
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब आगामी बजट की तैयारियों में जुटी हैं, तब भारतीय अर्थव्यवस्था के आंकड़े काफी उत्साहजनक नजर आ रहे हैं। चालू वित्तीय वर्ष में भारत की आर्थिक विकास दर 7.3% रहने का अनुमान है, जो देश की मजबूत स्थिति को दर्शाता है। भारत की जीडीपी अब चार ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक स्तर को पार कर चुकी है, और जल्द ही हमारा देश जापान को पछाड़कर एशिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। ऊपरी तौर पर देखने पर भारत की आर्थिक सेहत काफी स्थिर और दुनिया के लिए एक मिसाल बनकर उभर रही है।
राहत भरी महंगाई और लहलहाती खेती
देश की आर्थिक सेहत के लिए एक और अच्छी खबर यह है कि खुदरा महंगाई दर अब दो फ़ीसदी से भी नीचे आ गई है, और उम्मीद है कि आने वाले समय में भी यह काबू में रहेगी। इसके साथ ही, देश की आधी आबादी की आजीविका का आधार ‘कृषि क्षेत्र’ भी काफी मजबूत स्थिति में है।
इस साल अनाज की पैदावार बेहतरीन हुई है और सरकारी गोदाम अनाज से भरे हुए हैं। अच्छी फसल और कम महंगाई के इस तालमेल ने ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की आय बढ़ा दी है, जिससे गांव की अर्थव्यवस्था में एक नई रौनक और मजबूती देखने को मिल रही है।
टैक्स में राहत और ‘गोल्डीलॉक्स’ दौर: क्या है भारतीय अर्थव्यवस्था का सच?
इनकम टैक्स में पिछली कटौतियों और जीएसटी (GST) नियमों के सरलीकरण ने आम जनता के हाथों में खर्च करने के लिए अधिक पैसा छोड़ा है, जिससे बाजार में मांग बढ़ी है। आर्थिक विकास की इस तेज रफ्तार और घटती महंगाई के अद्भुत तालमेल को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ‘गोल्डीलॉक्स’ (Goldilocks) दौर करार दिया है।
यह शब्द एक ऐसी आदर्श स्थिति को दर्शाता है जहाँ अर्थव्यवस्था न तो बहुत गर्म (महंगाई वाली) होती है और न ही बहुत ठंडी (मंदी वाली), बल्कि बिल्कुल सही रफ्तार से आगे बढ़ती है और रोजगार के अवसर पैदा करती है। हालांकि, इन चमकते हुए आंकड़ों के पीछे कुछ ऐसी गंभीर चुनौतियां भी छिपी हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल है।









