
केंद्र सरकार के करीब 1.1 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बड़ी खबर है। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने हितधारकों से सुझाव और प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। आधिकारिक सार्वजनिक नोटिस के अनुसार, कर्मचारी संघों, पेंशनर संगठनों, संस्थानों और व्यक्तिगत इच्छुक लोगों को 30 अप्रैल 2026 तक अपनी मांगें ऑनलाइन जमा करने का मौका दिया गया है।
3 नवंबर 2025 को जारी गजट अधिसूचना के जरिए आयोग का गठन हो चुका है, जिसमें चेयरपर्सन जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई, मेंबर प्रो. पुलक घोष और मेंबर-सेक्रेटरी पंकज जैन शामिल हैं। आयोग का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनरों, AIS अधिकारियों, रक्षा बलों और उच्च न्यायालयों के स्टाफ के वेतन, भत्तों, पेंशन तथा प्रोत्साहन योजनाओं की समीक्षा करना है। रिपोर्ट 18 महीनों में (मई 2027 तक) जमा करनी होगी, जो 1 जनवरी 2026 से प्रभावी हो सकती है।
सुझाव जमा करने का तरीका
आयोग ने स्पष्ट किया है कि सुझाव केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। आधिकारिक वेबसाइट और MyGov पोर्टल (innovateindia.mygov.in) पर स्ट्रक्चर्ड फॉर्म उपलब्ध है। डाक, ईमेल या पीडीएफ फॉर्मेट में भेजे गए प्रस्तावों पर विचार नहीं होगा। कर्मचारी यूनियन NC-JCM ने भी ड्राफ्टिंग कमिटी गठित कर मेमोरेंडम तैयार करने का फैसला लिया है। समयसीमा का पालन जरूरी है, क्योंकि उसके बाद पोर्टल बंद हो जाएगा।
बेसिक सैलरी में संभावित 66% इजाफा
यदि सरकार कर्मचारी यूनियनों की मांगें मान लेती है, तो न्यूनतम बेसिक पे (वर्तमान ₹18,000) में भारी वृद्धि हो सकती है। फिटमेंट फैक्टर 1.83 से 3.25 तक अनुमानित है, जिससे सैलरी ₹32,940 से ₹54,000 तक पहुंच सकती है। यूनियन 66% हाइक की मांग कर रही हैं, जिसमें DA मर्जर और 70% वृद्धि शामिल है। पुराना न्यूनतम वेतन फॉर्मूला (1956 का तीन सदस्यीय परिवार मॉडल- कर्मचारी, पति/पत्नी, एक बच्चा) अब अपर्याप्त माना जा रहा है।
यूनियन का तर्क है कि आज के परिवारों में माता-पिता और दो-तीन बच्चों की जिम्मेदारी है। बढ़ती महंगाई के कारण पांच सदस्यीय मॉडल अपनाने की मांग उठी है। इससे HRA, TA जैसे भत्ते भी बढ़ेंगे। पेंशनर्स OPS बहाली और NPS में बदलाव चाहते हैं।
समयरेखा और उम्मीदें
- मार्च-अप्रैल 2026: सुझाव संग्रह।
- लेट 2026: सार्वजनिक सुनवाई।
- मई 2027: रिपोर्ट सरकार को।
- 2027-28: कार्यान्वयन, एरियर्स सहित।
विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग प्रक्रिया तेज कर सकता है, लेकिन FY27 में पूर्ण लागू होना चुनौतीपूर्ण है। कर्मचारियों को सलाह है कि समय रहते सुझाव दें, क्योंकि यह अगले दशक की सैलरी संरचना तय करेगा।









