Tags

Gold-Silver Price: सोना-चांदी खरीदने वालों को झटका! सरकार ने इंपोर्ट पर लगाई पाबंदी, अब इतने बढ़ेंगे दाम

सरकार ने सोने, चांदी और प्लैटिनम ज्वैलरी के आयात पर सीधी रोक लगा दी है और इन्हें “रिस्ट्रिक्टेड” श्रेणी में डाल दिया है। अब बिना DGFT की लाइसेंस के ज्वैलरी नहीं लाई जा सकेगी, जिससे आयात कम होगा, सप्लाई टाइट रहेगी और दामों में और दबाव बढ़ सकता है।

By Pinki Negi

Gold-Silver Price: सोना-चांदी खरीदने वालों को झटका! सरकार ने इंपोर्ट पर लगाई पाबंदी, अब इतने बढ़ेंगे दाम

सोना और चांदी के दाम में पिछले एक साल के दौरान रिकॉर्ड तेजी देखी गई है, लेकिन अब खरीदारों के लिए एक नया झटका तैयार है। सरकार ने आयात नीति में बड़ा बदलाव करते हुए सोने, चांदी और प्लैटिनम से बनी ज्वैलरी के आयात पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है। डायरेक्टरेट जनरल ऑ़फ़ फॉरेन ट्रेड (DGFT) की तरफ से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, ये ज्वैलरी अब “रिस्ट्रिक्टेड” श्रेणी में आएंगी और बिना लाइसेंस के इन्हें देश में लाना मुमकिन नहीं होगा।

सोने-चांदी के ऑल‑टाइम हाई के बाद फैसला

वित्त वर्ष 2025–26 में ही सोना और चांदी के दाम लगातार ऊंचाई पर रहे। खासकर 29 जनवरी 2026 को सोने ने 1.92 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी ने लगभग 4.20 लाख रुपये प्रति किलो का ऑल‑टाइम हाई छू लिया था। हालांकि, ईरान‑संबंधित जियोपॉलिटिक तनाव के बीच दोनों धातुओं के दाम रिकॉर्ड लेवल से थोड़े नीचे आए भी हैं, लेकिन घरेलू बाजार में अभी भी बहुत ऊंचे स्तर पर ट्रेड कर रहे हैं। इस तेजी के बीच सरकार का ये नया कदम खास तौर पर “फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA)” के दुरुपयोग को रोकने के मकसद से उठाया गया है।

DGFT की सख्त नोटिफिकेशन

DGFT की नोटिफिकेशन के मुताबिक, कस्टम्स टैरिफ हेडिंग (CTH) 7113 के अंतर्गत आने वाले सोने, चांदी और प्लैटिनम ज्वैलरी की इम्पोर्ट पॉलिसी को पहले “फ्री” से बदलकर “रिस्ट्रिक्टेड” कर दिया गया है। यानी अब इन धातुओं से बने आभूषणों को बाहर से मंगाने के लिए हर इम्पोर्टर को DGFT से पहले से लाइसेंस या मंजूरी लेनी होगी। नोटिफिकेशन में साफ कहा गया है कि ये पाबंदी पुराने कॉन्ट्रैक्ट, एडवांस पेमेंट, शिपमेंट की स्थिति या किसी भी अन्य तरह की परिस्थिति के बगैर लागू होगी।

लाइसेंस के बिना आयात का रास्ता बंद

इसका सीधा मतलब यह है कि अब बिना सरकारी अनुमति के कोई भी व्यापारी या ज्वैलर बाहर से महंगी ज्वैलरी को आसानी से भारत में नहीं ला पाएगा। इस नई पॉलिसी की लिस्ट में गोल्ड, सिल्वर और प्लैटिनम से बने सभी तरह के जेवरात शामिल हैं। हालांकि, पूरी तरह एक्सपोर्ट पर निर्भर या स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) में स्थित कंपनियों के आयात पर ये पाबंदी लागू नहीं होगी। इसके साथ ही, जेम्स एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्लान के तहत होने वाले आयात पर भी यह बैन लागू नहीं होगा, ताकि एक्सपोर्ट‑ओरिएंटेड यूनिट्स को ज्यादा नुकसान न पहुंचे।

FTA के दुरुपयोग को रोकने का बड़ा कदम

सरकार का दावा है कि कुछ इम्पोर्टर भारत‑आसियान FTA जैसे मुक्त व्यापार समझौतों का फायदा उठाकर अनावश्यक ज्वैलरी का आयात कर रहे थे, जिससे विदेशी मुद्रा खर्च बढ़ रहा था और देश के व्यापार घाटे पर दबाव पड़ रहा था। इसलिए अब ऐसे आयात को लाइसेंस‑आधारित बनाकर सरकार नियंत्रण बढ़ाना चाहती है। एक अधिकारी के मुताबिक, इसी सिलसिले में इंडस्ट्री की तरफ से भी अपील की गई है कि लाइसेंसिंग प्रोसेस को सरल और तेज बनाया जाए, ताकि सही और पंजीकृत कारोबारियों को इस नीति से ज्यादा नुकसान न पहुंचे।

खरीदारों पर क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का सबसे बड़ा असर सोचनीय होगा। आयात कम होने से बाजार में सोने‑चांदी की ज्वैलरी की सप्लाई पर दबाव पड़ सकता है, जिसके कारण दामों में और वृद्धि होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से थाईलैंड जैसे देशों से आने वाली कम कीमत वाली ज्वैलरी का आयात कम होगा, जिससे स्थानीय ज्वैलर्स और कारीगरों को ज्यादा मौके मिल सकते हैं। इससे न केवल घरेलू इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि “मेक इन इंडिया” को भी मजबूती मिल सकती है।

व्यापार घाटा और विदेशी मुद्रा पर प्रभाव

इसके अलावा, नियंत्रित आयात से सरकार को विदेशी मुद्रा की बचत भी हो सकती है और व्यापार घाटे को कंट्रोल में रखने में मदद मिल सकती है। लेकिन दूसरी तरफ खरीदारों के लिए यह अच्छी खबर नहीं है, खासकर उन लोगों के लिए जो शादी, त्योहार या गिफ्टिंग के मौके पर सस्ती रेट पर इंपोर्टेड ज्वैलरी खरीदना चाहते थे। अगर आयात पाबंदी के साथ‑साथ आयात शुल्क भी बढ़ाया जाता है, तो सोना और चांदी के जेवरात अगले कुछ महीनों में और भी महंगे हो सकते हैं, जिससे आम जन की खरीदारी पर सीधा असर पड़ेगा।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

अभी-अभी मोदी का ऐलान

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें