
आजकल सोशल मीडिया पर मुंबई के एक कपल की कहानी खूब चर्चा बटोर रही है, जिसमें दावा किया गया है कि उन्होंने 17 लाख रुपये की रेंटल इनकम पर एक भी रुपया इनकम टैक्स नहीं दिया। पोस्ट के मुताबिक, अगर आपकी प्रॉपर्टी की कीमत 5-7 करोड़ रुपये है, तो कुछ कानूनी तरीकों से इसकी कमाई को टैक्स-फ्री बनाया जा सकता है।
कागजों पर यह गणित बहुत आसान और लुभावना लगता है, जिससे कोई भी प्रभावित हो सकता है। हालांकि, टैक्स एक्सपर्ट्स ने इस पर सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि असल जिंदगी में इसे लागू करना इतना सीधा नहीं है और इसके प्रैक्टिकल पहलुओं में कई कानूनी पेच हो सकते हैं।
Mr. Goel bought a Mumbai flat under his wife’s name.
— TaxBuddy (@TaxBuddy1) February 17, 2026
The flat generates ₹17 lakh rental income every year.
Tax paid on that rent: ₹0.
If you own a rental property, you can also pay zero tax 🧵👇
टैक्सबडी का वायरल दावा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ‘टैक्सबडी’ नाम के एक हैंडल ने एक दिलचस्प पोस्ट शेयर किया है, जो मकान मालिकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। पोस्ट में दावा किया गया है कि मुंबई में एक व्यक्ति की पत्नी के नाम पर रजिस्टर्ड फ्लैट से सालाना 17 लाख रुपये का किराया आता है, लेकिन उस पर टैक्स बिल्कुल शून्य है। टैक्सबडी का कहना है कि अगर सही प्लानिंग की जाए, तो किराए से होने वाली मोटी कमाई पर भी जीरो टैक्स दिया जा सकता है। यह पोस्ट सुझाव देता है कि प्रॉपर्टी का स्वामित्व और इनकम स्लैब का सही तालमेल बिठाकर टैक्स के बड़े बोझ से बचा जा सकता है।
टैक्स बचाने का जादुई नियम
टैक्सबडी के अनुसार, रेंटल इनकम पर टैक्स बचाने का सबसे बड़ा हथियार इनकम टैक्स एक्ट, 1961 का सेक्शन 24(a) है। इस नियम के तहत, आपकी प्रॉपर्टी से होने वाली कुल सालाना कमाई (Net Annual Value) पर सीधे 30% का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है।
सबसे अच्छी बात यह है कि आपने घर की मरम्मत या रखरखाव (Repairs & Maintenance) पर एक भी रुपया खर्च किया हो या नहीं, सरकार आपको यह 30% की छूट बिना किसी बिल या सबूत के देती है। यह फायदा पुरानी (Old) और नई (New) दोनों टैक्स व्यवस्थाओं में मिलता है, जिससे रेंटल इनकम का एक बड़ा हिस्सा टैक्स के दायरे से अपने आप बाहर हो जाता है।
कैसे ₹17 लाख की रेंटल इनकम हो सकती है ‘Zero Tax’
सोशल मीडिया पर वायरल इस दावे का आधार इनकम टैक्स एक्ट के दो बड़े नियम हैं। सबसे पहले, सेक्शन 24(a) के तहत ₹17 लाख के कुल किराए पर 30% यानी ₹5,10,000 का ‘स्टैंडर्ड डिडक्शन’ मिलता है (इसके लिए किसी बिल की ज़रूरत नहीं होती)। इसके बाद आपकी टैक्सेबल इनकम घटकर ₹11,90,000 रह जाती है। अब यहाँ काम आता है न्यू टैक्स रिजीम का नियम, जहाँ ₹12 लाख तक की आय पर सेक्शन 87A के तहत टैक्स रिबेट (छूट) मिलती है। यदि प्रॉपर्टी मालिक की इसके अलावा कोई और कमाई नहीं है, तो गणित के हिसाब से ₹17 लाख के किराए पर अंतिम टैक्स देनदारी शून्य हो जाती है।
₹17 लाख की रेंटल इनकम पर ₹1.76 लाख तक का टैक्स
