Tags

बिहार-बंगाल को काटकर क्या बनने जा रहा है नया राज्य? अगर बना तो शामिल होंगे ये 5 जिले; जानें क्या है हिंदू-मुस्लिम आबादी का गणित

सियासी गलियारों में हलचल तेज! क्या बिहार के सीमांचल और बंगाल के हिस्सों को मिलाकर बनेगा नया केंद्र शासित प्रदेश? जानें उन 5 जिलों का पूरा भूगोल और जनसंख्या का वो पेचीदा गणित, जिसने राजनीतिक दलों की नींद उड़ा दी है।

By Pinki Negi

बिहार-बंगाल को काटकर क्या बनने जा रहा है नया राज्य? अगर बना तो शामिल होंगे ये 5 जिले; जानें क्या है हिंदू-मुस्लिम आबादी का गणित
नया राज्य

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के तीन दिवसीय बिहार दौरे के बीच एक नए राज्य के गठन की चर्चा ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। आरजेडी विधायक रणविजय साहू ने दावा किया है कि केंद्र सरकार बिहार के सीमांचल और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों को मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश या राज्य बनाने की योजना बना रही है।

विधायक का आरोप है कि यह कदम ममता बनर्जी और आरजेडी के वोट बैंक को प्रभावित करने के लिए उठाया जा सकता है। इस दावे के बाद अब इन इलाकों के जनसांख्यिकीय समीकरणों और हिंदू-मुस्लिम आबादी के आंकड़ों पर बहस छिड़ गई है, क्योंकि यह क्षेत्र रणनीतिक और राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

सीमांचल और बंगाल के वो 6 जिले

अगर भविष्य में बिहार और बंगाल के हिस्सों को जोड़कर कोई नया प्रशासनिक क्षेत्र बनाया जाता है, तो मुख्य रूप से 6 जिलों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। इनमें बिहार के तीन पूर्वी जिले—किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार शामिल हैं, जो पश्चिम बंगाल के साथ अपनी सीमा साझा करते हैं।

वहीं, पश्चिम बंगाल की ओर से दार्जिलिंग, उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर इस संभावित बदलाव के दायरे में आते हैं। भौगोलिक दृष्टि से ये सभी जिले एक-दूसरे से सटे हुए हैं; जैसे दार्जिलिंग और उत्तर दिनाजपुर की सीमाएं सीधे किशनगंज से लगती हैं, जो सामरिक और राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण गलियारा (चिकन नेक कॉरिडोर) माना जाता है।

किशनगंज और उत्तर दिनाजपुर में क्या कहते हैं आबादी के आंकड़े?

आरजेडी विधायक के दावे के पीछे का मुख्य आधार इन सीमावर्ती जिलों का धार्मिक समीकरण है। बिहार का किशनगंज एक मुस्लिम बहुल जिला है, जहाँ लगभग 68% मुस्लिम आबादी है, जबकि हिंदू आबादी करीब 31% है।

इसी तरह, पश्चिम बंगाल का उत्तर दिनाजपुर जिला भी राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है, क्योंकि यहाँ मुस्लिम (49.92%) और हिंदू (49.31%) आबादी लगभग बराबर है। इन आंकड़ों से साफ है कि यदि इन इलाकों को काटकर नया राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाता है, तो इसका सबसे बड़ा असर वर्तमान क्षेत्रीय दलों के मुस्लिम वोट बैंक पर पड़ेगा, जो यहाँ निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

इन सीमावर्ती जिलों का धार्मिक और सामाजिक ताना-बना

बिहार और बंगाल के इन चार जिलों में आबादी का स्वरूप काफी विविधतापूर्ण है। दक्षिण दिनाजपुर और दार्जिलिंग मुख्य रूप से हिंदू बहुल क्षेत्र हैं। दक्षिण दिनाजपुर में 73.55% हिंदू आबादी है, जबकि दार्जिलिंग में हिंदू धर्म के साथ-साथ बौद्ध और ईसाई धर्म का भी गहरा प्रभाव है।

वहीं, बिहार के पूर्णिया और कटिहार में समीकरण थोड़े अलग हैं; यहाँ हिंदू आबादी बहुसंख्यक (क्रमशः 60.94% और 68%) होने के बावजूद मुस्लिम आबादी (38.46% और 31.43%) एक बेहद मजबूत और निर्णायक भूमिका में है। यही कारण है कि इन इलाकों की भौगोलिक सीमाओं में किसी भी तरह का बदलाव राजनीतिक दलों के लिए जीत-हार का बड़ा फैक्टर बन सकता है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

अभी-अभी मोदी का ऐलान

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें