
किडनी डायलिसिस को लेकर लोगों में एक आम डर बैठा है कि एक बार यह प्रक्रिया शुरू हो गई तो जिंदगीभर चलती रहेगी। लेकिन क्या वाकई ऐसा है? शरीर के खून को साफ करने और टॉक्सिन्स बाहर निकालने का काम किडनी ही करती है। गलत खान-पान, लाइफस्टाइल और बीमारियों से किडनी खराब होने लगती है। शुरू में हल्की लगने वाली यह समस्या एंड स्टेज तक पहुंच जाती है, जहां डायलिसिस जरूरी हो जाता है। सवाल वही है- क्या इससे वापसी संभव है?
डायलिसिस की अवधि
सफदरजंग अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग प्रमुख डॉ. हिमांशु वर्मा से हुई विशेष बातचीत में यह साफ हो गया कि डायलिसिस की अवधि मरीज की स्थिति पर निर्भर करती है। “कुछ मामलों में यह थोड़े समय के लिए होती है, तो कई में लाइफलॉन्ग या ट्रांसप्लांट तक चलती है,” डॉ. वर्मा ने कहा। एक्यूट किडनी इंजरी (AKI) में, जैसे डेंगू, मलेरिया या डिहाइड्रेशन से अचानक किडनी फेल हो जाए, तो डायलिसिस अस्थायी होती है। किडनी रिकवर होते ही, यानी 10-15% फंक्शन लौटते ही, इसे बंद किया जा सकता है। 10-15% मामलों में पूर्ण रिकवरी हो जाती है।
डायलिसिस के प्रकार और प्रक्रिया
डायलिसिस दो मुख्य प्रकार की होती है- हीमोडायलिसिस और पेरिटोनियल डायलिसिस। हीमोडायलिसिस में मशीन ब्लड को फिल्टर करती है। हफ्ते में 3 बार, 3-4 घंटे का सेशन अस्पताल में होता है। पेरिटोनियल में पेट की झिल्ली फिल्टर का काम करती है, घर पर ही किया जा सकता है।
क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) में, जो डायबिटीज, हाई BP या सालों की नेग्लिजेंस से होती है, किडनी परमानेंट डैमेज हो जाती है। यहां डायलिसिस सपोर्ट सिस्टम बन जाता है, जो जिंदगी 5-25 साल बढ़ा सकता है। बंद करने का रास्ता सिर्फ किडनी ट्रांसप्लांट है।
एक्सपर्ट्स की राय
डॉ. जितेंद्र कुमार जैसे एक्सपर्ट्स स्पष्ट कहते हैं कि डायलिसिस न किडनी ठीक करती है, न खराब। यह सिर्फ किडनी का आर्टिफिशियल काम करती है। एक्यूट केस में हफ्तों बाद बंद हो जाती है, लेकिन CKD स्टेज-5 में लाइफलॉन्ग।
किडनी खराब होने के कारण और बचाव
किडनी डैमेज के प्रमुख कारण- ज्यादा नमक, स्मोकिंग, शराब, कम पानी पीना। डॉ. हिमांशु ने सलाह दी, “डाइट में नमक कम करें, रोज व्यायाम करें, 3-4 लीटर पानी पिएं।” प्रिवेंशन ही बेस्ट ट्रीटमेंट है।
शुरुआती लक्षण नजरअंदाज न करें
लोगों में मिथक है कि डायलिसिस ‘डरावनी’ है, लेकिन सही समय पर इलाज से लाखों जिंदगियां बच रही हैं। नेफ्रोलॉजिस्ट से नियमित चेकअप करवाएं। किडनी हेल्थ के लिए जागरूकता जरूरी है।