अगर आप पुराने टैक्स सिस्टम का चुनाव करते हैं, तो ₹17 लाख की रेंटल इनकम पर गणित थोड़ा बदल जाता है। 30% स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद बची ₹11.9 लाख की आय पर करीब ₹1,76,280 (सेस सहित) टैक्स बनता है, क्योंकि यहाँ ₹5 लाख से अधिक आय होने पर सेक्शन 87A की छूट नहीं मिलती।
हालांकि, पुराना सिस्टम निवेश करने वालों के लिए फायदेमंद है। आप सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख की बचत, स्टांप ड्यूटी और होम लोन के ब्याज पर सेक्शन 24(b) के जरिए अतिरिक्त राहत पा सकते हैं। खास बात यह है कि किराए पर दी गई प्रॉपर्टी के पूरे ब्याज को आप खर्च के रूप में दिखा सकते हैं, जिससे आपकी टैक्स देनदारी काफी कम हो सकती है।
सोशल मीडिया का ‘जीरो टैक्स’ गणित, हकीकत में पड़ सकता है भारी
भले ही कागजों पर रेंटल इनकम को टैक्स-फ्री दिखाना आसान लगे, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स इसे पूरी तरह व्यावहारिक नहीं मानते। टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन का कहना है कि सोशल मीडिया पर ऐसे दावे केवल चर्चा बटोरने के लिए किए जाते हैं, जबकि असल जिंदगी में इनकी वैल्यू न के बराबर है।
वहीं, Tax2Win के सीईओ अभिषेक सोनी एक महत्वपूर्ण नियम की याद दिलाते हैं: चाहे प्रॉपर्टी कमर्शियल हो या रेजिडेंशियल, उससे होने वाली कमाई पर टैक्स देना ही होगा। यहाँ तक कि अगर घर खाली है और किराए पर नहीं दिया गया है, तो भी उसे ‘डीम्ड लेट आउट’ (मान लिया गया किराया) मानकर सरकार उस पर टैक्स वसूल सकती है। इसलिए, रेंटल इनकम को छिपाना या कम आंकना कानूनी मुश्किल खड़ी कर सकता है।
सावधान! ‘जीरो टैक्स’ का गणित पड़ सकता है भारी
टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन इस वायरल दावे की एक बड़ी खामी की ओर इशारा करते हैं। वे कहते हैं कि ₹17 लाख की रेंटल इनकम पर ‘जीरो टैक्स’ तभी संभव है, जब पत्नी की कोई और कमाई न हो। लेकिन यहाँ एक बड़ा कानूनी सवाल खड़ा होता है: 5-7 करोड़ रुपये की यह प्रॉपर्टी पत्नी के पास आई कहाँ से? यदि इस प्रॉपर्टी को खरीदने के लिए पैसा पति ने दिया है, तो इनकम टैक्स का ‘क्लबिंग नियम’ (Clubbing of Income) लागू होगा। इसका मतलब है कि पत्नी के नाम पर होने के बावजूद, उस किराए की कमाई को पति की आय में जोड़ दिया जाएगा और पति को अपने टैक्स स्लैब के हिसाब से उस पर पूरा टैक्स चुकाना होगा।
क्या ₹17 लाख की रेंटल इनकम पर ‘जीरो टैक्स’ संभव है?
टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन के अनुसार, 4% के औसत रेंटल यील्ड (किराया प्रतिफल) के हिसाब से ₹17 लाख सालाना किराया देने वाली प्रॉपर्टी की कीमत लगभग ₹4.25 करोड़ होगी। इतनी महंगी प्रॉपर्टी खरीदने के लिए आमतौर पर होम लोन, जॉइंट ओनरशिप या आय के अन्य बड़े स्रोतों की जरूरत पड़ती है।
निष्कर्ष यह है कि रेंटल इनकम को टैक्स-फ्री बनाना तकनीकी रूप से संभव तो है, लेकिन यह कोई ‘ऑटोमेटिक’ प्रक्रिया नहीं है। यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि प्रॉपर्टी किसके नाम है, आपने कौन सा टैक्स सिस्टम चुना है और आपकी कुल सालाना आय कितनी है। सोशल मीडिया का यह आसान गणित हर किसी के लिए फिट नहीं बैठता और इसे आँख बंद करके लागू करना जोखिम भरा हो सकता है।









