
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज से बिहार के तीन दिवसीय दौरे पर हैं, जहाँ वे मुख्य रूप से सीमांचल के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था, विकास कार्यों और घुसपैठ जैसे गंभीर मुद्दों पर अधिकारियों के साथ बड़ी बैठकें करेंगे। हालांकि, उनके इस दौरे को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
आरजेडी (RJD) के विधायक रणविजय साहू ने एक चौंकाने वाला दावा किया है कि केंद्र सरकार सीमांचल और बंगाल के कुछ हिस्सों को मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना बना रही है। आरजेडी का कहना है कि यह कदम ममता बनर्जी और उनके गठबंधन के वोट बैंक को प्रभावित करने के लिए उठाया जा रहा है। अब देखना यह है कि गृह मंत्री के इस दौरे से सीमांचल की राजनीति में क्या नया मोड़ आता है।
“बंगाल चुनाव जीतने के लिए ध्रुवीकरण और केंद्र शासित प्रदेश बनाने की साजिश”
आरजेडी (RJD) ने केंद्रीय गृह मंत्री के इस दौरे को पूरी तरह चुनावी रणनीति से प्रेरित बताया है। पार्टी के प्रधान महासचिव और विधायक रणविजय साहू ने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में राजनीतिक लाभ लेने के लिए सीमांचल और बंगाल के कुछ हिस्सों को मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की तैयारी कर रही है।
आरजेडी का दावा है कि केंद्र सरकार ‘घुसपैठ’ और ‘सुरक्षा’ जैसे मुद्दों को हथियार बनाकर इलाके का ध्रुवीकरण करना चाहती है। विपक्ष के अनुसार, इस कदम का असली मकसद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गठबंधन और महागठबंधन के मजबूत वोट बैंक में सेंध लगाना है।
“घुसपैठ रोकने के लिए जो भी जरूरी होगा, अमित शाह वो कड़ा फैसला लेंगे”
आरजेडी के दावों पर बीजेपी ने तीखा पलटवार करते हुए स्पष्ट संकेत दिए हैं कि सीमांचल की सुरक्षा सर्वोपरि है। बीजेपी नेता और विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा कि इस क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या अवैध घुसपैठ है, जिसे किसी भी कीमत पर खत्म करना जरूरी है।
उन्होंने साफ लहजे में कहा कि यदि देश की सुरक्षा और घुसपैठ रोकने के लिए केंद्र शासित प्रदेश बनाने जैसा कड़ा फैसला भी लेना पड़ा, तो गृह मंत्री अमित शाह उससे पीछे नहीं हटेंगे। बीजेपी का कहना है कि अमित शाह के बिहार दौरे और उनकी सख्त कार्यशैली के नाम से ही आरजेडी में घबराहट पैदा हो जाती है, इसलिए वे इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं।
घुसपैठियों की पहचान और सुरक्षा पर गृह मंत्री का सख्त रुख
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का यह बिहार दौरा राज्य की सुरक्षा और राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। उनका मुख्य फोकस सीमांचल के इलाकों को घुसपैठियों से मुक्त बनाना है, जैसा कि उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान वादा किया था कि हर एक घुसपैठिए की पहचान कर उसे बाहर निकाला जाएगा।
इस दौरे को लेकर पूरा प्रशासन अलर्ट मोड पर है; खुफिया एजेंसियां और पुलिस बल सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं। गृह मंत्री की बैठकों के लिए अधिकारियों को विकास योजनाओं और सुरक्षा व्यवस्था की ताज़ा रिपोर्ट तैयार रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं, ताकि जमीनी हकीकत के आधार पर बड़े फैसले लिए जा सकें।









