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चार धाम में अब ‘गैर-सनातनी’ की एंट्री बैन? देहरादून में हुई बड़ी बैठक में लिया गया अहम फैसला; जानें क्या है नया नियम

उत्तराखंड के चार धामों के मंदिरों में गैर-सनातनियों का प्रवेश बंद। बद्रीनाथ-केदारनाथ समिति ने बैठक में फैसला लिया। सिर्फ गर्भगृह पर लागू, बाहरी क्षेत्र खुला रहेगा। यात्रा 2026 अप्रैल से शुरू।

By Manju Negi

उत्तराखंड के पवित्र चार धाम यात्रा को लेकर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने हाल ही में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई, जिसमें धामों के मंदिर परिसरों में गैर-सनातनियों के प्रवेश पर रोक लगाने का फैसला लिया गया। यह कदम धार्मिक स्थलों की परंपरागत पवित्रता को बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। समिति ने 2026-27 के लिए व्यापक बजट भी स्वीकृत किया, जो यात्रा व्यवस्था को और मजबूत बनाएगा।

चार धाम में अब 'गैर-सनातनी' की एंट्री बैन? देहरादून में हुई बड़ी बैठक में लिया गया अहम फैसला; जानें क्या है नया नियम

बैठक के मुख्य बिंदु

देहरादून में हुई बोर्ड बैठक में समिति के सदस्यों ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। फोकस मुख्य रूप से बद्रीनाथ और केदारनाथ के गर्भगृहों पर रहा, लेकिन यह नियम समिति के नियंत्रण वाले अन्य महत्वपूर्ण मंदिरों पर भी लागू होगा। प्रतिबंध सिर्फ पूजा स्थलों तक सीमित है, ताकि बाहरी क्षेत्रों में कोई असर न पड़े। गैर-सनातनी कर्मचारियों के रोजगार की चिंता को ध्यान में रखते हुए नियम को संतुलित रखा गया है। इससे पहले अन्य धाम समितियों ने भी इसी दिशा में कदम उठाए हैं।

नियम का दायरा और कारण

यह व्यवस्था धामों को विशुद्ध तीर्थ के रूप में स्थापित करने की दिशा में है। समिति के प्रमुख ने स्पष्ट किया कि तीर्थयात्रियों के लिए आध्यात्मिक माहौल बनाए रखना प्राथमिकता है। बाहरी इलाकों में पर्यटक या अन्य यात्री स्वतंत्र रूप से घूम सकेंगे, लेकिन मंदिर के अंदरूनी हिस्सों में परंपराओं का पालन अनिवार्य होगा। राज्य सरकार ने भी इस पहल का समर्थन किया है, जो धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय परंपराओं का सम्मान करती है।

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यात्रा 2026 पर प्रभाव

चार धाम यात्रा का मौसम अप्रैल से शुरू होगा। सबसे पहले गंगोत्री और यमुनोत्री के द्वार खुलेंगे, उसके बाद बद्री-केदार। ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया सक्रिय है, और अन्य नियम जैसे मोबाइल फोन पर पाबंदी भी जारी रहेगी। यह बदलाव यात्रा की सुरक्षा और शांति सुनिश्चित करेगा। पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि इससे श्रद्धालुओं का अनुभव और समृद्ध होगा, हालांकि कुछ लोग इसे सांस्कृतिक संरक्षण का प्रयास मान रहे हैं।

भविष्य की संभावनाएं

यह निर्णय उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देगा। अन्य धाम समितियां भी इसी पैटर्न को अपनाने पर विचार कर रही हैं। कुल मिलाकर, यह कदम प्राचीन परंपराओं को आधुनिक संदर्भ में ढालने का प्रयास है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक दिशानिर्देशों का पालन करें।

Author
Manju Negi
अमर उजाला में इंटर्नशिप करने के बाद मंजु GyanOk में न्यूज टीम को लीड कर रही है. मूल रूप से उत्तराखंड से हैं और GyanOk नेशनल और राज्यों से संबंधित न्यूज को बारीकी से पाठकों तक अपनी टीम के माध्यम से पहुंचा रही हैं.

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