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नौकरी पेशा लोगों को झटका! इन सेक्टरों में नौकरियों में 29% की भारी गिरावट; AI और मंदी का दिखने लगा असर।

क्या आपकी नौकरी सुरक्षित है? जॉब मार्केट से आई एक डरावनी रिपोर्ट के अनुसार, एंट्री-लेवल पदों पर 29% की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। AI का बढ़ता प्रभाव और आर्थिक सुस्ती अब सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि हकीकत बन चुकी है। जानें कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

By Pinki Negi

नौकरी पेशा लोगों को झटका! इन सेक्टरों में नौकरियों में 29% की भारी गिरावट; AI और मंदी का दिखने लगा असर।
नौकरी पेशा लोगों को झटका

आधुनिक दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते दखल ने जॉब मार्केट की सूरत बदल दी है, जिसका सबसे बुरा असर नई नौकरी ढूंढ रहे युवाओं और शुरुआती स्तर (Entry-level) पर काम करने वालों पर पड़ा है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, एंट्री लेवल की नौकरियों में 29 फीसदी तक की कमी दर्ज की गई है।

जहाँ एक ओर AI के आने से भविष्य में नई तरह की नौकरियों के अवसर बढ़ने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर वर्तमान में ‘फ्रेशर्स’ के लिए बाजार काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। तकनीकी बदलाव की इस लहर ने कंपनियों के काम करने के तरीके को बदल दिया है, जिससे अब नौकरी पाने के लिए पारंपरिक स्किल्स के बजाय नई तकनीक के साथ तालमेल बिठाना अनिवार्य हो गया है।

ग्रेजुएट्स के लिए क्यों कम हो रहे हैं मौके?

साल 2025 में लेबर मार्केट की स्थिति युवाओं के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रही है। रैंडस्टैड की एक वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2024 से अब तक शुरुआती स्तर (Entry-level) की नौकरियों में 29% की भारी गिरावट आई है। यह मंदी अब केवल अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी (स्ट्रक्चरल) रूप लेती जा रही है।

इसका असर पूरी दुनिया में देखा जा रहा है: ब्रिटेन में 17,000 पदों के लिए रिकॉर्ड 1.2 करोड़ ग्रेजुएट्स ने आवेदन किया, जबकि भारत में युवा बेरोजगारी दर 17% और चीन में 16.5% तक पहुँच गई है। अमेरिका में भी युवाओं के बीच बेरोजगारी की दर सामान्य दर से दोगुनी होकर 10.8% हो गई है। यह आंकड़े साफ बताते हैं कि डिग्री पूरी करने के बाद भी युवाओं को करियर की शुरुआत करने के लिए पहले से कहीं ज्यादा संघर्ष करना पड़ रहा है।

सिर्फ AI नहीं, इन 3 कारणों से भी घट रही हैं नौकरियां

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, नौकरियों में आ रही कमी के लिए केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को जिम्मेदार ठहराना पूरी तरह सही नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा भर्ती में दिखाई जा रही सुस्ती (Hiring Slowdown) और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भी इसके बड़े कारण हैं।

इन चुनौतियों के बीच ‘Gen-Z’ यानी आज के दौर के युवाओं ने अपना रुख बदलना शुरू कर दिया है। अब वे केवल किताबी डिग्री के भरोसे बैठने के बजाय अप्रेंटिसशिप और वोकेशनल ट्रेनिंग (व्यावसायिक प्रशिक्षण) को प्राथमिकता दे रहे हैं। युवा अब उन हुनर या स्किल्स को सीखने पर जोर दे रहे हैं, जिनकी मांग सीधे तौर पर इंडस्ट्री में है, ताकि वे तकनीक और मंदी के इस दौर में भी रोजगार हासिल कर सकें।

2030 तक आएंगी 7.8 करोड़ नौकरियां, पर बदल जाएगा काम का तरीका

हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्कफोर्स का भविष्य बड़े बदलावों की ओर इशारा कर रहा है। अनुमान है कि साल 2030 तक दुनिया भर में 7.8 करोड़ (78 मिलियन) नई नौकरियां पैदा होंगी, लेकिन इस दौरान 22 प्रतिशत मौजूदा नौकरियों के स्वरूप में बुनियादी बदलाव आएगा। इसी को देखते हुए 85 प्रतिशत कंपनियां अपने कर्मचारियों को ‘री-स्किल’ करने यानी नए हुनर सिखाने पर ध्यान दे रही हैं, जिसमें AI स्किल्स सबसे ऊपर हैं।

एंथ्रोपिक की रिपोर्ट बताती है कि लगभग आधी नौकरियों (49%) के कम से कम एक चौथाई हिस्से को अब AI की मदद से किया जा सकता है। विशेष रूप से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे उच्च शिक्षा वाले क्षेत्रों में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, जो यह संकेत देता है कि भविष्य में सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि तकनीक के साथ तालमेल ही सफलता की कुंजी होगी।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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