
लंबे इंतजार के बाद भारत में आज बुधवार से दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना प्रक्रिया (Census 2027) का आगाज हो गया है। यह देश की कुल 16वीं और आजादी के बाद की 8वीं जनगणना है, जो पूरी तरह डिजिटल रूप में हो रही है। कोविड-19 महामारी के कारण 2021 में टली इस प्रक्रिया का पहला चरण आज से शुरू होकर 15 अप्रैल तक चलेगा, जिसमें हाउस लिस्टिंग (HLO) और घरों की गणना शामिल है।
16 अप्रैल से 15 मई तक हाउस लिस्टिंग का मुख्य कार्य होगा, जबकि जनसंख्या गणना (PE) का संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 तय की गई है। बर्फीले क्षेत्रों जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए यह तिथि 1 अक्टूबर 2026 होगी।
पहली बार ‘स्व-गणना’ का विकल्प
पहली बार ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) का विकल्प देकर सरकार ने डिजिटल क्रांति को साकार किया है। नागरिक मोबाइल ऐप या ऑनलाइन पोर्टल के जरिए घर बैठे अपनी जानकारी भर सकेंगे। पहले चरण में कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जो भवनों की स्थिति से लेकर परिवार की सुविधाओं तक सबकुछ कवर करेंगे।
इनमें भवन संख्या, जनगणना घर की संख्या, फर्श-दीवार-छत की सामग्री, घर के इस्तेमाल का मकसद, परिवार की संख्या, मुखिया का नाम-लिंग-जाति, मालिकाना हक, कमरों की संख्या, पीने के पानी का स्रोत, रोशनी, शौचालय, गंदे पानी का निकास, रसोई-LPG कनेक्शन, मुख्य ईंधन, रेडियो-टीवी-इंटरनेट-कंप्यूटर-मोबाइल जैसी सुविधाएं, वाहन, मुख्य अनाज और मोबाइल नंबर शामिल हैं। ये सवाल विकास योजनाओं, कल्याणकारी नीतियों और संसदीय परिसीमन का आधार बनेंगे।
दूसरा चरण: जाति-आधारित गणना
दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा, जिसमें जाति-आधारित गणना होगी। हाउस लिस्टिंग में सभी इमारतों को जियो-टैगिंग कर विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी, जो डेटा की सटीकता सुनिश्चित करेगी। 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों- अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, कर्नाटक, गोवा, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम, NDMC और दिल्ली छावनी बोर्ड- में HLO पहले पूरा होगा। केंद्र ने इसके लिए 11,718 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, जिसमें 30 लाख कर्मचारी लगेंगे। यह प्रक्रिया 30 सितंबर 2026 तक चलेगी।
डिजिटल जनगणना के फायदे
डिजिटल जनगणना से कागजी काम खत्म हो जाएगा, डेटा रीयल-टाइम उपलब्ध होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी। जाति गणना सामाजिक न्याय को मजबूत करेगी, जबकि जियो-मैपिंग से हर घर का सटीक लोकेशन रिकॉर्ड होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह 140 करोड़ आबादी के साथ ऐतिहासिक होगा, जो नीतियों को नई दिशा देगा। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता चुनौती हो सकती है, लेकिन प्रशिक्षित गणनाकर्ता मदद करेंगे। जानकारी न देने पर कानूनी कार्रवाई संभव है।
जनगणना का भविष्य पर प्रभाव
यह जनगणना न केवल आंकड़े जुटाएगी, बल्कि भारत की बदलती तस्वीर को उजागर करेगी। सरकार ने मोबाइल पर मैसेज भेजकर जागरूकता अभियान शुरू किया है। सफलता से डेटा-संचालित शासन मजबूत होगा, जो भविष्य की योजनाओं का आधार बनेगा।









