
मध्यप्रदेश में अब आधार कार्ड में जन्मतिथि सुधारवाना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। नए नियमों के मुताबिक, व्यक्ति खुद से केवल एक बार ही जन्मतिथि बदल सकता है; दूसरी बार बदलाव के लिए जन्म प्रमाण पत्र का रजिस्ट्रेशन नंबर होना अनिवार्य है।
इस नियम से उन लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कत आ रही है जिनके पास पुराने प्रमाण पत्र हैं जिनमें नंबर नहीं है या जिनके दस्तावेज खो गए हैं। ग्वालियर और भोपाल जैसे बड़े शहरों के आधार केंद्रों पर रोजाना भारी भीड़ पहुँच रही है, जहाँ रजिस्ट्रेशन नंबर न होने के कारण लगभग आधे आवेदन रिजेक्ट हो रहे हैं, और फिलहाल राजधानी स्तर पर भी इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकल पा रहा है।
आधार सुधार में बढ़ती मुश्किलें और आर्थिक नुकसान
मध्यप्रदेश में आधार कार्ड में सुधार करवाना न केवल तकनीकी रूप से कठिन हो गया है, बल्कि यह लोगों की जेब पर भी भारी पड़ रहा है। आधार केंद्रों पर बायोमेट्रिक या अन्य सुधार के लिए आने वाले लोगों को ‘लिमिट क्रॉस’ बताकर वापस भेजा जा रहा है, और सबसे बड़ी समस्या यह है कि आवेदन रिजेक्ट होने के बाद भी जमा किया गया शुल्क (125 या 75 रुपये) वापस नहीं मिल रहा है।
स्थानीय स्तर पर समाधान न होने के कारण लोगों को मजबूरी में भोपाल जाना पड़ रहा है, जहाँ इस पूरी प्रक्रिया में 3 से 5 हजार रुपये तक का अतिरिक्त खर्च हो रहा है। ऐसे में आम जनता को नियमों की सख्ती के साथ-साथ आर्थिक चपत का भी सामना करना पड़ रहा है।
आधार सुधार की समस्या
मध्यप्रदेश में आधार कार्ड में जन्मतिथि सुधारने की प्रक्रिया आम जनता के लिए मुसीबत बन गई है। नियमों की सख्ती और ‘लिमिट क्रॉस’ होने के कारण आधार केंद्रों से लोगों को बिना काम किए लौटाया जा रहा है, जबकि सुधार के लिए जमा किया गया शुल्क भी वापस नहीं मिल रहा।
स्थानीय स्तर पर समाधान न मिलने से लोग भोपाल कार्यालय का रुख कर रहे हैं, लेकिन वहां भी अधिकारियों द्वारा फोन न उठाने और संवाद की कमी के कारण निराशा ही हाथ लग रही है। ई-मेल के जरिए संपर्क करने पर 6 से 8 सप्ताह का लंबा समय दिया जा रहा है, जिससे लोगों का न केवल पैसा बर्बाद हो रहा है, बल्कि वे मानसिक रूप से भी परेशान हो रहे हैं।
आधार में जन्मतिथि सुधार की जटिलता
मध्यप्रदेश में आधार अपडेट के कड़े नियमों ने छात्रों और आम जनता को संकट में डाल दिया है। ‘लिमिट क्रॉस’ की समस्या के कारण स्थानीय आधार केंद्रों से लोगों को भोपाल जाने की सलाह देकर वापस भेजा जा रहा है, जिससे उनकी स्कॉलरशिप जैसे महत्वपूर्ण काम सालों से अटके हुए हैं।
राजू कुशवाह और जितेंद्र माथुर जैसे कई छात्र पिछले दो-तीन साल से जन्मतिथि सुधार के लिए भटक रहे हैं, क्योंकि आधार अपडेट न होने से उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। भोपाल कार्यालय में फोन न उठने और ई-मेल पर महीनों का समय मिलने के कारण लोग मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं, और उनकी पढ़ाई व भविष्य पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।









