
भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को कमजोर शुरुआत के बाद जबरदस्त रिकवरी का नजारा पेश किया। दिन के निचले स्तरों से उबरते हुए सेंसेक्स 185 अंकों की बढ़त के साथ 73,319.55 पर और निफ्टी 33.70 अंकों की तेजी के साथ 22,713.10 पर हरे निशान में बंद हुआ। रुपये की ऐतिहासिक मजबूती ने निवेशकों का भरोसा जगाया, जिससे निचले स्तरों पर खरीदारी बढ़ी और बाजार ने भारी गिरावट के बाद सांस ली।
बाजार की शानदार रिकवरी
बाजार की यह रौनक रुपये के डॉलर के मुकाबले 1.77 फीसदी की जबरदस्त मजबूती से उपजी, जहां USD/INR 94.78 से गिरकर 93.10 पर आ गया। इंट्राडे में यह 92.82 तक लुढ़क गया, जो 12 साल की सबसे बड़ी एकदिनी बढ़त है। आरबीआई के सधी हुई नीतियों, रूस-यूक्रेन शांति की उम्मीदों और कच्चे तेल कीमतों में नरमी ने रुपये को बल दिया।
निवेशकों ने इसे आयात सस्ता होने का संकेत माना, जिससे आईटी, रियल्टी और मेटल जैसे निर्यात-निर्भर सेक्टरों में खरीदारी का दौर चला। बाजार की कुल पूंजीगत 10 लाख करोड़ के संभावित नुकसान से बचकर 1 लाख करोड़ बढ़ी, जो निवेशकों के लिए राहत की सांस है।
दिनभर का उतार-चढ़ाव भरा सफर
दिनभर का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा। सुबह एशियाई बाजारों के लाल संकेतों और अमेरिकी टैरिफ चिंताओं से सेंसेक्स 71,545.81 के निचले स्तर तक गिरा, जबकि निफ्टी 22,182.55 पर ठहर गया। लेकिन दोपहर बाद वैल्यू बायिंग ने कमाल कर दिया- सेंसेक्स ने 1,773 अंक (2.48%) और निफ्टी ने 530 अंक (2.39%) की छलांग लगाई। मार्केट ब्रेड्थ मिश्रित रही, जहां 2,020 एडवांसेज के मुकाबले 1,216 डिक्लाइन्स हुए। ब्रॉड मार्केट में सतर्कता बरती गई, मिडकैप और स्मॉलकैप में हल्का दबाव दिखा।
सेक्टरों में चमकी IT की धाक
सेक्टरों में आईटी ने कमाल दिखाया, जो 2.60 फीसदी चढ़ा। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी 1.07 फीसदी और मेटल 0.39 फीसदी ऊपर रहे। प्राइवेट बैंक और फाइनेंशियल सर्विसेज में भी 0.39-0.25 फीसदी की हल्की तेजी आई। उलटे, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 0.93 फीसदी, फार्मा 0.92 फीसदी, ऑयल एंड गैस 0.79 फीसदी तथा हेल्थकेयर 0.86 फीसदी नीचे बंद हुए। निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम 2.09 फीसदी चमका, जबकि स्मॉलकैप 50 में 0.54 फीसदी की गिरावट रही।
आगे की राह में चुनौतियां
विश्लेषकों का मानना है कि यह रिकवरी अस्थायी हो सकती है। ग्लोबल संकेत, रुपये की आगे की चाल, कच्चा तेल और अमेरिकी टैरिफ नीतियां बाजार की दिशा तय करेंगी। Q4 रिजल्ट सीजन नजदीक आ रहा है, जो अगला बड़ा ट्रिगर बनेगा। निवेशक चुनिंदा खरीदारी पर फोकस करें, क्योंकि ब्रॉड रिकवरी अभी दूर है। रुपये की यह मजबूती अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताएं सतर्कता बरतने की नसीहत दे रही हैं। बाजार अब FII/DII प्रवाह और कॉर्पोरेट आय पर नजर रखेगा।









