
अमेरिका-ईरान युद्ध के वैश्विक असर के बीच भारत में गैस संकट ने घरेलू मोर्चे पर नया मोड़ ले लिया है। जहां कई राज्यों में एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत ने रसोई घरों को परेशान कर रखा है, वहीं अब सीएनजी इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों को Torrent Gas ने गुपचुप तरीके से जोरदार झटका दे दिया। प्राइवेट कंपनी ने कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) की दरों में 2.50 रुपये प्रति किलोग्राम की अचानक बढ़ोतरी कर दी, जिससे कई शहरों में कीमतें 93.41 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। पहले यह 90.91 रुपये थी।
यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई जब सरकारी कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे हुए हैं, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर प्राइवेट प्लेयर्स ऐसा क्यों कर रहे हैं।
सरकार के एलपीजी संकट पर बड़े कदम
सरकार ने एलपीजी संकट पर काबू पाने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कमर्शियल सिलेंडरों की जमाखोरी रोकने को विशेष समिति गठित की, बुकिंग अंतराल 25 दिन किया और 6000 छापों में 1000 सिलेंडर जब्त किए। मिडिल ईस्ट तनाव के बावजूद सप्लाई चेन को मजबूत करने के 6 बड़े कदमों का ऐलान किया गया, जिससे पैनिक बुकिंग 40% घट गई। लेकिन होटल-रेस्तरां वाले क्षेत्र अब भी प्रभावित हैं।
1 अप्रैल से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी उछाल आया- दिल्ली में 19 किलो का सिलेंडर 195.50 रुपये महंगा होकर 2078.50 रुपये पर पहुंचा। घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिली क्योंकि उनके दाम अपरिवर्तित रहे।
Torrent Gas की चुपचाप CNG बढ़ोतरी
Torrent Gas की इस चुपचाप बढ़ोतरी ने सीएनजी यूजर्स को सबसे ज्यादा परेशान किया है। दिल्ली-एनसीआर, मेरठ, नोएडा जैसे शहरों में ऑटो-रिक्शा चालक खासे तनावग्रस्त हैं। एक ऑटो चालक ने बताया, “रोज 100-150 किलो सीएनजी भरता हूं, 2.50 रुपये का इजाफा मतलब 250-375 रुपये अतिरिक्त खर्च। कमाई घटेगी तो परिवार का गुजारा कैसे चलेगा?”
ट्रांसपोर्ट क्षेत्र पर असर पड़ना तय है, क्योंकि सीएनजी सस्ते विकल्प के रूप में लोकप्रिय थी। रिलायंस के नायरा पंपों पर भी पेट्रोल-डीजल महंगे हो चुके हैं, जो महंगाई की चेन को लंबा कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि APM गैस दरें 6.75 डॉलर/MMBtu पहुंचने, GAIL की सस्ती गैस कटौती और वैश्विक तेल मूल्यों के दबाव से प्राइवेट कंपनियां खुदरा दाम बढ़ा रही हैं। OPEC की नीतियां और स्थानीय टैक्स भी इसमें योगदान दे रहे।
आम आदमी पर महंगाई का सीधा असर
आम आदमी के रोजमर्रा के खर्च पर सीधा असर पड़ रहा है। किराने से लेकर कैब किराए तक सब महंगा हो जाएगा। मेरठ जैसे शहरों में जहां सीएनजी वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है, वहां चालकों का कहना है कि पेट्रोल पर स्विच करना अब महंगा साबित हो रहा। सरकार ने उपभोक्ताओं को अफवाहों से बचने, RC वॉलेट-Ujjwala ऐप चेक करने की सलाह दी। IGL-MGL जैसे ऑपरेटर्स के ऐप से रेट ट्रैक करने को कहा गया। लेकिन सवाल वाजिब है- जब पेट्रोलियम मंत्री सप्लाई सामान्य होने का दावा कर रहे हैं, तो प्राइवेट सेक्टर की मनमानी क्यों?
महंगाई का मीटर फुल स्पीड पर
यह संकट महंगाई के मीटर को फुल स्पीड दे रहा है। वाहन चालक उम्मीद कर रहे हैं कि नियामक प्राधिकरण (PNGRB) जल्द हस्तक्षेप करे। फिलहाल, सीएनजी कंज्यूमर्स जेब कसकर चलने को मजबूर हैं।









