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HMPV Symptoms: नाक बंद और गले में खराश को मामूली सर्दी न समझें! लिवर-फेफड़ों पर असर डालने वाली इस बीमारी को जानें

ह्यूमन मेटाप्न्यूमोवायरस (HMPV) मौसम बदलने पर फैलने वाला श्वसन वायरस है, जिसके लक्षण आम सर्दी या फ्लू जैसे दिखते हैं। यह खांसी‑छींक की बूंदों और संक्रमित सतहों से फैलता है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वालों में फेफड़ों व लिवर पर गंभीर असर डाल सकता है।

By Pinki Negi

hmpv virus symptoms vs common cold prevention

मौसम बदलते ही आम सर्दी‑जुकाम और फ्लू के साथ‑साथ कुछ अन्य वायरस भी खुद‑ब‑खुद एक्टिव हो जाते हैं, जिनके बारे में आम लोगों की जागरूकता बेहद कम है। इन्हीं में से एक है ह्यूमन मेटाप्न्यूमोवायरस (HMPV), जिसकी पहचान पहली बार साल 2001 में की गई थी। इसके लक्षण इतने आम हैं कि इसे आसानी से फ्लू, आरएसवी या साधारण सर्दी से उलझा दिया जाता है, लेकिन यह वायरस खास परिस्थितियों में लिवर, फेफड़ों और दूसरे अंगों तक प्रभावित कर सकता है।

वायरस कैसे फैलता है?

एक्सपर्ट्स के अनुसार, HMPV अन्य सांस से जुड़ी कई बीमारियों की तरह ही हवा और संपर्क के जरिए फैलता है। जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उसकी सांस के साथ निकलने वाली बूंदें हवा में फैल जाती हैं और दूसरे लोगों की नाक‑मुंह व आंखों से उनमें संक्रमण पहुंचता है। इसके अलावा, किसी इंफेक्टेड सतह को हाथ से छूकर फिर आंख‑नाक या मुंह छूना, हाथ मिलाना या नाक‑मुंह को बिना धोए हाथों से छूना भी संक्रमण का कारण बन सकता है। इसलिए इस मौसम में लगातार हाथ धोना, सैनिटाइज़र का इस्तेमाल और सार्वजनिक जगहों पर बार‑बार हाथ से चेहरा न छूना खास रूप से जरूरी हो जाता है।

कब शुरू होता है असर?

HMPV का ट्रेंड इस बात को और भी खतरनाक बनाता है कि यह फ्लू के बाद अपना आपा दिखाता है। जहां फ्लू का पीक ज्यादातर सर्दियों में होता है, वहीं HMPV के मामले अक्सर मार्च के अंत से लेकर अप्रैल तक देखने को मिलते हैं। यानी जब लोग “अब तो फ्लू का खतरा टल गया” सोचने लगते हैं, उसी समय यह वायरस धीरे‑धीरे फैलने लगता है। हाल के डेटा के अनुसार, अमेरिका के वेस्ट कोस्ट, खासकर कैलिफोर्निया में HMPV के मामलों में उछाल देखा गया है, हालांकि यह वायरस दुनिया के अन्य हिस्सों में भी पाया जाता है और हर साल संक्रमण का ट्रेंड अलग‑अलग हो सकता है।

किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा?

डॉक्टरों के अनुसार, HMPV सबको संक्रमित कर सकता है, लेकिन कुछ समूहों में यह गंभीर रूप ले सकता है। इनमें शामिल हैं:

  • छोटे बच्चे, खासकर 1 साल से कम उम्र के
  • 65 साल से ऊपर के बुजुर्ग
  • कमजोर इम्यून सिस्टम वाले, स्टेरॉयड या इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं लंबे समय से ले रहे लोग
  • सांस से जुड़ी बीमारियां (दमा, COPD) वाले
  • कैंसर या ऑर्गन ट्रांसप्लांट के मरीज

इन लोगों में HMPV न ही साधारण सर्दी रहता है और न ही आसानी से ठीक होता है।

क्या होती हैं प्रमुख दिक्कतें?

HMPV के लक्षण गलती से सिर्फ नाक बंद और गले में खराश जैसे हल्के लग सकते हैं, जिससे लोग इसे मामूली सर्दी या फ्लू समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। आम लक्षणों में शामिल हैं:

  • खांसी (अक्सर सूखी)
  • बुखार, सिरदर्द, थकान
  • नाक बहना या नाक बंद होना
  • गले में खराश या गला खराब होना
  • छाती में जकड़न या हल्की तकलीफ

लेकिन जब वायरस निचले श्वसन मार्ग और फेफड़ों तक पहुंच जाता है, तो इसके निम्न असर देखे गए हैं:

  • निमोनिया (फेफड़ों का संक्रमण)
  • ब्रोंकिओलिटिस / ब्रोंकाइटिस– नन्ही नलियों में सूजन, जिससे सांस फूलना और बच्चों में गंभीर स्थिति बन सकती है
  • श्वसन विफलता– बहुत कम मामलों में मरीज को वेंटिलेटर या ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ती है
  • लिवर और दूसरे अंगों पर असर– कुछ केसों में लिवर के कामकाज में बदलाव और जटिल स्वस्थ रोग की स्थिति में गंभीर प्रभाव देखे गए हैं

लक्षण देखने पर क्या करें?

अगर किसी को नाक बंद, गले में खराश, खांसी और बुखार जैसे लक्षण हों, तो तुरंत यह नहीं सोचना चाहिए कि यह सिर्फ मौसम बदलने की आम बात है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से श्वसन या इम्यूनिटी से जुड़ी बीमारी वालों में सांस फूलना, लगातार बुखार, छाती में दर्द या तेज थकान दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

इलाज और सावधानियां

फिलहाल HMPV के लिए कोई खास एंटीवायरल दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इलाज ज्यादातर लक्षणों पर आधारित होता है: हाइड्रेशन, आराम, ओवर‑द‑काउंटर दर्द‑बुखार शांत करने वाली दवाएं और जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन या अस्पताल में भर्ती करना। विशेष रूप से गंभीर मामलों में अनुपूर्ण ऑक्सीजन या मशीन‑आधारित वेंटिलेशन तक जाना पड़ सकता है।

इस स्थिति में जरूरी है कि लोग HMPV को बस फ्लू‑जैसा हल्का संक्रमण न समझें, बल्कि नाक बंद, गले में खराश और लगातार बुखार दिखने पर पारिवारिक इतिहास और उम्र के हिसाब से तुरंत चिकित्सक से सलाह लें और स्वच्छता, दूरी और समय पर इलाज को नजरअंदाज न करें।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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