
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक स्वीकार्यता अब उसके पासपोर्ट की ताकत में भी साफ झलक रही है। हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2026 के ताजा आंकड़ों ने इसे प्रमाणित किया है, जहां भारतीय पासपोर्ट ने 10 पायदानों की शानदार छलांग लगाई है। पहले 85वें स्थान पर रहे भारतीय पासपोर्ट ने अब 75वां स्थान हासिल कर लिया है। यह सुधार न केवल रैंकिंग का आंकड़ाई खेल है, बल्कि करोड़ों भारतीय यात्रियों के लिए वास्तविक राहत का प्रतीक है। अब भारतीय नागरिक 56 देशों में वीजा-फ्री, वीजा-ऑन-अराइवल (VOA) या इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल अथॉराइजेशन (ETA) के साथ बेफिक्र घूम सकते हैं।
हेनली पासपोर्ट इंडेक्स का महत्व
हेनली पासपोर्ट इंडेक्स दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित वैश्विक सूचकांकों में से एक है, जो देशों को उनके नागरिकों की बिना पूर्व वीजा यात्रा की क्षमता के आधार पर रैंक करता है। इसकी गणना 227 गंतव्यों तक पहुंच पर आधारित होती है। सिंगापुर इस सूची में शीर्ष पर काबिज है, जहां उसके नागरिक 192 देशों में वीजा-फ्री एंट्री का मजा ले सकते हैं।
दूसरे स्थान पर जापान और दक्षिण कोरिया संयुक्त रूप से हैं, जबकि तीसरे पायदान पर स्वीडन और यूएई ने जगह बनाई है। यूरोपीय दिग्गज जैसे फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन और स्विट्जरलैंड भी टॉप-10 में बरकरार हैं। भारतीय पासपोर्ट का 75वां स्थान पाकिस्तान (31 देशों तक पहुंच) से कहीं बेहतर है, लेकिन शीर्ष देशों से अभी लंबा सफर बाकी है।
ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव और नई उपलब्धि
यह उपलब्धि ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव के बाद आई है। 2006 में भारत ने अब तक का सर्वोच्च 71वां स्थान हासिल किया था, लेकिन कोविड महामारी और भू-राजनीतिक तनावों के चलते यह 85वें तक लुढ़क गया। 2025 में मामूली सुधार के साथ 80वें स्थान पर पहुंचा पासपोर्ट अब 56 गंतव्यों तक विस्तार कर रहा है। थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, मालदीव जैसे एशियाई देशों से लेकर मॉरीशस, केन्या (ETA), फिजी, जमैका जैसे कैरिबियन द्वीपों तक पहुंच आसान हुई है। नेपाल, भूटान जैसी पड़ोसी देश तो पहले से ही वीजा-मुक्त हैं। यह वृद्धि भारत की सक्रिय डिप्लोमेसी का नतीजा है, जहां द्विपक्षीय समझौतों ने नए द्वार खोले हैं।
वीजा-फ्री एंट्री पर ब्रेक
लेकिन खुशी के इस दौर में एक कड़वी सच्चाई भी है। भारतीय पासपोर्ट भले ही मजबूत हुआ हो, दो प्रमुख देशों ने वीजा-फ्री एंट्री की सुविधा अचानक बंद कर दी है। पहला है श्रीलंका, जहां पहले आसान VOA उपलब्ध था। अब पर्यटकों के ओवरस्टे, अवैध रोजगार और आपराधिक गतिविधियों के बढ़ते मामलों से चिंतित कोलंबो सरकार ने प्री-अप्रूवल इलेक्ट्रॉनिक वीजा अनिवार्य कर दिया है।
दूसरा देश अफ्रीकी या एशियाई क्षेत्र का एक राष्ट्र है, जहां सुरक्षा चिंताओं और वीजा दुरुपयोग ने फैसला लिया। इन बदलावों से कुल वीजा-मुक्त संख्या में नेट गिरावट आई, हालांकि नए जुड़ने वाले देशों जैसे गाम्बिया ने इसे संतुलित रखा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुरक्षा नीतियों और आर्थिक दबावों का परिणाम है।
यात्रियों पर प्रभाव और सलाह
आम यात्रियों पर असर: यह सुधार मध्यम वर्ग के पर्यटकों, व्यापारियों और छात्रों के लिए वरदान है। पहले यूरोप या अमेरिका जैसे कठिन वीजा वाले देशों की बजाय एशिया-अफ्रीका फोकस बढ़ा है। लेकिन यात्रा से पहले dfa.gov.in या henleypassportindex.com जैसी आधिकारिक साइटें चेक करना जरूरी है, क्योंकि नियम रातोंरात बदल सकते हैं। भारत सरकार भी नए समझौतों पर काम कर रही है।
कुल मिलाकर, 75वां स्थान सकारात्मक संकेत है। जैसे-जैसे भारत की वैश्विक साख बढ़ेगी, पासपोर्ट की ताकत और चमकेगी। लेकिन दो देशों का फैसला सतर्कता बरतने की याद दिलाता है।









