
उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर अब सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रह गया है। यह विकास, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण का संगम बन चुका है। इसी कड़ी में बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे भारत का पहला सोलर एक्सप्रेसवे बनने की कगार पर है। यूपी एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) द्वारा संचालित यह परियोजना तेज रफ्तार वाहनों के साथ-साथ 450-550 मेगावाट स्वच्छ सौर ऊर्जा का उत्पादन करेगी। इससे न केवल 1 लाख घरों को रोशनी मिलेगी, बल्कि राज्य की हरित ऊर्जा क्षमता में जबरदस्त इजाफा होगा।
सोलर एनर्जी पॉलिसी का हिस्सा
यह अनोखी अवधारणा राज्य सरकार की सोलर एनर्जी पॉलिसी 2022 का हिस्सा है, जो 2026-27 तक 22,000 MW सोलर पावर उत्पादन का लक्ष्य रखती है। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, जो 296 किलोमीटर लंबा चित्रकूट से इटावा तक फैला है, इसके मुख्य मार्ग और सर्विस लेन के बीच 15-20 मीटर चौड़ी खाली पट्टी पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे।
लगभग 1,500-1,700 हेक्टेयर सरकारी जमीन का उपयोग होगा, बिना किसी नए अधिग्रहण के। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आधारित 25 वर्षीय यह प्रोजेक्ट ग्लोबल एनर्जी अलायंस फॉर पीपल एंड प्लैनेट (GEAPP) की मदद से डीपीआर तैयार कर चुका है।
ऊर्जा उत्पादन और उपयोग
परियोजना से उत्पन्न ऊर्जा एक्सप्रेसवे की लाइटिंग, टनल, टोल प्लाजा और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशनों के लिए इस्तेमाल होगी। अनुमान है कि 550 MW क्षमता से सालाना 60,000 से 1 लाख घरों को बिजली मिल सकेगी, जिससे कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।
चित्रकूट के भरतकूप के पास गोंडा गांव से शुरू होकर इटावा के कुदरैल में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़ने वाला यह मार्ग चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन, औरैया और इटावा जिलों को जोड़ेगा। बुंदेलखंड के पिछड़े क्षेत्र को आर्थिक केंद्रों से जोड़ते हुए यह ई-मोबिलिटी और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देगा।
प्रोजेक्ट की प्रगति
प्रगति के मोर्चे पर अच्छी खबरें हैं। अगस्त 2024 में राज्य कैबिनेट ने 450 MW सोलर प्रोजेक्ट को मंजूरी दी, जबकि बोली प्रक्रिया चल रही है। UPEIDA का लक्ष्य अगले 15 महीनों में कमीशनिंग है। हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि दोनों तरफ सोलर प्लांट्स लगाने की योजना पर काम तेज हो गया है। हालांकि, कुछ चुनौतियां भी रही हैं, जैसे बोली में देरी या योजना संशोधन लेकिन UPEIDA ने इसे पीछे नहीं हटने दिया।
अन्य एक्सप्रेसवेज पर विस्तार
बुंदेलखंड की सफलता अन्य एक्सप्रेसवेज को प्रेरित कर रही है। गोरखपुर लिंक, पूर्वांचल और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर भी सोलर संभावनाओं का अध्ययन पूरा हो चुका है। यदि लागू हुए, तो सालाना 6 करोड़ रुपये की ऊर्जा बचत संभव है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में यूपी के 15 एक्सप्रेसवेज (कुछ चालू, कुछ निर्माणाधीन) अब ऊर्जा हब बनने की राह पर हैं। यह न केवल सरकारी खर्च घटाएगा, बल्कि निवेशकों को आकर्षित करेगा।
पर्यावरण और विकास का संतुलन
यह परियोजना विकास और पर्यावरण का अनूठा संतुलन दर्शाती है। जहां एक तरफ बुंदेलखंड को नई गति मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ यूपी ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाएगा। आने वाले वर्षों में सोलर एक्सप्रेसवे भारत का मॉडल बन सकते हैं, जो रफ्तार के साथ रोशनी भी बिखेरेंगे।









