
8वां वेतन आयोग 1 जनवरी 2026 से प्रभावी तो मान लिया गया है, लेकिन फिलहाल कर्मचारियों की सैलरी में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। जब भी नया वेतन लागू होगा, उसका फायदा पिछली तारीख (1 जनवरी 2026) से ही मिलेगा। सरकार ने यह साफ कर दिया है कि 50% महंगाई भत्ते को बेसिक सैलरी में नहीं जोड़ा जाएगा, यानी ‘डीए मर्जर’ का कोई प्लान नहीं है। हालांकि, नए वेतन आयोग के लागू होते ही महंगाई भत्ता फिर से शून्य (Zero) से शुरू होगा, लेकिन इसे पुरानी सैलरी में मर्ज किए बिना ही नए सिरे से कैलकुलेट किया जाएगा।
नए वेतन आयोग में सैलरी और DA का गणित
जब भी कोई नया वेतन आयोग आता है, तो सैलरी का ढांचा बदल जाता है। 8वें वेतन आयोग में महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक सैलरी में जोड़ा (Merge) नहीं जाएगा, बल्कि आपकी पुरानी बेसिक सैलरी और उस समय तक मिले कुल डीए को मिलाकर एक नई बेसिक सैलरी (New Pay Matrix) तैयार की जाएगी।
उदाहरण के लिए, अगर आपकी बेसिक 100 रुपये है और डीए 50 रुपये, तो सरकार इन्हें जोड़कर एक नया फिटमेंट फैक्टर लाएगी जिससे आपकी नई बेसिक शायद 250 या 300 रुपये हो जाएगी। जैसे ही यह नई बेसिक लागू होगी, पुराने डीए की वैल्यू उसमें समा जाएगी और अगले महीने से DA शून्य (Zero) से शुरू होगा। इससे कर्मचारियों को नुकसान नहीं, बल्कि फायदा होगा क्योंकि अब महंगाई भत्ता पुरानी बेसिक के बजाय नई (बढ़ी हुई) बेसिक सैलरी पर मिलेगा।
‘मर्जर’ और ‘एडजस्टमेंट’ में क्या अंतर है?
संसद में सरकार ने जिस बात से इनकार किया है, वह है मर्जर (Merger)। इसका मतलब यह है कि 7वें वेतन आयोग के दौरान ही बीच में 50% DA को बेसिक में नहीं जोड़ा जाएगा। लेकिन जब 8वां वेतन आयोग आएगा, तब एडजस्टमेंट (Adjustment) की प्रक्रिया शुरू होगी।
यहाँ इन दोनों का स्पष्ट अंतर दिया गया है:
| विशेषता | मर्जर (Merger) – जो सरकार ने मना किया | एडजस्टमेंट (Adjustment) – जो 8वें वेतन आयोग में होगा |
| कब होता है? | वेतन आयोग के कार्यकाल के बीच में (जैसे अभी)। | नए वेतन आयोग के लागू होने पर (1 जनवरी 2026)। |
| प्रक्रिया | 50% DA को सीधे बेसिक सैलरी में जोड़ दिया जाता। | DA, बेसिक और फिटमेंट फैक्टर को मिलाकर नई बेसिक बनती है। |
| असर | इससे बेसिक पे तुरंत बढ़ जाती और भत्ते भी बढ़ जाते। | इससे पूरा पे-स्ट्रक्चर ही बदल जाता है और DA वापस 0 हो जाता है। |
| इतिहास | 5वें और 6वें वेतन आयोग में ऐसा प्रावधान था। | 7वें वेतन आयोग में इसे खत्म कर ‘फिटमेंट फैक्टर’ लाया गया। |
क्यों सरकार कहती है ‘मर्जर नहीं होगा’?
