Marriage Registration Certificate: क्या बिना रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के Valid है शादी? इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला

मैरिज रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट न बनाने के मामलों में फसे लोगों के लिए राहत की खबर है। इलाहबाद हाई कोर्ट ने ने कहा है कि अगर मैरिज सर्टिफिकेट नहीं है तो उस विवाह को अमान्य नहीं माना जाएगा। आइए इस पूरी खबर को विस्तार से जानते हैं।

By Pinki Negi

Marriage Registration Certificate: इलाहबाद हाई कोर्ट ने मैरिज रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट से सम्बंधित एक बड़ा फैसला सुनाया है अगर आपकी भी नई नई शादी हुई है और आप भी शादी की रजिस्ट्री कराना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए है। हाल ही में हाई कोर्ट ने कहा है कि अगर शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है तो उस हिन्दू विवाह की अमान्य नहीं माना जाएगा।

यह भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, ससुर के मकान पर बहू का हक नहीं’ कोर्ट ने खारिज की महिला की याचिका

फैमेली कोर्ट को दिए गए निर्देश

आजमगढ़ के सुनील दुबे ने याचिका दायर की थी जिसके बाद यह फैसला सुनाया गया है। बता दें जब सुनवाई हो रही थी तो, जस्टिस मनीष कुमार निगम ने कहा कि जो मामले आपसी सहमति के हैं उन्हें मैरिज सर्टिफिकेट देने की आवश्यकता नहीं है और न ही फैमेली कोर्ट को उन्हें यह सर्टिफिकेट दिखने के लिए हठ नहीं करनी चाहिए। शादी को साबित करने के लिए केवल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट ही दिखाना आवश्यक नहीं होता।

क्या कहता है कानून?

हिन्दू विवाह अधिनियाँ 1955 के तहत अगर किसी जोड़े के मैरिज सर्टिफिकेट नहीं बना होता है तो उस शादी को गैरकानूनी नहीं माना जाएगा। कोर्ट का कहना है हालाँकि शादी के सबूत के लिए मैरिज रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट को इम्पोर्टेन्ट माना जाता है लेकिन यह क़ानूनी रूप से शादी को वेध बनाने के लिए आवश्यक नहीं माना जाता है। राज्य सरकार ही शादी के वैधता के लिए नियम और अधिकार बना सकते हैं।

पूरा मामला क्या है?

शादी वैध है या नहीं इसके पीछे का एक बड़ा मामला है। बता दें सुनील और उनकी पत्नी ने फैमिली कोर्ट में अपनी याचिका दायर की कि वह आपसी समझौते से तलाक चाहते हैं। लेकिन फिर कोर्ट ने उनसे शादी के प्रमाण के लिए रजिस्ट्रशन सर्टिफिकेट पेश करने के लिए कहा जो कि उन्हें पास नहीं था और कोर्ट ने फैसला लेने के बजाय अर्जी को ख़ारिज कर दिया।

सुनील ने हार नहीं मानी और हाई कोर्ट में अपील करने का फैसला लिया। हाई कोर्ट में जब ये पूरी जानकारी दी गई तो उसने तुरंत ही फैमिली कोर्ट के लिए गए फैसले को ख़ारिज कर दिया। इसके बाद हाई कोर्ट को निर्देश दिए की तलाक सुनवाई का तुरंत ही फैसला किया जाए। इससे साबित होता है कि शादी की वैधता बताने के लिए केवल शादी की रजिस्ट्री होना की जरुरी नहीं है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें