
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने नई शिक्षा नीति (एनईपी 2020) के तहत इस वर्ष से कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा को दो बार आयोजित करने का ऐतिहासिक कदम उठाया है। पहली परीक्षा में 24.7 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था, वहीं दूसरी परीक्षा के लिए 6.68 लाख से अधिक छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इनमें 4 लाख से ज्यादा लड़के और 2.6 लाख लड़कियां शामिल हैं, जो मुख्य रूप से स्कोर इम्प्रूवमेंट और कंपार्टमेंट श्रेणी के लिए आवेदन कर चुके हैं। यह आंकड़ा न केवल शिक्षा प्रणाली में आए बदलाव को दर्शाता है, बल्कि छात्रों की करियर के प्रति गंभीरता को भी उजागर करता है।
दूसरी बोर्ड परीक्षा: छात्रों के लिए दूसरा चांस
दूसरी बोर्ड परीक्षा छात्रों के लिए ‘दूसरा चांस’ साबित हो रही है। बोर्ड ने हाल ही में लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स (एलओसी) जारी की, जिसके बाद 15 मई से 21 मई 2026 तक परीक्षा का आयोजन निर्धारित है। कुछ स्रोतों के अनुसार यह 1 जून तक विस्तारित हो सकती है। छात्र अधिकतम तीन विषय चुन सकते हैं, जिनमें अंकों में सुधार की इच्छा रखते हैं। परीक्षा पैटर्न पहली परीक्षा जैसा ही रहेगा- 50 प्रतिशत कम्पेटेंसी-बेस्ड प्रश्न, 20 प्रतिशत ऑब्जेक्टिव और 30 प्रतिशत शॉर्ट-लॉन्ग आंसर। पासिंग मार्क्स 33 प्रतिशत ही हैं।
साइंस-मैथ्स क्यों बने छात्रों की पहली पसंद?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि साइंस और मैथमेटिक्स में छात्रों की भागीदारी सबसे ज्यादा रही। 4.74 लाख छात्रों ने साइंस चुनी, उसके बाद मैथेमेटिक्स स्टैंडर्ड में 3.68 लाख, मैथ बेसिक में 1.78 लाख, सोशल साइंस में 1.54 लाख और इंग्लिश में मात्र 98,536 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया। अंग्रेजी और अन्य भाषाओं में रुचि कम दिखी।
इसका कारण साफ है- आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, मेडिकल, इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में साइंस-मैथ्स प्राइमरी विषय हैं। छात्र भविष्य की नौकरियों को ध्यान में रखकर इन विषयों में मजबूत स्कोर चाहते हैं। कई छात्रों को पहली परीक्षा में इन विषयों से ‘डर’ या कम अंक मिले, जिसके चलते वे सुधार की राह चुन रहे हैं।
सीबीएसई के नए नियम: बेस्ट ऑफ टू फॉर्मूला
सीबीएसई के नए नियम क्रांतिकारी हैं। छात्र गणित बेसिक से स्टैंडर्ड या इसके विपरीत बदलाव कर सकते हैं। ‘बेस्ट ऑफ टू’ फॉर्मूला लागू होगा- दोनों परीक्षाओं में से बेहतर स्कोर ही फाइनल मार्कशीट में दर्ज होगा। यदि दूसरी परीक्षा में कम अंक आए, तो पहली परीक्षा के अंक ही मान्य रहेंगे। प्रैक्टिकल और इंटरनल असेसमेंट के नंबर पहली परीक्षा के ही लिए जाएंगे। 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है और पहली परीक्षा में शामिल होना जरूरी था। रजिस्ट्रेशन 16-20 अप्रैल तक बिना लेट फीस के हुआ, उसके बाद लेट फीस के साथ 22 अप्रैल तक।
रिजल्ट कब और कैसे जारी होगा?
परिणाम जून 2026 के अंत तक आने की उम्मीद है। पहली परीक्षा का रिजल्ट पहले ही डिजिलॉकर पर उपलब्ध है, जिससे छात्र प्रोविजनल मार्कशीट के आधार पर 11वीं में एडमिशन ले सकते हैं। फाइनल सर्टिफिकेट दूसरी परीक्षा के रिजल्ट के बाद जारी होगा। यह व्यवस्था छात्रों को तनाव से मुक्ति देगी, क्योंकि अब एक परीक्षा की असफलता करियर को प्रभावित नहीं करेगी।
छात्रों और अभिभावकों के लिए क्या मतलब?
यह पहल छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच उत्साह बढ़ा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रतिस्पर्धा कम होगी और सीखने पर जोर बढ़ेगा। हालांकि, कुछ अभिभावक तैयारी के दबाव को लेकर चिंतित हैं। कुल मिलाकर, सीबीएसई का यह कदम भारतीय शिक्षा को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा योगदान देगा। छात्रों को सलाह है कि वे सिलेबस पर फोकस करें और समय प्रबंधन करें।







