Tags

खुद की दाल मिल लगाएं और कमाएं बंपर मुनाफा! सरकार देगी ₹25 लाख तक की सब्सिडी; दलहन खेती पर ₹10,000 प्रति एकड़ बोनस

इंपोर्टेड दालों को कहिए अलविदा! केंद्र सरकार अब दाल की खेती पर ₹10,000 प्रोत्साहन और प्रोसेसिंग यूनिट पर ₹25 लाख की सब्सिडी दे रही है। जानें 70 दिन में पकने वाली मसूर और 100% MSP गारंटी के साथ कैसे बदलेगी भारतीय कृषि की तस्वीर।

By Pinki Negi

खुद की दाल मिल लगाएं और कमाएं बंपर मुनाफा! सरकार देगी ₹25 लाख तक की सब्सिडी; दलहन खेती पर ₹10,000 प्रति एकड़ बोनस।
Dal Mill Subsidy India

भारत सरकार ने कृषि क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करते हुए ‘राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ (National Pulses Self-Sufficiency Mission) को पूरी शक्ति के साथ लागू करने का निर्णय लिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कर दिया है कि अब कृषि मंत्रालय सिर्फ दिल्ली के कमरों से नहीं, बल्कि सीधे खेतों और गाँवों से चलेगा। इस मिशन का उद्देश्य भारत को 2030-31 तक दालों के मामले में न केवल आत्मनिर्भर बनाना है, बल्कि एक प्रमुख निर्यातक के रूप में स्थापित करना है।

दाल मिलों पर मिलेगी बंपर सब्सिडी

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने ‘वैल्यू एडिशन’ (मूल्य संवर्धन) पर ध्यान केंद्रित किया है।

  • सब्सिडी का गणित: क्लस्टर आधारित क्षेत्रों में दाल मिल (Dal Mill) लगाने वाले उद्यमियों या किसान समूहों (FPOs) को ₹25 लाख तक की सब्सिडी दी जाएगी।
  • लक्ष्य: देशभर में 1000 स्मार्ट पल्स प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित की जाएंगी। मध्य प्रदेश, जो देश का सबसे बड़ा दलहन उत्पादक राज्य है, वहां 55 अत्याधुनिक मिलों के साथ इस परियोजना का आगाज़ होगा।

MSP पर 100% खरीदी का भरोसा

किसानों की सबसे बड़ी चिंता बाजार में फसल के सही दाम को लेकर होती है। इसे दूर करने के लिए केंद्र ने तुअर (अरहर), उड़द, मसूर और चने की शत-प्रतिशत खरीदी का आश्वासन दिया है।

  • नया मूल्य ढांचा: * तुअर: ₹8000 प्रति क्विंटल
    • उड़द: ₹7800 प्रति क्विंटल
    • मसूर: ₹7000 प्रति क्विंटल
    • चना: ₹5875 प्रति क्विंटल सरकार ने साफ किया है कि बाजार भाव अगर कम भी होता है, तो भी सरकार इन्हीं कीमतों पर फसल खरीदेगी।

‘बीज से बाजार तक’ और वैज्ञानिक अनुसंधान

अंतर्राष्ट्रीय शुष्क क्षेत्र कृषि अनुसंधान केंद्र (ICARDA) के साथ मिलकर सरकार ने बीजों की गुणवत्ता पर क्रांतिकारी काम किया है।

  • कम समय में फसल: अमलाहा स्थित केंद्र में वैज्ञानिकों ने मसूर की ऐसी 41 नई किस्में तैयार की हैं जो 70-80 दिनों में पक जाएंगी। यह उन क्षेत्रों के लिए वरदान है जहाँ पानी की कमी होती है या गर्मी जल्दी आ जाती है।
  • बीज ग्राम (Seed Hubs): इकार्डा के सहयोग से देश के विभिन्न हिस्सों में ‘बीज हब’ बनाए जाएंगे, जो सीधे किसानों को उच्च उपज वाले और रोग-मुक्त बीज उपलब्ध कराएंगे।

प्रोत्साहन राशि और वित्तीय सहायता

छोटे और मध्यम किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने सीधे नकद सहायता का प्रावधान भी किया है।

  • ₹10,000 प्रति हेक्टेयर: जो किसान दलहन उत्पादन के आदर्श मानकों को अपनाएंगे, उन्हें प्रति हेक्टेयर ₹10,000 की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
  • मध्य प्रदेश को विशेष पैकेज: दलहन उत्पादन में अग्रणी होने के नाते मध्य प्रदेश को ₹354 करोड़ की विशेष बजट राशि आवंटित की गई है।

भावांतर भुगतान और तकनीकी सहायता

मध्य प्रदेश की तर्ज पर अन्य राज्यों में भी भावांतर भुगतान योजना के लाभों पर चर्चा की जा रही है, ताकि MSP और बाजार भाव के अंतर की भरपाई सीधे किसान के बैंक खाते में की जा सके। साथ ही, ‘दलहन मिशन पोर्टल’ के जरिए किसानों को उनकी मिट्टी के अनुकूल फसलों और नई तकनीकों की पल-पल की जानकारी डिजिटल माध्यम से मिलेगी।

दालों का कटोरा बनेगा भारत

भारत वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा दाल उत्पादक और उपभोक्ता है, लेकिन बढ़ती मांग के कारण हमें करोड़ों डॉलर की दालें विदेश से मंगानी पड़ती हैं। यह मिशन न केवल उस विदेशी मुद्रा को बचाएगा, बल्कि “कैक्टस खेती” जैसे नए आय के स्रोतों के माध्यम से बंजर भूमि को भी उपजाऊ बनाएगा।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

अभी-अभी मोदी का ऐलान

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें