
केंद्र सरकार ने आयकर नियम 2025 को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है, जो 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएंगे। ये नियम नया आयकर अधिनियम 2025 के क्रियान्वयन का मजबूत ढांचा तैयार करेंगे, पुराने 1961 अधिनियम को पूरी तरह बदलते हुए। सरकार का लक्ष्य सरल, पारदर्शी और डिजिटल-आधारित टैक्स सिस्टम लाना है, जो वैश्विक व्यापार व डिजिटल कारोबार को आसानी से हैंडल कर सके। विशेषज्ञ इसे ‘डिजिटल-पहियादारी कराधान’ की संज्ञा दे रहे हैं, जहां ट्रांजेक्शन ट्रैकिंग और फॉर्मूला-आधारित गणना पर जोर है।
डिजिटल बिजनेस पर सख्त निगरानी
सबसे क्रांतिकारी बदलाव विदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए है। अब गूगल, मेटा या टिकटॉक जैसे non-resident ऐप्स को भारत में टैक्स देना होगा, अगर भारतीय यूजर्स से 2 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाई हो या 3 लाख यूजर्स हों। भले ही इनका भारत में कोई फिजिकल ऑफिस न हो, टैक्स रिटर्न फाइलिंग जरूरी होगी। इससे डिजिटल इकोनॉमी में राजस्व बढ़ेगा, लेकिन छोटे कंटेंट क्रिएटर्स पर असर पड़ सकता है।
सैलरी और पर्क्स पर नए टैक्स नियम
सैलरीड कर्मचारियों के लिए वेतन भत्तों पर विस्तृत बदलाव हैं। हाउस रेंट वैल्यूएशन अब शहर की आबादी पर आधारित होगी। मुफ्त भोजन केवल 200 रुपये प्रति भोजन तक टैक्स-फ्री रहेगा। गिफ्ट्स 15,000 रुपये से ऊपर टैक्स योग्य होंगे। एजुकेशन अलाउंस 3,000 रुपये/महीना/बच्चा और हॉस्टल 9,000 रुपये तक बढ़ा। कंपनियों के रियायती लोन पर SBI लेंडिंग रेट के आधार टैक्स लगेगा, जिससे नेट सैलरी घट सकती है। कंपनियों को सैलरी स्ट्रक्चर रिव्यू करना पड़ेगा।
टैक्स स्लैब्स में राहत, लेकिन शर्तें सख्त
नए रिजीम में स्लैब्स सरल: 0-4 लाख NIL, 4-8 लाख 5%, 8-12 लाख 10%, 12 लाख तक सेक्शन 87A के तहत जीरो टैक्स। स्टैंडर्ड डिडक्शन जारी रहेगा। HRA छूट बढ़ी। लेकिन TDS सीमाएं ऊपर गईं, TCS दरें कुछ मामलों में बढ़ीं। PAN जरूरी उच्च मूल्य खरीद पर: 10 लाख कैश, 5 लाख वाहन, 20 लाख प्रॉपर्टी।
शेयर, ESOP और बॉन्ड्स पर स्पष्टता
शेयर ट्रेड्स का 7 साल ऑडिट ट्रेल अनिवार्य। FMV लिस्टेड के लिए मार्केट प्राइस, अनलिस्टेड के लिए मर्चेंट बैंकर वैल्यूएशन। ESOP टैक्सेशन भी साफ: स्टार्टअप्स को राहत। जीरो कूपन बॉन्ड्स पर मैच्योरिटी 10-20 साल, इनवेस्टमेंट ग्रेड रेटिंग जरूरी। अस्पष्ट आय पर अधिकारी को फॉर्मूला-आधारित अधिकार।
चुनौतियां और फायदे
ये बदलाव अनुपालन आसान बनाएंगे, विवाद कम करेंगे, लेकिन अधिकारियों के अधिकार बढ़ने से विवाद संभव। सैलरी वालों को प्लानिंग जरूरी। कुल मिलाकर, 10 बड़े नियम सैलरी, निवेश और बिजनेस को नया आकार देंगे।









