
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 12 फरवरी 2026 की तारीख बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठन ने एक दिन की देशव्यापी हड़ताल (National Strike) का ऐलान किया है।
इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन में देरी, महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक सैलरी में शामिल करने और पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से लागू करने जैसी मांगें हैं। यह हड़ताल सीधे तौर पर सरकारी कर्मचारियों की सैलरी, बोनस और भविष्य की सुविधाओं को प्रभावित करने वाली नीतियों के खिलाफ एक बड़ा कदम है।
सरकार और कर्मचारियों के बीच बढ़ा तनाव
कर्मचारी संगठनों की नाराजगी और सरकार के खिलाफ विरोध के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- सुझावों की अनदेखी: संगठनों का आरोप है कि सरकार 8वें वेतन आयोग की शर्तें तय करते समय कर्मचारियों के प्रतिनिधि संगठनों की बात नहीं सुन रही है।
- महत्वपूर्ण मुद्दों को टालना: पुरानी पेंशन योजना (OPS), महंगाई भत्ते (DA) के विलय और पेंशन से जुड़े बड़े फैसलों पर सरकार की देरी से कर्मचारियों में गुस्सा है।
- महंगाई की मार: कर्मचारियों का मानना है कि तेजी से बढ़ती महंगाई के मुकाबले उनकी सैलरी का वर्तमान स्ट्रक्चर काफी पुराना हो गया है, जिससे उनका गुजारा मुश्किल हो रहा है।
12 फरवरी की हड़ताल और 8वां वेतन आयोग
केंद्रीय कर्मचारियों ने 12 फरवरी को हड़ताल का फैसला इसलिए लिया है क्योंकि उन्हें डर है कि 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) उनके लिए फायदेमंद होने के बजाय केवल एक कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगा। नाराजगी की मुख्य वजहें इस प्रकार हैं:
- आधे-अधूरे फैसले का डर: कर्मचारियों को अंदेशा है कि सरकार वेतन आयोग के गठन में उनकी मुख्य मांगों को शामिल न करके कोई एकतरफा और सीमित फैसला ले सकती है।
- राहत की कमी: कर्मचारियों का मानना है कि नया वेतन आयोग उनकी आर्थिक समस्याओं का समाधान (राहत) देने के बजाय केवल एक ‘फॉर्मेलिटी’ बनता जा रहा है।
- अस्तित्व की लड़ाई: 12 फरवरी की तारीख इसलिए चुनी गई है ताकि सरकार पर समय रहते दबाव बनाया जा सके और 8वें वेतन आयोग की शर्तों को कर्मचारियों के पक्ष में कराया जा सके।
कर्मचारी संगठन ने सरकार को सौंपा ‘स्ट्राइक नोटिस’, बढ़ सकती हैं मुश्किलें
केंद्रीय कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठन Confederation of Central Government Employees & Workers ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ निर्णायक कदम उठा लिया है। संगठन, जो देश के विभिन्न सरकारी विभागों के लाखों कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है, ने 23 जनवरी 2026 को भारत सरकार के कैबिनेट सेक्रेटरी को हड़ताल का औपचारिक नोटिस सौंप दिया है। इस नोटिस के जरिए यह साफ कर दिया गया है कि यदि सरकार 8वें वेतन आयोग और अन्य मुद्दों पर जल्द कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तो कर्मचारी देशव्यापी विरोध के लिए तैयार हैं।
जनरल सेक्रेटरी का सरकार को कड़ा अल्टीमेटम, सीधी जंग का ऐलान
केंद्रीय कर्मचारी संगठन (Confederation) के जनरल सेक्रेटरी एस.बी. यादव ने स्ट्राइक नोटिस के जरिए सरकार को दोटूक चेतावनी दी है। उनके बयान के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- अनदेखी का आरोप: सरकार 8वें वेतन आयोग की शर्तें तय करते समय कर्मचारियों और पेंशनरों की असली तकलीफों को जानबूझकर नजरअंदाज कर रही है।
- अन्याय की बात: DA, पुरानी पेंशन (OPS), और बोनस जैसे जरूरी मुद्दों पर फैसले टालना लाखों कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
- सीधा टकराव: उन्होंने साफ कर दिया है कि यह केवल एक चेतावनी नहीं है; अगर सरकार ने तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए, तो कर्मचारी देशव्यापी आंदोलन के लिए पूरी तरह तैयार हैं।









