
लंबे समय से देशभर में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर को लेकर उपभोक्ताओं में भारी असंतोष व्याप्त था। उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों में लोग इसे सरकारी जबरदस्ती मान रहे थे, खासकर उन दावों के बीच जब मीटर लगने के बाद बिजली बिल में अचानक इजाफा देखा गया। लेकिन अप्रैल 2026 में केंद्र सरकार ने बड़ा ऐलान करते हुए उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लोकसभा में स्पष्ट कर दिया कि प्रीपेड स्मार्ट इलेक्ट्रिसिटी मीटर सभी के लिए अनिवार्य नहीं हैं। यह पूरी तरह वैकल्पिक है और उपभोक्ता की मर्जी पर निर्भर करेगा।
लोकसभा में मंत्री का स्पष्ट बयान
लोकसभा के प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों का जवाब देते हुए खट्टर ने कहा, “सरकार उपभोक्ताओं को प्रीपेड स्मार्ट मीटर अपनाने के लिए मजबूर नहीं करेगी। यह सुविधा वैकल्पिक है, जिसे लोग अपनी जरूरत के हिसाब से चुन सकते हैं।” यह बयान उन आशंकाओं को दूर करता है जो हाल के महीनों में तेज हुई थीं, जब यूपी और बिहार जैसे राज्यों में स्मार्ट मीटरों पर विवाद चरम पर पहुंच गया था।
यूपी में उपभोक्ता परिषद ने बिना सहमति 47 लाख मीटरों को पोस्टपेड मोड में बदलने की मांग की थी, जबकि बिहार में 1 अप्रैल से टाइम ऑफ डे टैरिफ लागू होने से शाम की बिजली महंगी हो गई। खट्टर के स्पष्टीकरण से लाखों उपभोक्ताओं को न्याय मिला है, जो विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत पहले से ही सहमति का अधिकार रखते थे।
विवाद की जड़ और राहत का कदम
सरकार का यह कदम स्मार्ट मीटर विवाद की जड़ को संबोधित करता है। कई उपभोक्ता शिकायत करते रहे हैं कि मीटर लगने के बाद बिल 20-30 फीसदी बढ़ जाते हैं, क्योंकि रियल-टाइम मॉनिटरिंग से पहले छिपी खपत सामने आ जाती है। लेकिन मंत्री ने जोर देकर कहा कि स्मार्ट मीटर के फायदे अपार हैं। यह बिजली उपयोग को पारदर्शी बनाता है, जहां उपभोक्ता रिचार्ज करके पहले ही खर्च तय कर लेते हैं। अनावश्यक बर्बादी रुकती है, बिलिंग में गड़बड़ी खत्म होती है और मोबाइल से रीयल-टाइम डेटा मिलता है।
बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के लिए भी यह वरदान है, क्योंकि बकाया रिकवरी 90 फीसदी तक पहुंच जाती है। राज्यों को राजस्व बढ़ता है, जबकि उपभोक्ता बजट कंट्रोल कर पाते हैं। यूपी में एक मोबाइल से तीन कनेक्शन जोड़ने की सुविधा और नए कनेक्शन पर सस्ते मीटर (सिंगल फेज 2800 रुपये) जैसे लाभ भी जोड़े गए हैं।
राज्यों में योजना का विस्तार
देश के कई राज्यों में यह योजना पहले से चल रही है। यूपी में मार्च 2026 से नेगेटिव बैलेंस पर ऑटो कट लागू है, बिहार में 87 लाख मीटरों पर TOD टैरिफ शुरू हो चुका है, जहां दिन में बिजली सस्ती है। केंद्र ने 2026-27 तक इंटरऑपरेबिलिटी सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन अब स्पष्ट है कि कोई जबरदस्ती नहीं होगी। उपभोक्ता पोस्टपेड या प्रीपेड चुन सकते हैं। यदि सहमति न हो तो नियामक आयोग में शिकायत कर मीटर हटवा सकते हैं।
उपभोक्ता-केंद्रित नीति की मिसाल
यह फैसला बिजली क्षेत्र में उपभोक्ता-केंद्रित नीति की मिसाल है। सरकार ने साबित किया कि तकनीक थोपने के बजाय विकल्प देना ही सही रास्ता है। अब लाखों परिवारों को बिल के डर से मुक्ति मिलेगी, और स्मार्ट मीटर सच्चे अर्थों में ‘स्मार्ट चॉइस’ बन जाएगा।









