
टीचिंग में करियर बनाने वाले युवा अक्सर B.Ed और D.El.Ed में से कौन सा कोर्स चुनें, इसे लेकर दुविधा में रहते हैं। आपको बता दें कि B.Ed एक प्रोफेशनल डिग्री कोर्स है जो मुख्य रूप से 6वीं से 12वीं क्लास तक के बड़े बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए है। वहीं, D.El.Ed एक डिप्लोमा कोर्स है जो नर्सरी से 8वीं क्लास तक के छोटे बच्चों को पढ़ाने वाले प्राइमरी टीचर्स को तैयार करता है। सीधे शब्दों में कहें, अगर आप प्राइमरी टीचर (छोटे बच्चों) बनना चाहते हैं, तो D.El.Ed करें, और उच्च कक्षा के टीचर (बड़े बच्चों) के लिए B.Ed करना जरूरी है।
B.Ed और D.El.Ed कोर्स के लिए योग्यता
B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन) कोर्स में दाखिला लेने के लिए आपको किसी भी स्ट्रीम में स्नातक (Graduation) कम से कम 50% अंकों के साथ पूरा करना ज़रूरी होता है, हालांकि कुछ जगहों पर यह प्रतिशत 55% तक मांगा जाता है।
दूसरी ओर D.El.Ed (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) कोर्स में प्रवेश के लिए केवल 12वीं पास होना काफी है, जिसमें ज्यादातर राज्यों में 50 से 55% अंक की मांग होती है। इसका मतलब है कि आप 12वीं के तुरंत बाद ही D.El.Ed करके शिक्षक बनने की ट्रेनिंग शुरू कर सकते हैं।
D.L.Ed. और B.Ed. की सालाना फीस में अंतर
डी.एल.एड. (D.L.Ed.) कोर्स की सालाना फीस सरकारी कॉलेजों में लगभग ₹8,000 से ₹20,000 तक होती है, जबकि प्राइवेट कॉलेजों में यह ज्यादा हो सकती है। वहीं, बी.एड. (B.Ed.) की फीस सरकारी कॉलेजों में करीब ₹20,000 से ₹40,000 तक रहती है, लेकिन प्राइवेट कॉलेजों में यह ₹60,000 से लेकर ₹1.5 लाख सालाना तक पहुँच जाती है। इस तुलना से यह स्पष्ट है कि बी.एड. की तुलना में डी.एल.एड. कम पैसों में किया जा सकता है।
B.Ed. और D.El.Ed. में प्रवेश प्रक्रिया
बी.एड. (B.Ed.) कोर्स में दाखिले के लिए लगभग सभी राज्यों में बड़ी प्रवेश परीक्षा (Entrance Exam) देनी पड़ती है, जैसे कि यूपी बीएड जेईई, राजस्थान पीटीईटी या एमपी प्री-बीएड। इसके विपरीत, डी.एल.एड. (D.El.Ed.) कोर्स में कई राज्यों में 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर सीधा एडमिशन मिल जाता है, जबकि कुछ जगहों पर एक छोटी-सी प्रवेश परीक्षा भी ली जाती है।
D.L.Ed और B.Ed के बाद टीचर की सैलरी
D.L.Ed (डिप्लोमा इन एलिमेंटरी एजुकेशन) करने वाले उम्मीदवार ज्यादातर प्राइमरी स्कूलों में टीचर बनते हैं। सरकारी प्राइमरी टीचर की शुरुआती सैलरी ₹35,000 से ₹45,000 प्रति माह होती है, जबकि प्राइवेट स्कूल में यह ₹12,000 से ₹25,000 तक मिलती है। वहीं, B.Ed करने के बाद TGT (प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक) की सरकारी नौकरी में शुरुआती सैलरी ₹50,000 से ₹70,000 और PGT (स्नातकोत्तर शिक्षक) में ₹60,000 से ₹90,000 तक शुरू होती है। अच्छे प्राइवेट स्कूलों में भी B.Ed वालों को आसानी से ₹40,000 से ₹80,000 तक मिल जाते हैं।
D.El.Ed vs. B.Ed
टीचर बनने के लिए D.El.Ed (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) करने वाले छात्र CTET या स्टेट TET के पेपर-1 पास करके केवल प्राइमरी टीचर (कक्षा 1 से 5) की भर्तियों में शामिल हो सकते हैं। वहीं, B.Ed (बैचलर ऑफ एजुकेशन) करने वाले छात्र CTET का पेपर-1 और पेपर-2 दोनों दे सकते हैं। इसका मतलब है कि B.Ed वालों के पास प्राइमरी से लेकर PGT (पोस्ट ग्रेजुएट टीचर) तक हर तरह की शिक्षक भर्ती में आवेदन करने का विकल्प होता है। KVS, NVS, DSSSB, RPSC जैसी बड़ी सरकारी शिक्षक भर्तियों में B.Ed उम्मीदवारों के पास अधिक विकल्प उपलब्ध होते हैं।
अगर आप 12वीं के बाद डी.एल.एड. करते हैं, तो आपकी नौकरी लगभग 19-20 साल की उम्र में ही शुरू हो सकती है। वहीं, बी.एड. करने के लिए ग्रेजुएशन के बाद 2 साल और लगते हैं, इसलिए नौकरी 22-23 साल की उम्र में मिलती है। हालांकि, भले ही डी.एल.एड. से जल्दी नौकरी मिले, लंबे समय में बी.एड. किए हुए शिक्षकों की सैलरी और प्रमोशन बहुत तेजी से बढ़ते हैं और उनके लिए आगे बढ़ने के मौके भी ज़्यादा होते हैं।
D.El.Ed या B.Ed: आपके लिए कौन सा बेहतर?
यदि आप 12वीं पास हैं, जल्दी नौकरी पाना चाहते हैं, कम फीस देना चाहते हैं, और छोटे बच्चों को पढ़ाने में रुचि रखते हैं, तो आपके लिए डी.एल.एड (D.El.Ed) सबसे अच्छा है। वहीं, अगर आप ग्रेजुएट हैं, हाईस्कूल/इंटर या कोचिंग में पढ़ाना चाहते हैं, और भविष्य में अच्छी सैलरी और बड़ी पोस्ट पाना चाहते हैं, तो बी.एड (B.Ed) सही रहेगा। दोनों ही रास्ते शानदार हैं और टीचिंग करियर हमेशा सम्मान और सुकून देता है; इसलिए अपनी जेब, उम्र और लक्ष्य को देखकर सही चुनाव करें।









