
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है। पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी का ऐलान कर दिया, जबकि ईरान ने तेल-गैस सप्लाई पर कड़ी चेतावनी जारी की। इस खींचतान से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और शेयर बाजार लुढ़क रहे हैं। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह संकट गंभीर चुनौती बन गया है।
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ता खतरा
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल व्यापार का 20 फीसदी हिस्सा ढोता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया- स्ट्रेट पूरी तरह खोलो वरना पावर प्लांट्स तबाह कर देंगे। ईरान ने जवाब में सप्लाई रोकने की धमकी दी। इस संघर्ष ने LPG आयात को बुरी तरह प्रभावित किया, जिससे मार्च से देशभर में गैस की किल्लत हो गई। दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों में 14.2 किलो सिलेंडर ₹2800 तक पहुंचे, होटल-रेस्टोरेंट बंद हुए।
भारत सरकार का ‘एलपीजी’ मास्टरप्लान
भारत सरकार ने तुरंत ‘एलपीजी मास्टरप्लान’ चला दिया। पेट्रोलियम मंत्रालय अलर्ट मोड में है। 23 मार्च से 13 अप्रैल तक- यानी 22 दिनों में- 13 लाख से ज्यादा 5 किलो वाले ‘छोटू’ FTL (फ्री ट्रेड LPG) सिलेंडर बिक चुके हैं। दैनिक बिक्री 1 लाख यूनिट पार कर गई। ये सब्सिडी-रहित सिलेंडर बाजार मूल्य (लगभग ₹400-450) पर उपलब्ध हैं। प्रवासी मजदूर, झुग्गीवासी और कम आय परिवारों के लिए वरदान साबित हुए- बस आधार कार्ड या कोई ID दिखाकर नजदीकी डिस्ट्रीब्यूटर से लें, पते की जरूरत नहीं।
राहत के कदम और आयात बढ़ोतरी
सरकार ने आयात भी तेज किया। ‘ग्रीन संवी’ जैसे जहाजों से 44,000 MT अतिरिक्त LPG लाया गया। घरेलू स्टॉक 10 दिनों का बताया जा रहा, लेकिन अफवाहें थम नहीं रही।
पीएनजी कनेक्शन और गैस बचत पर जोर
PNG पर फोकस तेज। मार्च से 4.24 लाख नए कनेक्शन दिए गए। 30,000 से ज्यादा उपभोक्ताओं ने LPG सरेंडर कर PNG अपनाया, जिससे स्टॉक संरक्षित हुआ। PNG इलाकों में LPG सप्लाई 3 महीने बाद बंद हो सकती- नया नियम। नए कनेक्शन पर ₹500 फ्री गैस और सिक्योरिटी माफ। इससे सालाना ₹2000-3000 की बचत।
जानकारों का कहना है, PNG विस्तार से संकट लंबे समय तक टाला जा सकता। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में, लेकिन होर्मुज पर नजर। उपभोक्ता डिस्ट्रीब्यूटर से संपर्क रखें। सरकार ने ऐप-हेल्पलाइन से बुकिंग सुगम बनाई। यह संकट भारत को स्वदेशी ऊर्जा पर जोर देने का सबक।









