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भैंसा, दारू और कुत्ता! भारत के इन रेलवे स्टेशनों के नाम सुनकर छूट जाएगी हंसी, टिकट मांगने में भी आती है शर्म

टिकट लेते शरम आएगी, लेकिन मजा दोगुना! भारत के 10 अजीब स्टेशन जानें, नाम पढ़कर ठहाके लगेंगे। सफर यादगार बनाने वाले ये नाम सोशल मीडिया पर धूम मचा रहे हैं।

By Manju Negi

भारतीय रेलवे का विशाल नेटवर्क देश को एक सूत्र में बांधता है। लाखों यात्री रोजाना ट्रेनों से सफर करते हैं। लेकिन कुछ रेलवे स्टेशनों के नाम इतने अनोखे हैं कि उन्हें सुनते ही मुंह से हंसी निकल पड़ती है। भैंसा, दारू, कुत्ता जैसे नाम टिकट खरीदते समय शरम पैदा कर देते हैं। ये नाम गांवों की पुरानी पहचान को दर्शाते हैं।

भैंसा, दारू और कुत्ता! भारत के इन रेलवे स्टेशनों के नाम सुनकर छूट जाएगी हंसी, टिकट मांगने में भी आती है शर्म

प्रमुख मजेदार स्टेशन

देशभर में बिखरे ये स्टेशन यात्रा को रोमांचक बनाते हैं। तेलंगाना के निर्मल जिले में भैंसा रेलवे स्टेशन है। यहां भैंसों की बहुलता से नाम पड़ा। शहर में करीब 50 हजार लोग रहते हैं। ट्रेनें कम ही रुकती हैं। झारखंड के हजारीबाग जिले का दारू स्टेशन गांव का नाम है। सुनने में शराब जैसा लगता है।

पंजाब के जालंधर में काला बकरा स्टेशन ब्रिटिश काल की कहानी से जुड़ा। एक सैनिक ने काले बकरे की दुकान खोली थी। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में बिल्ली जंक्शन छोटा सा स्टेशन है। कई ट्रेनें यहां ठहरती हैं। कर्नाटक का कुट्टा प्राकृतिक छटा से भरपूर है। तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में टट्टी खाना नाम मात्र सौ लोगों का गांव है।

राजस्थान में साली, बाप और ओढ़निया चाचा जैसे नाम मिलते हैं। साली जोधपुर के पास है। बाप उत्तर-पश्चिमी रेलवे पर आता है। हरियाणा के पानीपत के निकट दिवाना रोज 16 ट्रेनें देखता है। महाराष्ट्र के पुणे में भोसरी पहले भोजपुर था। यहां पुराना महल है। यूपी के रामपुर-मुरादाबाद में सुअर स्टेशन भी चर्चित है।

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नामों की कहानी

ये नाम सदियों पुरानी स्थानीय परंपराओं से आए। रेलवे ने गांवों के मूल नाम अपनाए। हास्य का इरादा कभी नहीं था। लेकिन सोशल मीडिया ने इन्हें वायरल कर दिया। यूट्यूब वीडियो और मीम्स ने लोकप्रियता बढ़ाई। 2026 में भी ये ट्रेंड जारी है।

यात्रियों को मजा आता है। टिकट ऐप पर नाम टाइप करते झिझक होती है। एक यात्री ने बताया कि दारू स्टेशन पर उतरना शर्मनाक लेकिन मजेदार लगता है। स्टेशन घोषणाएं सुनकर सहयात्री हंस पड़ते हैं। रेलवे अधिकारी कहते हैं कि नाम बदलना मुश्किल है। ये ऐतिहासिक महत्व रखते हैं।

स्टेशनों की तुलना

स्टेशन का नामराज्यविशेषता
भैंसातेलंगानाभैंसों से नाम, कम ट्रेनें
दारूझारखंडगांव का शराब जैसा नाम
काला बकरापंजाबसैनिक की बकरी दुकान
बिल्ली जंक्शनउत्तर प्रदेशकई ट्रेनें रुकती हैं
टट्टी खानातेलंगानाछोटा गांव, शर्मीला नाम
ओढ़निया चाचाराजस्थानपरिवार आधारित नाम

सोशल मीडिया का असर

फेसबुक, इंस्टाग्राम पर ये नाम वायरल हैं। लोग सेल्फी लेने जाते हैं। पर्यटन बढ़ा है। हैशटैग से लाखों व्यूज आते हैं। बहस चल रही है कि नाम बदलें या न बदलें। रेल मंत्रालय मानता है कि ये स्थानीय संस्कृति हैं। बदलाव से पहचान खो सकती है।

ये स्टेशन भारतीय विविधता दिखाते हैं। हंसी के साथ देश की कहानी बयां करते हैं। अगली यात्रा में इनका सफर जरूर करें। मजा दोगुना हो जाएगा।

Author
Manju Negi
अमर उजाला में इंटर्नशिप करने के बाद मंजु GyanOk में न्यूज टीम को लीड कर रही है. मूल रूप से उत्तराखंड से हैं और GyanOk नेशनल और राज्यों से संबंधित न्यूज को बारीकी से पाठकों तक अपनी टीम के माध्यम से पहुंचा रही हैं.

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