सरकारी भाषा में ‘मर्जर’ का मतलब होता है कार्यकाल के बीच में DA को बेसिक का हिस्सा बनाना, जिसे सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया है। इसके उलट, 8वें वेतन आयोग में ‘एडजस्टमेंट’ (समायोजन) का फॉर्मूला अपनाया जाएगा, जैसा कि 7वें वेतन आयोग में हुआ था।
इसमें महंगाई भत्ते को अलग से बेसिक में जोड़ा नहीं जाता, बल्कि जब 1 जनवरी 2026 से नया पे-मैट्रिक्स बनेगा, तो उस समय के कुल DA और बेसिक को मिलाकर एक नई और बढ़ी हुई ‘बेसिक सैलरी’ तय कर दी जाएगी। इस प्रक्रिया के बाद DA अपने आप शून्य (0%) हो जाएगा और कर्मचारियों को नए वेतन ढांचे के आधार पर सैलरी मिलने लगेगी। यानी तकनीकी रूप से DA खत्म होकर नई बेसिक में ही समा जाएगा, बस इसे ‘मर्जर’ के बजाय ‘नया पे-मैट्रिक्स गठन’ कहा जाएगा।
7वें वेतन आयोग का मॉडल
साल 2016 में जब 7वां वेतन आयोग लागू हुआ, तब 6वें आयोग का महंगाई भत्ता (DA) 125% तक पहुंच चुका था। सरकार ने इस भारी-भरकम DA को सीधे बेसिक में नहीं जोड़ा (मर्जर नहीं किया), बल्कि एक ‘फिटमेंट फैक्टर’ (Fitment Factor) का फॉर्मूला पेश किया। सरकार ने 125% DA और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय किया।
इसका मतलब यह था कि आपकी पुरानी बेसिक सैलरी को सीधे 2.57 से गुणा कर दिया गया, जिससे एक नई बेसिक सैलरी तैयार हुई। जैसे ही यह नई बेसिक लागू हुई, 125% DA की वैल्यू उसमें समा गई और अगले महीने से DA वापस शून्य (0%) हो गया।
7th CPC का ‘5-स्टेप फॉर्मूला’: कैसे बढ़ती है बेसिक सैलरी?
7वें वेतन आयोग ने वेतन सुधार के लिए एक वैज्ञानिक तरीका अपनाया था, जिसे ‘एडजस्टमेंट’ कहा जाता है। इसमें सबसे पहले 6वें आयोग की पुरानी बेसिक पे को लिया गया और उसमें उस समय तक के 125% महंगाई भत्ते (DA) को शामिल किया गया। इसके बाद सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया, जिससे एक नई बेसिक सैलरी तैयार हुई। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह था कि नई बेसिक लागू होते ही DA को 0% कर दिया गया। तकनीकी रूप से यह कोई ‘मर्जर’ नहीं था, बल्कि पुराने DA को नई सैलरी के ढांचे में ‘एडजस्ट’ करना था, ताकि कर्मचारियों को बढ़ी हुई बेसिक पर नए सिरे से महंगाई भत्ते का लाभ मिल सके।
8वें वेतन आयोग में यह कैसे काम करेगा?
यही 5 स्टेप्स अब 2026 में आपकी सैलरी तय करेंगे:
- स्टेप 1: आपकी वर्तमान (7th CPC) बेसिक सैलरी ली जाएगी।
- स्टेप 2: 1 जनवरी 2026 तक जमा हुआ कुल DA (अनुमानित 53% या अधिक) देखा जाएगा।
- स्टेप 3: सरकार एक नया फिटमेंट फैक्टर (जैसे 2.81 या 3.68) तय करेगी।
- स्टेप 4: आपकी पुरानी बेसिक को इस फैक्टर से गुणा करके नई बेसिक तय होगी।
- स्टेप 5: 1 जनवरी 2026 से आपका DA फिर से 0% हो जाएगा।
इसका असली फायदा क्या है?
जब DA शून्य होता है, तो कर्मचारियों को डर लगता है कि पैसा कम हो जाएगा। लेकिन असल में, अब आपको जो 3% या 4% DA मिलेगा, वह आपकी नई (बढ़ी हुई) बेसिक पर मिलेगा।
- उदाहरण: ₹20,000 की बेसिक पर 4% DA सिर्फ ₹800 होता है।
- लेकिन अगर बेसिक बढ़कर ₹50,000 हो गई, तो वही 4% DA ₹2,000 हो जाएगा।
आखिर कैसे शून्य (0) होगा महंगाई भत्ता?
भविष्य में 8वें वेतन आयोग के लागू होने पर सरकार 50% DA मर्जर के बजाय ‘पे-रिवीजन’ (Pay Revision) का रास्ता अपनाएगी। इसका मतलब यह है कि 1 जनवरी 2026 से जब नया सैलरी स्ट्रक्चर बनेगा, तो उस समय तक जितना भी महंगाई भत्ता (DA) जमा हो चुका होगा, उसे आधार मानकर एक नया ‘फिटमेंट फैक्टर’ तय किया जाएगा।
यह फिटमेंट फैक्टर आपकी पुरानी बेसिक सैलरी को सीधे बढ़ा देगा। जैसे ही यह नई और बड़ी बेसिक सैलरी आपके पे-स्लिप पर आएगी, पुराना DA तकनीकी रूप से उस नई सैलरी के भीतर समा जाएगा और मीटर फिर से शून्य (0%) पर सेट हो जाएगा। यानी, DA खत्म नहीं होगा, बल्कि वह आपकी नई बेसिक सैलरी की नींव बन जाएगा।









