
समाज की परवाह किए बिना अगर कुछ नया करने की ठानी जाए, तो हमारे आसपास ही कमाई के बेहतरीन मौके मौजूद हैं। इन्हीं में से एक है वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन, जो कम लागत में मोटी कमाई का सबसे भरोसेमंद जरिया बन चुका है। आज इसे सिर्फ ‘गरीब की गाय’ नहीं, बल्कि ‘अमीर बनने का एटीएम’ माना जा रहा है क्योंकि यह घर बैठे ही स्थायी आमदनी देता है और लोगों को नौकरी के लिए बाहर भटकने से बचाता है। कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि आधुनिक तकनीक से किया गया यह बिजनेस युवाओं के लिए स्वरोजगार का एक शानदार विकल्प है, जो कम समय में आर्थिक स्थिति को बदल सकता है।
बकरी पालन की आधुनिक तकनीकें
डॉ. किंकर कुमार ने स्पष्ट किया कि बकरी पालन सिर्फ एक पारंपरिक काम नहीं, बल्कि एक बहुआयामी व्यवसाय है जिससे दूध, मांस और जैविक खाद जैसे कई उत्पाद प्राप्त होते हैं। उन्होंने मुनाफे के लिए दो प्रमुख पद्धतियों की जानकारी दी: ‘अर्द्ध सघन पद्धति’ (Semi-Intensive), जिसमें बकरियां दिन के कुछ घंटे बाहर चरती हैं और बाकी समय बाड़े में रहती हैं, और ‘सघन पद्धति’ (Intensive), जिसमें बकरियों को पूरी तरह बाड़े के अंदर रखकर ही वैज्ञानिक तरीके से पाला जाता है। इन तकनीकों के सही तालमेल से मृत्यु दर कम होती है और बकरियों का वजन तेजी से बढ़ता है।
मात्र 18 महीने में पांच बच्चे देगी एक बकरी
उद्यान वैज्ञानिक मनोहर पंजीकार के अनुसार, बकरी पालन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें आय बहुत तेजी से बढ़ती है। अच्छी नस्ल की एक बकरी डेढ़ साल के भीतर औसतन पांच बच्चों को जन्म देती है, जो आपके बिजनेस को कम समय में कई गुना बढ़ा देता है। वैज्ञानिक ने इस बात पर जोर दिया कि मुनाफे के लिए बकरियों का रहन-सहन सही होना चाहिए; प्रत्येक बकरी को कम से कम 16-20 वर्गफुट की जगह मिलनी चाहिए। इसके अलावा, बेहतर प्रजनन और स्वास्थ्य के लिए नर (Buck) और मादा (Doe) को अलग-अलग बाड़ों में रखना व्यावसायिक दृष्टि से बहुत जरूरी है।
संतुलित आहार और सही नस्ल
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि बकरी पालन में असली कमाई तभी है जब पशु स्वस्थ और वजनदार हो। इसके लिए बरसीम, नेपियर और पीपल जैसे हरे चारे के साथ-साथ दलहनी फसलों का सूखा चारा और चोकर, खल्ली व मिनरल मिक्सचर (जैसे एग्रीमिन) का संतुलित मेल जरूरी है। स्वास्थ्य प्रबंधन पर जोर देते हुए डॉ. पिनाकी राय ने बताया कि बकरियों को जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण (Vaccination) अनिवार्य है। साथ ही, उन्होंने दूध और मांस के अधिक उत्पादन के लिए ब्लैक बंगाल, सिरोही, बरबरी और जमुनापारी जैसी नस्लों को सबसे बेहतरीन बताया।
₹1.5 लाख से शुरू करें अपना बिजनेस
बकरी पालन की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे बहुत बड़े बजट के बिना भी शुरू किया जा सकता है। जानकारों के मुताबिक, मात्र ₹1.5 लाख की शुरुआती लागत के साथ आप एक शानदार बिजनेस मॉडल खड़ा कर सकते हैं। इस खर्च को मुख्य रूप से दो हिस्सों में बांटा जाता है: पहला ‘पूंजीगत निवेश’, जिसमें बकरियों के रहने के लिए शेड बनाना और अच्छी नस्ल की बकरियां खरीदना शामिल है, और दूसरा ‘कार्यशील पूंजी’, जो उनके दाना-पानी, दवाइयों और रोजमर्रा की देखरेख पर खर्च होती है। सही प्लानिंग के साथ यह छोटा सा निवेश आपको हर महीने एक फिक्स और मोटी आमदनी देने में सक्षम है।
10 बकरी + 1 बकरा मॉडल
- बकरी खरीद: ₹60,000 – ₹80,000
- शेड निर्माण: ₹20,000 – ₹30,000
- सालाना चारा व दवा: ₹25,000 – ₹35,000
- कुल लागत: ₹1.1 लाख – ₹1.5 लाख
आय का अनुमान (वार्षिक)
| बकरियों की संख्या | कुल वार्षिक आय | शुद्ध बचत |
| 10 बकरी + 1 बकरा | ₹2.5–4 लाख | ₹1.5–2 लाख |
| 20 बकरी + 1 बकरा | ₹5–7 लाख | ₹3–4 लाख |
| 50 बकरी + 2 बकरे | ₹12–15 लाख | ₹6–8 लाख |
खेती के साथ करें एक्स्ट्रा कमाई
बकरी पालन केवल एक स्वतंत्र व्यवसाय नहीं है, बल्कि यह खेती के साथ जुड़कर आपकी आय को दोगुना करने का एक सशक्त माध्यम है। अक्सर लोग शुरुआत में पूंजी या ‘लोग क्या कहेंगे’ जैसी झिझक में फंस जाते हैं, लेकिन वैज्ञानिक सलाह है कि एक बार साहस जुटाने पर यह काम बहुत आसान हो जाता है। चूंकि बकरियों को संभालने में परिवार के सदस्य भी हाथ बंटा सकते हैं, इसलिए बिना किसी अतिरिक्त लेबर खर्च के आप अपनी मौजूदा खेती के साथ-साथ एक बड़ा बिजनेस खड़ा कर सकते हैं। यह मॉडल न केवल आपको आर्थिक सुरक्षा देता है, बल्कि घर बैठे ही उद्यमी बनने का गौरव भी प्रदान करता है।









