
भारत में शिक्षक बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। लंबे समय से चर्चा में रहे एक साल के बीएड कोर्स (One Year B.Ed Course) को लेकर अब तस्वीर साफ होने लगी है। इस नए बदलाव से न केवल छात्रों का समय बचेगा, बल्कि उन्हें विशेषज्ञता हासिल करने का मौका भी मिलेगा। आइए जानते हैं इस कोर्स से जुड़े हर सवाल का जवाब।
एक साल के बीएड कोर्स के लिए कौन है योग्य? (Eligibility)
एनईपी 2020 की सिफारिशों के अनुसार, एक वर्षीय बीएड कोर्स हर किसी के लिए नहीं है। इसके लिए योग्यता के नियम अलग रखे गए हैं:
- पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) धारक: जिन छात्रों ने अपनी मास्टर डिग्री (जैसे MA, MSc, MCom) पूरी कर ली है, वे सीधे एक साल के बीएड कोर्स में दाखिला ले सकेंगे।
- 4 वर्षीय स्नातक (4-Year UG) धारक: वे छात्र जिन्होंने ‘नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क’ के तहत 4 साल का ऑनर्स स्नातक प्रोग्राम पूरा किया है, वे भी इस 1 साल के कोर्स के लिए पात्र होंगे।
- न्यूनतम अंक: आमतौर पर पीजी या 4 वर्षीय स्नातक में कम से कम 55% अंक होना अनिवार्य हो सकता है।
क्या 2 वर्षीय बीएड कोर्स बंद हो जाएगा?
छात्रों के बीच सबसे बड़ा भ्रम यह है कि क्या पुराने कोर्स बंद हो जाएंगे। एक्सपर्ट्स के अनुसार:
- कोर्स बंद नहीं होगा: 2 वर्षीय बीएड कोर्स फिलहाल बंद नहीं किया जा रहा है। यह उन छात्रों के लिए जारी रहेगा जो 3 साल की साधारण स्नातक (Graduation) डिग्री के बाद शिक्षक बनना चाहते हैं।
- विकल्पों का विस्तार: अब छात्रों के पास उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर तीन विकल्प होंगे:
- 4 वर्षीय ITEP: इंटरमीडिएट (12वीं) के बाद।
- 2 वर्षीय बीएड: 3 साल के ग्रेजुएशन के बाद।
- 1 वर्षीय बीएड: पोस्ट ग्रेजुएशन या 4 साल के ग्रेजुएशन के बाद।
कब से शुरू होगा यह कोर्स?
नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) ने इस कोर्स का सिलेबस तैयार करने के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाई है। रिपोर्टों के अनुसार, कई केंद्रीय विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में इसे शैक्षणिक सत्र 2025-26 या उसके बाद चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी है। लखनऊ विश्वविद्यालय जैसे कई बड़े संस्थानों ने इसकी रूपरेखा पर काम शुरू कर दिया है।
एक्सपर्ट की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव ‘विशेषज्ञ शिक्षक’ तैयार करने में मदद करेगा।
- रोजगार के अवसर: नई नीति के तहत, स्कूलों में अब उच्च शिक्षा प्राप्त शिक्षकों की मांग बढ़ेगी
- समय की बचत: पीजी कर चुके छात्रों को अब 2 साल बर्बाद नहीं करने होंगे।
- विशेषज्ञता (Specialization): एक साल के कोर्स में केवल शिक्षण कौशल (Teaching Skills) पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, क्योंकि छात्र पहले से ही अपने विषय (Subject) में मास्टर होते हैं।









