
आजकल नौकरी छोड़ना आम बात हो गई है। जॉब स्विचिंग के चक्कर में लाखों कर्मचारी फुल एंड फाइनल सेटलमेंट का इंतजार करते हैं, लेकिन इसमें हफ्तों या महीनों का समय लग जाता है। समस्या तब खड़ी हो जाती है जब यह सेटलमेंट अगले वित्त वर्ष में मिलता है। पूरी बकाया रकम उसी साल की आय मान ली जाती है, जिससे टैक्स स्लैब ऊंचा हो जाता है।
उदाहरण के लिए, अगर आपका सामान्य टैक्स 10-20 प्रतिशत है, तो 2-3 लाख का एरियर जोड़ते ही 30 प्रतिशत स्लैब में धकेल दिया जाता है। नतीजा? हजारों रुपये का अतिरिक्त टैक्स बोझ। लेकिन चिंता न करें, सरकार ने नए आयकर अधिनियम 2025 के तहत फॉर्म 39 पेश कर इस जाल से मुक्ति का रास्ता दिखाया है। यह पुराने फॉर्म 10E की जगह लेगा और वित्त वर्ष 2026-27 (आकलन वर्ष 2027-28) से अनिवार्य होगा।
फॉर्म 39 क्या है?
फॉर्म 39 क्या है, आइए समझें। यह एक डिजिटल फॉर्म है जो नौकरी छोड़ने के बाद एकमुश्त मिलने वाली अतिरिक्त आय पर टैक्स राहत का दावा करने की सुविधा देता है। इसमें सैलरी एरियर, एडवांस सैलरी, ग्रेच्युटी, फैमिली पेंशन, रिट्रेंचमेंट मुआवजा या कम्यूटेड पेंशन जैसी रकम शामिल है। मुख्य उद्देश्य यह है कि देरी से मिली आय को मूल वर्षों में वितरित कर टैक्स की गणना की जाए।
मान लीजिए, आपको FY 2024-25 का 1.5 लाख एरियर अप्रैल 2026 में मिला। बिना राहत के यह पूरी रकम FY 2026-27 की आय में जुड़ेगी, लेकिन फॉर्म 39 से इसे पुराने स्लैब में बांटकर टैक्स घटाया जा सकेगा। यह प्रावधान करदाताओं को अनावश्यक बोझ से बचाता है, क्योंकि देरी उनकी गलती नहीं होती।
किस कानून के तहत लाभ?
यह लाभ किस कानून के तहत मिलेगा? आयकर अधिनियम 2025 की धारा 157(1) के तहत, जो पुरानी धारा 89(1) का आधुनिक संस्करण है। पहले फॉर्म 10E भरना पड़ता था, लेकिन अब फॉर्म 39 ज्यादा यूजर-फ्रेंडली है। इसमें ऑटो-पॉपुलेटेड टैक्सपेयर डिटेल्स, रियल-टाइम वैलिडेशन, सिस्टम आधारित वेरिफिकेशन, ड्रॉपडाउन मेन्यू और डेट पिकर जैसी सुविधाएं हैं। फॉर्म को पार्ट A, B और C में बांटा गया है- पार्ट A में बेसिक डिटेल्स, पार्ट B में एरियर ब्रेकअप और पार्ट C में राहत कैलकुलेशन। नया फॉर्म मोबाइल ऐप पर भी उपलब्ध है, जिससे कहीं से भी फाइलिंग संभव है।
किन लोगों को फायदा?
किन लोगों को फायदा होगा? मुख्य रूप से वे कर्मचारी जिन्हें अलग-अलग वर्षों का बकाया एक साथ मिलता है। जैसे, प्राइवेट सेक्टर में रिजाइन करने वाले, सरकारी कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग का एरियर, या रिटायर्ड लोगों को ग्रेच्युटी। उदाहरण लें- राहुल ने फरवरी 2026 में नौकरी छोड़ी, लेकिन सेटलमेंट मई में मिला। बिना फॉर्म के 30% टैक्स, लेकिन फॉर्म 39 से राहत के बाद सिर्फ 10%। लाखों टैक्सपेयर्स इससे लाभान्वित होंगे, खासकर मिडिल क्लास जो जॉब चेंज कर रहे हैं।
टैक्स कैसे बचाएं?
टैक्स कैसे बचाएं? सबसे पहले कैलकुलेशन करें। वर्तमान वर्ष में एरियर जोड़कर टैक्स अमाउंट निकालें (मान लें 50,000 रुपये)। फिर, एरियर को मूल वर्षों में बांटकर टैक्स निकालें (मान लें 20,000 रुपये)। अंतर (30,000 रुपये) ही राहत होगी। यह गणना फॉर्म खुद करता है। ITR में शेड्यूल 89 में क्लेम करें।
फॉर्म 39 कैसे भरें?
फॉर्म 39 कैसे भरें? आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल (incometax.gov.in) पर लॉगिन करें। ‘e-File > Income Tax Forms & Reports > Form 39’ चुनें। PAN, AY (2027-28), एरियर डिटेल्स (वर्ष, अमाउंट, ब्रेकअप) भरें। सैलरी स्लिप्स अपलोड करें। सबमिट के बाद डाउनलोड JSON उपयोगिता ITR में इंपोर्ट करें। ITR फाइल करने से पहले ही भरें, वरना क्लेम रिजेक्ट। डेडलाइन- सामान्यत: 31 जुलाई। गलती से बचें, न भरने पर नोटिस आ सकता है।
अंतिम सलाह
नए टैक्स रेजीम में भी यह लागू है, लेकिन पुराने रेजीम में ज्यादा फायदा। विशेषज्ञ सलाह देते हैं- सलाहकार से चेक करवाएं। सरकार का यह कदम टैक्सपेयर्स के हित में है, लेकिन जागरूकता जरूरी। ITR सीजन से पहले तैयारी करें, वरना मौका हाथ से निकल जाएगा।









