
भारतीय रेलवे का इतिहास 1853 से शुरू हुआ और आज यह दुनिया के सबसे बड़े परिवहन नेटवर्कों में से एक है। आंकड़ों के अनुसार, भारत में रोजाना करीब 2.5 करोड़ लोग ट्रेनों में सफर करते हैं। इतने बड़े सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने के लिए रेलवे को कुशल और सतर्क ड्राइवरों की जरूरत होती है। लोको पायलट न केवल ट्रेन चलाते हैं, बल्कि हज़ारों यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर होती है।
कौन बन सकता है लोको पायलट? (योग्यता)
ट्रेन ड्राइवर बनने के लिए केवल सामान्य पढ़ाई काफी नहीं है। इसके लिए आपके पास तकनीकी डिग्री होना अनिवार्य है:
- न्यूनतम शिक्षा: किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं कक्षा पास होना जरूरी है।
- तकनीकी कोर्स: 10वीं के साथ-साथ आपके पास ITI (इलेक्ट्रिशियन, फिटर, मैकेनिक, आदि) या डिप्लोमा/डिग्री (मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स) होनी चाहिए।
- आयु सीमा: सामान्यतः 18 से 30 वर्ष के युवा इसके लिए आवेदन कर सकते हैं (आरक्षित वर्गों को नियमानुसार छूट मिलती है)।
चयन प्रक्रिया के चार कड़े पड़ाव
रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) लोको पायलट के चयन के लिए एक पारदर्शी प्रक्रिया अपनाता है:
- CBT-1 और CBT-2 (कंप्यूटर आधारित परीक्षा): इसमें गणित, रीजनिंग, जनरल साइंस और करंट अफेयर्स के सवाल पूछे जाते हैं। दूसरे चरण में आपके तकनीकी विषय (जैसे ITI ट्रेड) से जुड़े सवाल भी होते हैं।
- CBAT (साइको टेस्ट): इसमें आपकी एकाग्रता, याददाश्त और खतरे के समय तुरंत निर्णय लेने की क्षमता को परखा जाता है।
- मेडिकल टेस्ट (A-1 श्रेणी): यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है। लोको पायलट के लिए आपकी आँखों की रोशनी 6/6 होनी चाहिए। इसमें कलर ब्लाइंडनेस या चश्मा लगाने वालों को अयोग्य माना जाता है।
- दस्तावेज सत्यापन: सभी चरणों को पास करने के बाद आपके शैक्षणिक और तकनीकी प्रमाणपत्रों की असली प्रतियों की जाँच की जाती है।
ट्रेन चलाने की ट्रेनिंग और शुरुआत
चयन के बाद आपको सीधे ट्रेन चलाने को नहीं मिलती। पहले आपको रेलवे के ट्रेनिंग सेंटर में करीब 6 से 9 महीने की कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है। यहाँ आपको इंजन की बारीकियों, सिग्नल प्रणाली और आपातकालीन स्थितियों से निपटने का तरीका सिखाया जाता है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद आप ‘असिस्टेंट लोको पायलट’ (ALP) के रूप में मालगाड़ी या पैसेंजर ट्रेन में सीनियर ड्राइवर के साथ काम शुरू करते हैं।
वेतन, भत्ते और प्रमोशन
लोको पायलट की नौकरी न केवल सम्मानजनक है, बल्कि इसमें पैसा भी अच्छा है:
- सैलरी: एक नए असिस्टेंट लोको पायलट की शुरुआती इन-हैंड सैलरी 35,000 से 45,000 रुपये (भत्तों सहित) तक हो सकती है।
- अलाउंस (भत्ते): इसमें किलोमीटर भत्ता (जितनी ट्रेन चलाएंगे उतना पैसा), नाइट ड्यूटी भत्ता और रनिंग अलाउंस जैसे कई फायदे मिलते हैं।
- प्रमोशन: अनुभव के साथ आप सीनियर असिस्टेंट लोको पायलट, फिर गुड्स लोको पायलट और अंत में राजधानी या शताब्दी जैसी ट्रेनों के ‘मेल/एक्सप्रेस लोको पायलट’ बनते हैं।









