
बिजली का बिल हर महीने हमारे घर आता है, लेकिन बहुत कम लोग समझ पाते हैं कि इसकी गणना कैसे की गई है। अक्सर मीटर रीडिंग की समझ न होने के कारण हम “फालतू बिल” का शिकार हो जाते हैं।
आज के इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि आपके घर का बिजली बिल कैसे तैयार होता है और आप खुद मीटर चेक करके धोखाधड़ी से कैसे बच सकते हैं।
बिजली का बिल कैसे बनता है?
बिजली बिल मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बँटा होता है:
- फिक्स्ड चार्ज (Fixed Charges): यह वह न्यूनतम शुल्क है जो आपको देना ही पड़ता है, चाहे आप एक भी यूनिट बिजली खर्च न करें। यह आपके लोड (जैसे 1kW या 2kW) पर निर्भर करता है।
- एनर्जी चार्ज (Energy Charges/Unit Rates): यह आपके द्वारा खर्च की गई यूनिट्स पर आधारित होता है। भारत के अधिकांश राज्यों में ‘स्लैब सिस्टम’ चलता है। उदाहरण के लिए:
- 0-100 यूनिट: ₹3.00 प्रति यूनिट
- 101-200 यूनिट: ₹5.50 प्रति यूनिट
- टैक्स और अधिभार (Tax & Surcharge): इसमें इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी और अन्य सरकारी टैक्स शामिल होते हैं।
मीटर रीडिंग चेक करने का सही तरीका
बिजली मीटर में कई तरह के नंबर्स आते हैं। आपको केवल kWh (Kilo-Watt Hour) पर ध्यान देना है।
- kWh का मतलब: यही आपकी असली यूनिट है।
- कैसे चेक करें: मीटर के बटन को तब तक दबाएं जब तक स्क्रीन पर ‘kWh’ लिखा हुआ नंबर न आ जाए।
- बिल की गणना: मान लीजिए पिछले महीने आपकी रीडिंग 1000 kWh थी और इस महीने 1200 kWh है, तो आपने महीने भर में 200 यूनिट बिजली का इस्तेमाल किया है।
फालतू बिल से बचने के लिए ज़रूरी टिप्स
अगर आपको लगता है कि आपका बिल ज़्यादा आ रहा है, तो इन बातों की जाँच ज़रूर करें:
- कनेक्टेड लोड चेक करें: अगर आपके घर का लोड 1kW है और आप AC या हीटर जैसे भारी उपकरण चला रहे हैं, तो बैंक पेनल्टी लगा सकता है।
- पुराने बिजली उपकरण: पुराने पंखे और बल्ब ज़्यादा बिजली खींचते हैं। LED बल्ब और 5-स्टार रेटिंग वाले उपकरणों का ही प्रयोग करें।
- रीडिंग की तुलना करें: बिल पर लिखी ‘Current Reading’ और आपके मीटर की आज की रीडिंग का मिलान करें। अगर बिल पर रीडिंग मीटर से बहुत ज़्यादा है, तो तुरंत शिकायत दर्ज करें।
- पावर फैक्टर: अगर आप कमर्शियल कनेक्शन इस्तेमाल कर रहे हैं, तो पावर फैक्टर मेंटेन रखें वरना बिल बढ़कर आता है।









