
केंद्र सरकार बैंकिंग क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाने की योजना बना रही है, जिसके तहत छह प्रमुख सरकारी बैंकों को आपस में या किसी बड़े बैंक के साथ मिलाने पर विचार किया जा रहा है। सरकार चाहती है कि विलय (मर्जर) के माध्यम से भारत में ऐसे मजबूत और विशाल बैंक बनें जो दुनिया के शीर्ष 100 बैंकों में अपनी जगह बना सकें।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य बैंकों की वित्तीय स्थिति को सुधारना, खराब कर्ज़ (NPA) को कम करना, डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर पर भारतीय बैंकों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) भी इस विलय प्रक्रिया का समर्थन कर रहा है, ताकि देश में बड़े बैंकों का निर्माण हो सके।
अप्रैल 2026 के बाद नहीं रहेंगे ये 6 बड़े बैंक
भारत में अब बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज़ बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, यूको बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक जैसे कुछ बैंकों के विलय (मर्जर) पर चर्चा चल रही है। ये बैंक या तो आपस में मिल सकते हैं या किसी बड़े बैंक का हिस्सा बन सकते हैं।
1993 से शुरू होकर पिछले तीन दशकों में, ऐसे बड़े बैंक मर्जर से भारतीय बैंकिंग सिस्टम में बड़े बदलाव आए हैं। विलय की इस रणनीति से बैंकों को मजबूत बनाया जाता है, जिससे उनकी पूंजी क्षमता बढ़ती है, वे नई तकनीक आसानी से अपना पाते हैं, उनका जोखिम कम होता है, और शाखाओं के दोहराव (ओवरलैप) से होने वाले खर्च में भी कमी आती है।
सरकारी बैंकों का विलय
हाल ही में हुए बड़े बैंक विलयों में, अप्रैल 2017 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने एक बड़ा कदम उठाया। SBI ने अपने छह सहयोगी बैंकों को खुद में मिला लिया। इन सहयोगी बैंकों में स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर और भारतीय महिला बैंक शामिल थे। इस विलय के बाद, SBI देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक बन गया। कम लेकिन मजबूत सरकारी बैंक बनाने का यह विचार सबसे पहले पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दिया था।
बैंक ऑफ बड़ौदा में विजया बैंक और देना बैंक का विलय
देश में सरकारी बैंकों को मज़बूत बनाने के लिए भारत सरकार ने कई बड़े विलय किए हैं। कुछ समय पहले, बैंक ऑफ बड़ौदा में विजया बैंक और देना बैंक का विलय हुआ, जिसके बाद यह देश का तीसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक बन गया। इसके बाद, पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को अपने साथ मिलाया और यह देश का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक बन गया।
इसी समय, केनरा बैंक भी सिंडिकेट बैंक के साथ मिलकर देश का चौथा सबसे बड़ा सरकारी बैंक बना। इसके अलावा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक को मिलाकर पाँचवाँ सबसे बड़ा सरकारी बैंक बनाया, और इंडियन बैंक ने इलाहाबाद बैंक को अपने साथ मिलाकर सातवां सबसे बड़ा बैंक बनाया।
सरकारी बैंकों के अगले विलय की तैयारी
अब सवाल यह है कि आगे कौन से बैंक आपस में विलय करेंगे। पिछले कई बड़े विलय अप्रैल के महीने में, यानी वित्तीय वर्ष की शुरुआत में किए गए थे। हालांकि वित्त मंत्रालय ने अभी तक किसी बैंक का आधिकारिक नाम नहीं बताया है, पर यह उम्मीद है कि अगले कुछ वर्षों में इस बारे में कोई बड़ी घोषणा हो सकती है।
खबरों के अनुसार, सरकार बैंकिंग विलय के अगले चरण की तैयारी कर रही है और संभव है कि अप्रैल या मई के आसपास कोई आधिकारिक जानकारी सामने आए। इस बार, बड़े विलय एक साथ करने के बजाय, इस योजना को दो-तीन चरणों में लागू किया जा सकता है। ऐसा करने का मकसद प्रक्रिया को आसान बनाना और पूंजी का प्रबंधन (Capital Management) बेहतर तरीके से करना है।
सरकारी बैंकों (PSBs) की संख्या घटी
सरकार की लंबे समय की योजना सरकारी बैंकों (PSBs) की संख्या को 12 से घटाकर केवल छह या सात तक लाना है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य बैंकों को मज़बूत और प्रतिस्पर्धी बनाना है। इससे इन बैंकों की आर्थिक स्थिति (बैलेंस शीट) सुधरेगी और लोन देने की क्षमता बढ़ेगी। साथ ही, इनके कामकाज में सुधार आएगा। यह विलय, भारत के तेज़ी से बढ़ रहे इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को आर्थिक सहायता देने के लिए बड़े और सक्षम बैंक तैयार करने में मदद करेगा।









