
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को एक दबाव भरा आदेश जारी किया है: तीन महीने के भीतर फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) को मजबूत बनाएं, रिक्त पदों को खाली न रखें और लंबित कामों का जल्द से जल्द निपटारा करें। इस निर्णय के साथ न केवल आपराधिक जांच में फॉरेंसिक सबूतों की भूमिका और बढ़ती दिख रही है, बल्कि युवाओं के लिए फॉरेंसिक साइंस एक नए जमाने की “गोल्ड चॉइस” नौकरी बन रहा है।
आज के समय में अपराध जांच में सिर्फ गश्त और गवाहों की गवाही पर निर्भर नहीं रहा जा रहा; बल्कि वैज्ञानिक जांच- डीएनए, फिंगरप्रिंट, डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज विश्लेषण जैसी तकनीकी चीजों को अदालत के लिए अहम सबूत माना जा रहा है। इस बदलाव के कारण फॉरेंसिक एक्सपर्ट की मांग तेजी से बढ़ रही है और सरकार भी अब FSL को डिपार्टमेंट‑वर्सन इंजीनियरिंग या मेडिकल जैसा आधारभूत स्ट्रक्चर बनाने पर जोर दे रही है।
फॉरेंसिक एक्सपर्ट आखिर क्या‑क्या करते हैं?
फॉरेंसिक एक्सपर्ट आपराधिक घटना स्थल से मिले भौतिक साक्ष्यों की वैज्ञानिक रूप से जांच करते हैं। इसमें रक्त के नमूने, फिंगरप्रिंट, बाल‑बालक, डीएनए सैंपल, गोली‑बुलेट, आग्नेय हथियार, जले‑कटे दस्तावेज, झूठी हस्ताक्षर, डिजिटल डिवाइस (फोन, लैपटॉप) और खून‑विष जैसे टॉक्सिक तत्व तक शामिल होते हैं। इनकी जांच के बाद तैयार की गई रिपोर्ट न्यायालय में पेश होती है और अपराधियों को दोषी सिद्ध करने या बेगुनाह छूटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस रोल में न केवल विज्ञान की समझ बल्कि धैर्य, डिटेल‑ओरिएंटेड सोच और अच्छी इंग्लिश राइटिंग स्किल भी जरूरी है।
फॉरेंसिक एक्सपर्ट बनने के लिए कौन‑सा कोर्स जरूरी?
अगर आप फॉरेंसिक एक्सपर्ट या फॉरेंसिक साइंटिस्ट बनना चाहते तो पहला कदम 12वीं में Science (Physics, Chemistry, Biology/Mathematics) से पास होना है। इसके बाद निम्नलिखित कोर्स सीधे‑सीधे फॉरेंसिक रोड दिखाते हैं:
- B.Sc Forensic Science: यह 3‑साल का ग्रेजुएशन कोर्स है, जो फॉरेंसिक लैब टेक्नीशियन, असिस्टेंट और जूनियर साइंटिफिक ऑफिसर जैसी पोस्ट्स के लिए बेसिक क्वालिफिकेशन माना जाता है।
- M.Sc Forensic Science: यह 2‑साल का पोस्ट‑ग्रेजुएशन कोर्स है, जो सरकारी FSL, CBI, IB, NIA और राज्य फोरेंसिक विंग में साइंटिस्ट‑लेवल नौकरियों के लिए ज्यादा वैल्यूड है।
- B.Sc in Criminology / Criminal Justice या संबंधित विषय, जहां फॉरेंसिक विशेषज्ञता इन्टीग्रेटेड होती है, वह भी अपराध‑विज्ञान और फॉरेंसिक रोल के लिए उपयोगी है।
- डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स: कई यूनिवर्सिटी और कॉलेज 6–12 महीने के डिप्लोमा‑स्तर के प्रोग्राम चलाते हैं, जिनसे फॉरेंसिक टेक्नीशियन, लैब असिस्टेंट या डिजिटल फॉरेंसिक रोल में एंट्री मिल सकती है।
देश‑भर में कई मान्यता प्राप्त संस्थान फॉरेंसिक साइंस की पढ़ाई कराते हैं, जिनमें नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU), दिल्ली के श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज, क्राइस्ट यूनिवर्सिटी (बैंगलोर), सेंट जेवियर्स कॉलेज (मुंबई) और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी जैसे नाम प्रमुख हैं।
सरकारी नौकरी कहां मिलती है?
फॉरेंसिक साइंस की डिग्री लेने के बाद रोजगार के मुख्य स्तर यही हैं:
- फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL): राज्य और केंद्रीय स्तर पर चल रही फॉरेंसिक लैब में जूनियर साइंटिफिक ऑफिसर, टेक्नीशियन, लैब असिस्टेंट और अन्य तकनीकी पदों पर भर्ती समय‑समय पर निकलती रहती है। यहीं गृह मंत्रालय ने खाली पदों को तत्काल भरने और लंबित मामलों को 90 दिन में निपटाने का आदेश दिया है, जिससे नए रोजगार के अवसर और ज्यादा खुलने की संभावना है।
- पुलिस विभाग: राज्य पुलिस के फोरेंसिक विंग, क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन यूनिट और विशेष शाखाओं में फॉरेंसिक एक्सपर्ट की जरूरत होती है।
- CBI, IB, NIA और राष्ट्रीय जांच एजेंसियां: गंभीर आपराधिक और राष्ट्रीय सुरक्षा‑संबंधी मामलों में फॉरेंसिक साइंटिस्ट‑लेवल नियुक्तियां होती हैं, जिनके लिए ज्यादातर उम्मीदवारों के लिए M.Sc Forensic या संबंधित उच्च योग्यता चाहिए होती है।
सैलरी और भर्ती प्रक्रिया
फॉरेंसिक एक्सपर्ट की सैलरी शुरुआती स्तर पर लगभग 3 लाख से 6 लाख रुपये प्रति वर्ष तक रहती है, जो अनुभव और रैंक के साथ बढ़कर 6–12 लाख या उससे ऊपर भी जा सकती है, खासकर केंद्रीय एजेंसियों या वरिष्ठ लैब पदों में। FSL जैसे राज्य‑स्तरीय लैब में जूनियर साइंटिफिक ऑफिसर जैसे पद पर चुने जाने वाले उम्मीदवारों को आमतौर पर लगभग 68 हजार रुपये प्रति महीना वेतन दिया जाता है, जिसमें भत्ते और सरकारी लाभ भी जुड़े होते हैं।
भर्ती ज्यादातर लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के जरिए होती है, जहां आपकी विज्ञान‑आधारित तार्किक क्षमता, फॉरेंसिक टर्मिनोलॉजी और डॉक्यूमेंट विश्लेषण से जुड़ी बुनियादी समझ जांची जाती है। गृह मंत्रालय ने यह भी सुझाव दिया है कि भर्ती नियमों की समीक्षा कर पारंपरिक विज्ञान डिग्रियों के साथ‑साथ NFSU जैसे संस्थानों की विशेष फॉरेंसिक डिग्रियों को अलग से मान्यता दी जाए, जिससे फॉरेंसिक ग्रेजुएट्स के लिए नौकरी रास्ते और चौड़े हों।









