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‘चीन कभी भी कर सकता है भारत पर हमला’, अमेरिका ने भारत को किया अलर्ट, ताइवान के लिए ध्यान भटकाना है वजह, देखें

पूर्व अमेरिकी मरीन अधिकारी ग्रांट न्यूशम ने भारत को चेताया: ताइवान के शोर में चीन कभी भी हमला कर सकता है। पेंटागन रिपोर्ट के आधार पर, शी जिनपिंग PLA की ताकत परखने को भारत को निशाना बना सकते हैं। गलवान साबित करता है—चीनी सेना तैयार है। ट्रंप युग में भारत-अमेरिका गठजोड़ मजबूत, सतर्कता जरूरी।

By Pinki Negi

america us warns india china may attack amidst taiwan focus

जब पूरी दुनिया की नजरें ताइवान स्ट्रेट पर टिकी हैं, वहीं पूर्व अमेरिकी मरीन इंटेलिजेंस अधिकारी ग्रांट न्यूशम ने भारत के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। उनका दावा है कि चीन ताइवान को महज छलावे के रूप में इस्तेमाल कर सकता है और असल निशाना भारत जैसे अन्य मोर्चे बना सकता है। न्यूशम ने साफ शब्दों में कहा, “भारत को चीन के इरादों पर कभी भरोसा न करें। सतर्क रहें, क्योंकि हमला कभी भी हो सकता है।”

न्यूशम की यह चेतावनी 4 फरवरी 2026 को सामने आई, जब वैश्विक मीडिया ताइवान में बढ़ते तनाव पर केंद्रित था। पेंटागन की ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि चीन 2049 तक खुद को महाशक्ति बनाने की होड़ में है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) में बड़े बदलाव किए हैं, जिनकी परीक्षा किसी युद्ध में हो सकती है। “ताइवान सिर्फ दिखावा है। दुनिया की नजरें वहीं होंगी, लेकिन चीन भारत, दक्षिण कोरिया, दक्षिणी जापान या फिलीपींस पर प्रहार कर सकता है।

गलवान ने तोड़ी ‘अपरिक्षित सेना’ की मिथक

चीन की सेना को अक्सर ‘अनटेस्टेड’ कहा जाता है, क्योंकि उसने दशकों से कोई बड़ा युद्ध नहीं लड़ा। लेकिन न्यूशम ने इस धारणा को पूरी तरह खारिज कर दिया। 2020 की गलवान घाटी झड़प का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों ने चीनी PLA को करारा जवाब दिया था। उस हिंसक टकराव में चीन को भारी नुकसान हुआ, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। “चीन ‘शांति की बीमारी’ का ढोंग करता है, लेकिन उनकी सेना कठोर प्रशिक्षण से गुजर रही है। गलवान साबित करता है कि वे किसी भी मोर्चे पर उतरने को तैयार हैं।”

न्यूशम का अनुभव समृद्ध है। पूर्व अमेरिकी मरीन के रूप में उन्होंने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सेवा की और अब सेंटर फॉर सिक्योरिटी पॉलिसी में सीनियर फेलो हैं। उनकी चेतावनी अमेरिकी खुफिया विश्लेषण पर आधारित है, जो चीन की ‘धोखे की रणनीति’ को उजागर करती है। ताइवान पर PR शोर मचाकर चीन अन्य सीमाओं पर सरप्राइज अटैक की योजना बना सकता है।

ट्रंप युग में भारत-अमेरिका का मजबूत गठजोड़

यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2026 डिफेंस पॉलिसी में भारत के साथ सैन्य साझेदारी को प्राथमिकता दी है। ट्रंप के करीबी माने जाने वाले अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की भूमिका यहां अहम है। न्यूशम ने कहा, “गोर ट्रंप के खास हैं। उनकी नियुक्ति भारत-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाई देगी।” हाल ही में दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते की घोषणा हुई, जो QUAD गठबंधन को मजबूत करेगी।

भारत ने भी LAC पर सतर्कता बढ़ा दी है। गलवान के बाद ब्रह्मोस मिसाइलों की तैनाती और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से सेना की तैयारी पुख्ता हुई है। लेकिन न्यूशम की चेतावनी भारत को ‘दोहरी सतर्कता’ अपनाने की नसीहत देती है, ताइवान शोर में छिपे खतरे को नजरअंदाज न करें।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

भारतीय रणनीतिकारों का मानना है कि चीन की आर्थिक मंदी और ताइवान दबाव के बीच भारत पर दबाव बनाना उसकी रणनीति हो सकती है। पूर्व राजदूत अशोक कंठ ने कहा, “चीन बहु-मोर्चा रणनीति अपनाता है। लेकिन भारत की सेना अब 2020 वाली नहीं।” अमेरिकी थिंकटैंक CSIS की रिपोर्ट भी चीन की ‘ग्रे जोन’ रणनीति की पुष्टि करती है।

फरवरी 2026 में ताइवान संकट चरम पर है। ट्रंप प्रशासन ने QUAD को सक्रिय किया है, लेकिन न्यूशम की बात रेडार से बाहर रहने वाले खतरों की याद दिलाती है। भारत को न केवल सीमा मजबूत करनी होगी, बल्कि वैश्विक कूटनीति में सक्रिय रहना होगा। क्या चीन वाकई ताइवान के पीछे भारत को निशाना बनाएगा? समय ही जवाब देगा, लेकिन सतर्कता ही सबसे बड़ा हथियार है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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