
बिहार के अररिया जिले के रघुनाथपुर गांव निवासी पवन कुमार ने यह साबित कर दिया है कि गांव में रहकर भी छोटे स्तर पर बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है। उन्होंने अपने ही क्षेत्र में आटा चक्की (गेहूं, मक्का और दाल पिसाई) का व्यवसाय शुरू किया, जो आज उनकी अच्छी कमाई का जरिया बन चुका है। पवन की यह मेहनत और सूझबूझ उन युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल है जो रोजगार की तलाश में बाहर जाते हैं। अपनी इस छोटी सी शुरुआत से उन्होंने न केवल अपनी जिंदगी बदली, बल्कि गांव में रहकर ही आत्मनिर्भर बनने का सफल रास्ता भी दिखाया।
यूट्यूब से मिली सीख और आज हो रही बंपर कमाई
अररिया के पवन कुमार ने आधुनिक तकनीक का सही इस्तेमाल कर अपने लिए रोजगार का नया रास्ता खोज निकाला। उन्होंने यूट्यूब के जरिए जानकारी जुटाई और लगभग 2 लाख रुपये के कुल निवेश से आटा चक्की का पूरा सेटअप तैयार किया, जिसमें मुख्य मशीन की कीमत करीब 38 हजार रुपये थी। पहले खेती और ऑनलाइन कैफे चलाने वाले पवन ने यह मशीन पूर्णिया से ऑनलाइन मंगवाई। अब उन्हें पैसे कमाने के लिए शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती; वे अपने गांव में ही इस व्यवसाय से शानदार मुनाफा कमा रहे हैं।
पवन कुमार ने बताया सफलता का मंत्र
अररिया के सफल उद्यमी पवन कुमार ने लोकल 18 को बताया कि उनकी मशीन की क्षमता इतनी जबरदस्त है कि वे रोजाना 800 से 1200 किलो तक गेहूं, मक्का और दालों की पिसाई कर लेते हैं। वे प्रति किलो पिसाई के आधार पर शुल्क लेते हैं, जिससे उन्हें अच्छी खासी आय हो रही है।
पवन का मानना है कि शुरुआत में थोड़ी मेहनत और चुनौतियां जरूर आती हैं, लेकिन यदि 1-2 साल तक धैर्य के साथ काम किया जाए, तो इसमें बहुत अच्छा मुनाफा है। नए युवाओं को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं कि बड़े निवेश से शुरू किया जाए; कम कीमत वाली छोटी मशीन से भी इस बिजनेस की सफल शुरुआत की जा सकती है।
सालाना हो रही 8 लाख रुपये की शानदार कमाई
अररिया के पवन कुमार ने साबित कर दिया है कि तकनीक और पारंपरिक खेती का मेल मुनाफे का सौदा है। उन्होंने मात्र 38 हजार रुपये की मशीन से एक ही सीजन में लाखों की कमाई कर ली है। आटा चक्की के बिजनेस के साथ-साथ पवन 4 एकड़ जमीन पर मक्का, धान और गेहूं की खेती भी करते हैं। मशीन की पिसाई और फसलों की बिक्री को मिलाकर वे अब सालाना 8 लाख रुपये तक कमा रहे हैं। पवन की यह सफलता दिखाती है कि अगर सही मैनेजमेंट हो, तो गांव की जमीन और एक छोटी सी मशीन शहर की नौकरी से कहीं बेहतर साबित हो सकती है।









