमित हालातों में – जैसे क्रूरता या परित्याग। पुरुषों को आसान लगता है, लेकिन महिलाओं के लिए मुश्किल। प्रक्रिया धार्मिक अदालतों से गुजरती है, जो लंबी और अपमानजनक हो सकती है। सूडान दिखाता है कि धर्म कानून को कैसे आकार देता है।

क्या ये परंपराएं टिक पाएंगी?

ये देश हमें सोचने पर मजबूर करते हैं। आधुनिक दुनिया में तलाक आम हो गया, लेकिन यहां परंपराएं जीवित हैं। शायद ये सिखा रहे हों कि रिश्ते निभाने की कोशिश पहले करो। लेकिन क्या ये कपल्स के दुख को नजरअंदाज करता है? भविष्य में बदलाव आएगा, ये तय है। फिलहाल, ये दुनिया के अनोखे चेहरे हैं।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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