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सावधान! भारत की सड़कों पर दौड़ रही हर दूसरी गाड़ी का नहीं है इंश्योरेंस, सरकार ने दी बड़ी चेतावनी

सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़ों से सनसनीखेज खुलासा- देश की सड़कों पर 44% वाहन बिना बीमा के दौड़ रहे। राज्यसभा में मंत्री नितिन गडकरी ने VAHAN डेटाबेस के हवाले से बताया कि 6 मार्च तक सक्रिय वाहनों में थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की कमी गंभीर है। मोटर वाहन एक्ट के उल्लंघन पर जुर्माना-जेल, पीड़ितों को मुआवजा फंड से राहत। सरकार ने राज्यों को सख्ती के निर्देश दिए।

By Pinki Negi

44 percent of vehicles in india are on the roads without insurance government report reveals

भारत की सड़कों पर सड़क सुरक्षा का संकट गहराता जा रहा है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के ताजा आंकड़ों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि देश में चल रहे करीब 44 प्रतिशत वाहनों के पास कोई बीमा कवर नहीं है। यानी हर दो में से एक कार, बाइक या ट्रक बिना अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ रहा है। यह आंकड़ा राज्यसभा में पेश सरकारी डेटा से सामने आया है, जिसने न केवल कानूनी उल्लंघन बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में पीड़ितों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति ‘सामाजिक आपदा’ बन चुकी है, जहां दुर्घटना होने पर मालिक और पीड़ित दोनों संकट में फंस जाते हैं।

राज्यसभा में सवाल पर खुलासा

यह चिंताजनक आंकड़ा राज्यसभा में सांसद के.आर. सुरेश रेड्डी के सवाल के जवाब में सामने आया। उन्होंने बिना बीमा वाले वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं और पीड़ितों को मुआवजे की व्यवस्था पर सवाल उठाया था । केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया कि यह डेटा VAHAN डेटाबेस पर आधारित है, जिसमें 6 मार्च 2026 तक वैध रजिस्ट्रेशन और फिटनेस वाले सक्रिय वाहनों को शामिल किया गया।

पहले के वर्षों में यह संख्या 48% से 57% तक रही, लेकिन 2026 का आंकड़ा 44% पर स्थिर है, जो सुधार की कमी दर्शाता है । गडकरी ने जोर दिया कि मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 146 के तहत थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य है, फिर भी अनुपालन में बड़ी चूक है।​

कानूनी ढिलाई और जोखिम

मोटर वाहन अधिनियम की धारा 196 में बिना बीमा के वाहन चलाने पर जुर्माना (पहली बार 2000 रुपये, बाद में 4000 रुपये) और तीन महीने तक की जेल की सजा का प्रावधान है । लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई न के बराबर है, जिससे वाहन मालिक लापरवाह बने हुए हैं। दुर्घटना होने पर मालिक को पीड़ितों का पूरा मुआवजा खुद देना पड़ता है, जो लाखों-करोड़ों तक पहुंच सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2025 में 50% से अधिक बिना बीमा वाहनों पर चिंता जताते हुए IRDAI और बीमा कंपनियों से सख्त कदम उठाने को कहा । कोर्ट ने इसे ‘सड़क सुरक्षा के लिए खतरा’ करार दिया और वाहन जब्ती जैसे कड़े उपायों की वकालत की।

पीड़ितों के लिए राहत व्यवस्था

बिना बीमा या हिट-एंड-रन दुर्घटनाओं में सरकार ने Motor Vehicle Accident Fund बनाया है, जो दो खातों में विभाजित है । पहले खाते से इलाज का खर्च वहन होता है। PM RAHAT योजना के तहत दुर्घटना के 7 दिनों के अंदर नामित अस्पतालों में 1.5 लाख रुपये तक मुफ्त इलाज मिलता है । दूसरे खाते से हिट-एंड-रन पीड़ितों या परिवार को मुआवजा दिया जाता है- मृत्यु पर 2 लाख, गंभीर चोट पर 50 हजार रुपये। धारा 164 और 166 के तहत कोर्ट से दावा किया जा सकता है, लेकिन प्रक्रिया लंबी और जटिल है।

सुधार के उपाय और चुनौतियां

मंत्रालय ने राज्यों को चिट्ठी लिखकर सख्ती बरतने, जागरूकता अभियान चलाने और डिजिटल वेरिफिकेशन लागू करने के निर्देश दिए हैं । विशेषज्ञ डिजिटल ट्रैकिंग, ऑटो-रिन्यूअल और भारी जुर्माने की सलाह देते हैं। न्यू इंडिया इंश्योरेंस के चेयरमैन ने बताया कि केवल 52% वाहन बीमित हैं, बाकी डेटा होने के बावजूद अनदेखे रहते हैं।

वाहन मालिकों को तत्काल बीमा कराना चाहिए – थर्ड-पार्टी पॉलिसी सालाना मात्र 500-1000 रुपये में उपलब्ध है। यदि सुधार नहीं हुआ तो सड़क हादसे (प्रति वर्ष 1.5 लाख मौतें) और बढ़ेंगे। सरकार और नागरिकों को मिलकर इस लापरवाही को रोकना होगा, वरना सड़कें और घातक हो जाएंगी।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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