
चांदी की कीमतों में इन दिनों जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जहाँ भाव 1 लाख रुपये के करीब पहुँचने के बाद तेजी से बदल रहे हैं। इस तेजी की सबसे बड़ी वजह चांदी का बढ़ता औद्योगिक इस्तेमाल (Industrial Use) है। अब चांदी सिर्फ जेवर तक सीमित नहीं रही, बल्कि मोबाइल फोन, सोलर प्लेट और खासकर कारों के निर्माण में इसकी मांग बहुत बढ़ गई है।
कारों में चांदी का इस्तेमाल तो पुराना है, लेकिन साल 2010 के बाद जब से इलेक्ट्रिक (EV) और हाइब्रिड कारें आई हैं, चांदी की खपत कई गुना बढ़ गई है। हाईटेक इलेक्ट्रॉनिक्स और नई तकनीक की रीढ़ होने के कारण आज चांदी एक कीमती धातु के साथ-साथ उद्योगों की जरूरत बन चुकी है।
EV का बढ़ता क्रेज और चांदी की मांग
एंजेल वन की रिपोर्ट के अनुसार, ऑटोमोबाइल सेक्टर में चांदी की खपत तेजी से बढ़ रही है। जहाँ एक सामान्य पेट्रोल या डीजल कार को बनाने में सिर्फ 15-20 ग्राम चांदी लगती है, वहीं एक इलेक्ट्रिक कार (EV) में इसकी मात्रा बढ़कर 25-50 ग्राम तक पहुँच जाती है।
इसका मतलब है कि डीजल-पेट्रोल गाड़ियों के मुकाबले EV में करीब 67% से 79% ज्यादा चांदी इस्तेमाल होती है। हाइब्रिड कारों में भी यह आंकड़ा 34 ग्राम तक रहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2027 तक इलेक्ट्रिक गाड़ियां चांदी की खपत का सबसे बड़ा केंद्र बन जाएंगी और साल 2031 तक ऑटोमोबाइल सेक्टर में चांदी की यह डिमांड लगातार रिकॉर्ड तोड़ती रहेगी।
कार में चांदी का इस्तेमाल कहां होता है?
- इंफोटेनमेंट सिस्टम
- ABS, एयरबैग सिस्टम
- ECU (इंजन कंट्रोल यूनिट)
- पावर विंडो, सेंट्रल लॉकिंग
- बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम
- पावर इलेक्ट्रॉनिक्स
- चार्जिंग सिस्टम
- हाई-वोल्टेज कनेक्शन
आखिर क्यों चांदी के बिना नहीं चल सकतीं आधुनिक गाड़ियां?
कारों में चांदी का इस्तेमाल चमक-धमक के लिए नहीं, बल्कि इसकी बेजोड़ कंडक्टिविटी (चालकता) की वजह से किया जाता है। चांदी बिजली को बिना किसी रुकावट या नुकसान के सबसे तेजी से प्रवाहित करती है, इसलिए वायरिंग, स्विच और सर्किट बनाने में यह अनिवार्य है।
आज की कारें किसी ‘पहियों वाले कंप्यूटर’ से कम नहीं हैं; चाहे वह इंजन कंट्रोल यूनिट (ECU) हो, एयरबैग सिस्टम हो या फिर ABS, इन सभी को तुरंत सिग्नल भेजने के लिए चांदी के कॉन्टैक्ट्स की जरूरत होती है। यही वजह है कि जैसे-जैसे कारें स्मार्ट और सेंसर-आधारित होती जा रही हैं, उनमें चांदी का इस्तेमाल भी अनिवार्य होता जा रहा है।
2031 तक 3000 टन चांदी की होगी जरूरत
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, ऑटोमोबाइल जगत में चांदी की मांग अब एक नई ऊंचाई की ओर बढ़ रही है। अनुमान है कि 2025 से 2031 के बीच चांदी की वैश्विक मांग हर साल औसतन 3.4% की दर से बढ़ेगी।
फिलहाल पूरी दुनिया की ऑटो इंडस्ट्री सालाना 1,700 से 2,500 टन चांदी का उपयोग करती है, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के बढ़ते उत्पादन के कारण 2031 तक यह आंकड़ा 3,000 टन प्रति वर्ष तक पहुँच सकता है। इसका मतलब है कि भविष्य में चांदी की कीमतों का निर्धारण सिर्फ ज्वेलरी मार्केट से नहीं, बल्कि आपकी पसंदीदा कारों की फैक्ट्रियों से होगा।









