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भारत के सर्विस सेक्टर पर लगा ‘ब्रेक’! 14 महीनों में सबसे सुस्त रही मार्च की रफ्तार, जानें क्या है असली वजह

देश का सेवा क्षेत्र मार्च में 14 महीनों की सबसे धीमी वृद्धि दर्ज कर सुस्त पड़ा। HSBC इंडिया सेवा PMI 58.1 से घटकर 57.5 पर आया, नई मांग में नरमी के कारण। निर्यात ऑर्डर मजबूत बने, पर घरेलू कमजोरी चिंता बढ़ा रही।

By Pinki Negi

भारत के सर्विस सेक्टर पर लगा 'ब्रेक'! 14 महीनों में सबसे सुस्त रही मार्च की रफ्तार, जानें क्या है असली वजह

देश का सेवा क्षेत्र, जो अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, मार्च में 14 महीनों में सबसे धीमी गति से बढ़ा। सोमवार को जारी एचएसबीसी इंडिया सेवा पीएमआई सर्वेक्षण ने इस सुस्ती को उजागर किया, जिसमें सूचकांक फरवरी के 58.1 से लुढ़ककर 57.5 पर पहुंच गया। पीएमआई 50 से ऊपर रहने का मतलब विस्तार ही है, लेकिन यह जनवरी 2025 के बाद नए कारोबार और गतिविधियों में सबसे कमजोर वृद्धि को दर्शाता है।

एचएसबीसी अर्थशास्त्री की राय

एचएसबीसी की भारत की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजल भंडारी ने कहा कि सेवा क्षेत्र में विस्तार कायम तो रहा, लेकिन लगातार दूसरे महीने रफ्तार धीमी पड़ी। नई मांग में नरमी प्रमुख वजह बनी, जहां घरेलू ऑर्डरों की रफ्तार मंदी की शिकार हुई। हालांकि, निर्यात ऑर्डर ने राहत दी- 2024 के मध्य के बाद सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई।

अफ्रीका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, अमेरिका और पश्चिम एशिया से आने वाले ऑर्डरों ने कंपनियों को भरोसा दिलाया। कंपनियां उत्पादन के भविष्य को लेकर पिछले 12 सालों में सबसे अधिक आशावादी दिखीं, जो बाजार सुधार और विज्ञापन-ग्राहक संबंधों पर टिकी है।

कच्चे माल की कीमतों में उछाल और रोजगार सृजन

कच्चे माल की कीमतों में जून 2022 के बाद सबसे तेज उछाल ने चुनौतियां बढ़ाईं। खाना पकाने का तेल, अंडे, बिजली, फल, ईंधन, श्रम, मछली, चिकन, मीट और सब्जियों की लागत फरवरी के बाद चढ़ी। नतीजा? बिक्री मूल्य मुद्रास्फीति सात महीने के उच्चतम स्तर पर। फिर भी, रोजगार सृजन मजबूत रहा- लगातार तीसरे महीने बढ़ोतरी हुई, जो 2025 के मध्य के बाद सबसे तेज रही। कारोबार के प्रति बढ़ता विश्वास नौकरियों को गति दे रहा है।

समग्र पीएमआई में भी गिरावट और लागत दबाव

यह सुस्ती सिर्फ सेवा क्षेत्र तक सीमित नहीं। एचएसबीसी इंडिया समग्र पीएमआई फरवरी के 58.9 से घटकर 57.0 पर आ गया, जो साढ़े तीन साल में सबसे धीमी वृद्धि है। यह विनिर्माण और सेवा का भारित औसत है, जो जीडीपी आंकड़ों पर आधारित है। निजी क्षेत्र में लागत दबाव चार साल के उच्च स्तर पर पहुंचा। सेवा कंपनियों ने बिक्री मूल्य अधिक बढ़ाए, जबकि विनिर्माताओं में दो साल की सबसे कमजोर वृद्धि दिखी। कुल महंगाई दर पिछले महीने जित ही रही।

भविष्य की चुनौतियां और आशा की किरणें

सेवा क्षेत्र जीडीपी का 50 प्रतिशत से ज्यादा योगदान देता है। इसकी धीमी रफ्तार समग्र विकास पर ब्रेक लगा सकती है, खासकर जब घरेलू मांग कमजोर हो। प्रतिस्पर्धा बढ़ने और लागत दबाव से कंपनियां सतर्क हैं। लेकिन निर्यात की मजबूती और नौकरी सृजन सकारात्मक संकेत हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि नीतिगत सुधार और वैश्विक मांग से रिकवरी संभव है। क्या यह अस्थायी ब्रेक है या बड़ी मंदी का संकेत? आने वाले महीने बताएंगे। 

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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