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HDFC Bank में बड़ा उलटफेर! विदेशी भागे तो देसी निवेशकों ने लगा दिया ₹28,293 करोड़ का दांव, खरीदे ताबड़तोड़ शेयर

जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में HDFC बैंक के शेयर 26.2% लुढ़के। FIIs ने लगातार तीसरी तिमाही में 47.95 करोड़ शेयर (₹35,000 करोड़) बेचे, होल्डिंग 47.67% से घटकर 44.05%। DIIs ने मौके का फायदा उठाया—म्यूचुअल फंड्स ने 38.67 करोड़ शेयर (₹28,293 करोड़) खरीदे। चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के इस्तीफे और SEBI जांच से गवर्नेंस चिंताएं बढ़ीं। देसी भरोसा बरकरार, लेकिन रिकवरी मुश्किल।

By Pinki Negi

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भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की दिग्गज कंपनी HDFC बैंक के शेयरों में लगातार उतार-चढ़ाव और भारी गिरावट के बीच एक चौंकाने वाला मोड़ आया है। जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने करीब 35,000 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले, जबकि घरेलू निवेशकों (DIIs) ने इन्हीं शेयरों को ताबड़तोड़ खरीदा। इस दौरान बैंक के शेयर 26.2 प्रतिशत लुढ़क गए, जो 2020 की जनवरी-मार्च तिमाही के बाद सबसे बड़ी गिरावट है- जब कोविड महामारी के कारण स्टॉक में 33 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई थी।

FIIs की लगातार तीसरी तिमाही में होल्डिंग घटना

शेयरहोल्डिंग पैटर्न के ताजा आंकड़ों से साफ झलकता है कि FIIs ने लगातार तीसरी तिमाही में अपनी हिस्सेदारी घटाई। दिसंबर 2025 के अंत में 47.67 प्रतिशत होल्डिंग मार्च 2026 तक घटकर 44.05 प्रतिशत रह गई, यानी 3.62 प्रतिशत या 47.95 करोड़ शेयरों की बिकवाली हुई।

FIIs की संख्या भी 2,757 से सिमटकर 2,528 रह गई, जो वैश्विक निवेशकों के सेंटीमेंट में कमी का संकेत देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी बाजारों की अनिश्चितता और भारत में गवर्नेंस चिंताओं ने विदेशी पूंजी को भगाया।

देसी निवेशकों का मजबूत कदम

FIIs के इस रुख के उलट, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार की कमजोरी को खरीदारी का मौका माना। म्यूचुअल फंड्स ने लगातार पांचवीं तिमाही में हिस्सेदारी बढ़ाई- 26.66 प्रतिशत से 29.54 प्रतिशत तक, यानी 2.88 प्रतिशत या 38.67 करोड़ शेयर जोड़े, जिनकी कीमत 28,293 करोड़ रुपये रही। कुल DII होल्डिंग 37.19 प्रतिशत से उछलकर 40.32 प्रतिशत हो गई। प्रोविडेंट फंड्स ने 2,239 करोड़ और बीमा कंपनियों ने 256 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, हालांकि LIC ने 969 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। यह देसी निवेशकों का भरोसा दर्शाता है, जो लॉन्ग-टर्म ग्रोथ पर दांव लगा रहे हैं।

गिरावट की जड़ें: गवर्नेंस संकट

शेयरों की यह जोरदार गिरावट मुख्य रूप से पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे से जुड़ी है। मार्च 2026 में उन्होंने इस्तीफा देते हुए पिछले दो सालों की घटनाओं का जिक्र किया, जो उनके मूल्यों से मेल नहीं खाती थीं। इससे गवर्नेंस पर सवाल उठे और SEBI ने जांच शुरू कर दी- क्या बोर्ड ने फिड्यूशरी ड्यूटी निभाई या डिस्क्लोजर में चूक हुई?

SEBI चेयरमैन तुहिन कанта पांडे ने स्वतंत्र निदेशकों को चेतावनी दी कि बिना सबूत के आरोप बाजार को प्रभावित करते हैं। मार्च में शेयर 887 रुपये से गिरकर 746-761 रुपये पर आ गए, जबकि 52-सप्ताह निचला स्तर 738 रुपये छुआ।

मैनेजमेंट संकट का लंबा सिलसिला

बैंक पर कई सालों से मैनेजमेंट संकट मंडरा रहा है। 2020 से टॉप लीडरशिप में बदलाव, RBI का क्रेडिट कार्ड बिजनेस सस्पेंड करना और HDFC के साथ मर्जर के रेगुलेटरी झटके ग्रोथ को प्रभावित कर रहे हैं। Jefferies जैसी फर्मों ने भी हिस्सेदारी घटाई। अप्रैल 2026 में शेयर 746.35 रुपये पर 0.63 प्रतिशत फिसला।

विशेषज्ञ इसे लॉन्ग-टर्म निवेश का मौका मानते हैं, लेकिन रिस्क बरकरार है। बैंक ने एक्सटर्नल लॉ फर्म से गवर्नेंस रिव्यू कराया है, जिसकी रिपोर्ट जल्द आएगी। देसी निवेशकों की यह खरीदारी बाजार की गहराई दिखाती है, पर FIIs का रुख सुधरे बिना रिकवरी मुश्किल।

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Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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