
म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए एक बड़ा बदलाव हुआ है। पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने 26 फरवरी 2026 को ‘सॉल्यूशन ओरिएंटेड स्कीम’ कैटेगरी को खत्म करने का निर्णय लिया है। इसका मतलब यह है कि अब बच्चों की शिक्षा या रिटायरमेंट जैसे खास लक्ष्यों के नाम पर कोई भी नई म्यूचुअल फंड स्कीम लॉन्च नहीं होगी। जो योजनाएं पहले से चल रही हैं, उनमें भी अब नया निवेश नहीं लिया जाएगा और समय के साथ उन्हें दूसरी साधारण म्यूचुअल फंड स्कीमों में मिला दिया जाएगा। जनवरी 2026 तक बाजार में बच्चों से जुड़ी 15 और रिटायरमेंट से जुड़ी 29 योजनाएं चल रही थीं, जिन पर अब इस फैसले का सीधा असर पड़ेगा।
निवेशकों का भ्रम दूर करने के लिए सेबी ने उठाया बड़ा कदम
सेबी (SEBI) ने यह फैसला मुख्य रूप से म्यूचुअल फंड बाजार को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए लिया है। अक्सर देखा गया कि बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट जैसे अलग-अलग नामों से चलने वाली कई योजनाओं का निवेश करने का तरीका (पोर्टफोलियो) बिल्कुल एक जैसा होता था।
इससे आम निवेशक भ्रमित हो जाते थे कि वे किस स्कीम को चुनें। इस बदलाव के बाद, समान निवेश पैटर्न वाली योजनाएं एक ही श्रेणी में रहेंगी, जिससे निवेशकों के लिए अलग-अलग स्कीमों की तुलना करना आसान हो जाएगा और वे बिना किसी उलझन के अपने पैसे के लिए सही फैसला ले सकेंगे।
म्यूचुअल फंड्स पर सेबी की सख्ती
सेबी (SEBI) ने म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए नियमों को और कड़ा कर दिया है ताकि हर स्कीम अपनी एक अलग पहचान रखे। नए नियमों के अनुसार, अगर कोई कंपनी ‘वैल्यू फंड’ और ‘कॉन्फ्रा फंड’ दोनों चलाती है, तो उनके पोर्टफोलियो में 50 प्रतिशत से ज्यादा समानता (Overlap) नहीं होनी चाहिए।
यही नियम सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स पर भी लागू होगा। अगर कंपनियां तीन साल के भीतर इस समानता को कम नहीं कर पाती हैं, तो उन्हें उन स्कीमों को आपस में मिलाना होगा। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अब हर म्यूचुअल फंड कंपनी को अपनी वेबसाइट पर हर महीने यह जानकारी देनी होगी कि उनकी अलग-अलग स्कीमों के पोर्टफोलियो में कितनी समानता है।
डेट और हाइब्रिड फंड्स के लिए नए नियम
- ब्याज दरों में बदलाव पर राहत: अगर मार्केट में ब्याज दरें (Interest Rates) अचानक बदलती हैं, तो फंड मैनेजर्स को अब पोर्टफोलियो की अवधि को कम करने की छूट दी गई है। इससे निवेशकों के पैसों को नुकसान से बचाया जा सकेगा।
- जवाबदेही और पारदर्शिता: पोर्टफोलियो में ऐसा कोई भी बदलाव करने पर फंड कंपनी को उसका ठोस कारण लिखित में देना होगा और सेबी (SEBI) को इसकी रिपोर्ट भी करनी होगी।
- निवेश के नए विकल्प: हाइब्रिड फंड्स को अब और अधिक विविधता दी गई है। अब ये फंड्स InvITs (इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश), गोल्ड ETF और सिल्वर ETF में भी एक सीमित दायरे में निवेश कर सकेंगे।
- बेहतर रिटर्न की संभावना: निवेश के विकल्पों में बढ़ोतरी होने से हाइब्रिड फंड्स के माध्यम से निवेशकों को बेहतर और स्थिर रिटर्न मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
लक्ष्य आधारित निवेश के लिए सेबी की नई सौगात
सेबी (SEBI) ने सॉल्यूशन ओरिएंटेड स्कीमों को बंद करने के साथ ही निवेशकों के लिए ‘लाइफ साइकिल फंड’ नाम की एक बेहतरीन श्रेणी शुरू की है। ये फंड विशेष रूप से बच्चों की पढ़ाई और रिटायरमेंट जैसे लंबे समय के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।
इनकी खासियत यह है कि शुरुआत में ये ज्यादा रिटर्न के लिए शेयरों (Equity) में अधिक निवेश करते हैं, लेकिन जैसे-जैसे आपके लक्ष्य का समय नजदीक आता है, ये अपने आप निवेश को सुरक्षित विकल्पों (Debt) में शिफ्ट कर देते हैं ताकि जोखिम कम हो सके।









