
भारत के डिजिटल पेमेंट क्षेत्र में एक नया दौर शुरू हो गया है। गूगल पे ने ‘Pocket Money’ नामक क्रांतिकारी फीचर लॉन्च कर दिया है, जो माता-पिता और बच्चों के बीच पैसे के लेन-देन को सुरक्षित, स्मार्ट और शिक्षाप्रद बना देता है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के UPI Circle फ्रेमवर्क पर आधारित यह टूल बिना अलग बैंक खाते के ही बच्चों को UPI पेमेंट की सुविधा देता है। अब बच्चे अपने स्मार्टफोन से QR कोड स्कैन कर या UPI ID के जरिए दुकानों पर खरीदारी कर सकेंगे, लेकिन हर कदम पर माता-पिता की नजर बनी रहेगी। यह फीचर अप्रैल 2026 में लॉन्च हुआ और तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
नया दौर डिजिटल पेमेंट का
पहले माता-पिता बच्चों को UPI ऐप्स इस्तेमाल करने से हिचकते थे। कारण साफ था- जरूरत से ज्यादा खर्च का डर, साइबर धोखाधड़ी का खतरा या फिर बच्चे की वित्तीय समझ की कमी। लेकिन Pocket Money इन सभी चिंताओं का समाधान लेकर आया है। प्राइमरी यूजर (माता-पिता) अपने GPay ऐप से अधिकतम 5 सेकेंडरी यूजर्स (बच्चे या डिपेंडेंट्स) जोड़ सकते हैं।
सेटअप बेहद आसान है: ऐप में प्रोफाइल सेक्शन में UPI Circle पर जाएं, फोन नंबर या QR कोड से यूजर ऐड करें, मासिक लिमिट (15,000 रुपये तक) सेट करें और KYC वेरिफिकेशन पूरा करें। बच्चे को सरकारी ID देनी पड़ती है, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित होती है। वेरिफिकेशन के बाद बच्चा अपना GPay ऐप यूज कर पेमेंट करेगा, लेकिन पैसा सीधे पैरेंट के बैंक अकाउंट से कटेगा।
आसान सेटअप और मजबूत सुरक्षा
इस फीचर की खासियत इसके दोहरे कंट्रोल मोड में है। ‘डेलिगेटेड मोड‘ में बच्चा सेट लिमिट तक बिना इंतजार के पेमेंट कर सकता है- जैसे ट्यूशन फीस, किताबें या स्ट्रीट फूड। वहीं ‘अप्रूवल मोड’ में हर ट्रांजैक्शन पर पैरेंट को नोटिफिकेशन आता है और मंजूरी देनी पड़ती है। रीयल-टाइम ट्रैकिंग से माता-पिता हर खर्च की डिटेल देख सकते हैं- कहां, कितना और कब। बिल पेमेंट्स या बड़े ट्रांजैक्शन प्रतिबंधित हैं, जिससे दुरुपयोग रुकता है। NPCI के फ्रेमवर्क से यह पूरी तरह सुरक्षित है, क्योंकि सेकेंडरी यूजर का खुद का वॉलेट नहीं बनता।
फाइनेंशियल एजुकेशन का स्मार्ट माध्यम
Pocket Money सिर्फ पेमेंट टूल नहीं, बल्कि फाइनेंशियल एजुकेशन का माध्यम है। बच्चे कम उम्र में ही बजटिंग, जिम्मेदारी और डिजिटल ट्रांजेक्शन सीखते हैं। उदाहरण के तौर पर, अगर बच्चा 500 रुपये की लिमिट में 300 रुपये खर्च कर दे, तो बाकी राशि पर सोच-विचार करने को मजबूर होगा। माता-पिता रिपोर्ट्स से खर्च पैटर्न एनालाइज कर सलाह दे सकते हैं। भारत जैसे देश में, जहां कैशलेस इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही है, यह फीचर फैमिली फाइनेंस को मजबूत बनाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बच्चों में बचत की आदत पड़ेगी और फाइनेंशियल लिटरेसी बढ़ेगी।
कुछ सीमाएं, फिर भी क्रांतिकारी कदम
हालांकि, कुछ सीमाएं हैं। यह केवल भारत में उपलब्ध है, नए यूजर्स के लिए कूलडाउन पीरियड है और अप्रूवल मोड में देरी हो सकती है। फिर भी, गूगल पे ने डिजिटल इंडिया को नई ऊंचाई दी है। अगर आप पैरेंट हैं, तो आज ही इसे ट्राई करें—बच्चों को आजादी दें, लेकिन लगाम खुद रखें।









