
केंद्र सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि फिलहाल कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की कर्मचारी पेंशन स्कीम (EPS‑95) की पेंशन को वास्तविक मूल वेतन (Actual Basic Salary) पर आधारित करने का कोई तत्काल प्रस्ताव नहीं है। इससे पहले मीडिया और पेंशनर मंडलों में यह उम्मीद जताई जा रही थी कि उच्च वेतन वाले कर्मचारियों को मूल वेतन के आधार पर ज्यादा पेंशन मिलेगी, लेकिन श्रम मंत्रालय की ओर से दिया गया जवाब इस दिशा में स्पष्ट संकेत देता है कि ऐसा बदलाव अभी नहीं होगा।
केंद्रीय श्रम मंत्री ने माँगा जवाब
केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में कहा कि EPS‑95 एक “डिफाइन्ड कंट्रीब्यूशन‑डिफाइन्ड बेनेफिट” सामाजिक सुरक्षा योजना है, यानी पेंशन की राशि इस आधार पर निर्धारित होती है कि नियोक्ता और कर्मचारी ने योजना में कितना योगदान दिया। इसके तहत नियोक्ता की ओर से पेंशन फंड में 8.33% और केंद्र सरकार की ओर से 1.16% हिस्सा दिया जाता है, लेकिन यह योगदान केवल 15,000 रुपए प्रति माह की वेतन सीमा (wage ceiling) तक ही लागू होता है।
उससे ऊपर का मूल वेतन EPS‑95 की पेंशन कैलकुलेशन में नहीं आता, इसलिए सरकार ने साफ कहा है कि “वास्तविक उच्च वेतन” पर पेंशन को आधारित करने का कोई तत्काल प्रस्ताव वर्तमान में विचाराधीन नहीं है।
वर्तमान नियमों के मुताबिक EPS‑95 की मासिक पेंशन की गणना ऐसे होती है:
मासिक पेंशन=70पेंशनयोग्य सेवा×पेंशनयोग्य वेतन
यहां “पेंशनयोग्य सेवा” और “पेंशनयोग्य वेतन” को योजना के नियमों के अनुसार तय किया जाता है, जिसमें वेतन सीमा 15,000 रुपए प्रति महीने तक ही गिनी जाती है। इसका मतलब यह है कि चाहे कोई कर्मचारी 2 लाख या 5 लाख प्रति माह कमाता हो, EPS‑95 की पेंशन कैलकुलेशन में उसका नेट मूल वेतन 15,000 रुपए ही लिया जाता है, जिसके कारण उच्च वेतन वाले कर्मचारी भी सीमित पेंशन ही प्राप्त करते हैं।
कुछ कर्मचारियों को मिला है विकल्प
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि 1 सितंबर 2014 से पहले शामिल कुछ कर्मचारियों को पुराने नियमों के तहत उच्च वेतन पर योगदान करने का विकल्प मिला था, यानी उनकी पेंशन कैलकुलेशन में वास्तविक उच्च वेतन को थोड़ा ज्यादा गिना गया था। हालांकि यह सुविधा केवल उन सदस्यों के लिए है, जिन्होंने 1 सितंबर 2014 से पहले इस विकल्प को चुना था। 1 सितंबर 2014 के बाद शामिल हुए नए नियोक्ताओं और कर्मचारियों पर 15,000 रुपए की सीमा सख्ती से लागू है।
पेंशनरों की मांग और सरकार का जवाब
पेंशनर संगठन और कर्मचारी संघ वर्षों से यह मांग कर रहे हैं कि EPS‑95 की पेंशन को वास्तविक मूल वेतन सीमा से जोड़ा जाए, ताकि उच्च वेतन वाले कर्मचारी भी अपनी रिटायरमेंट आय के अनुपात में निष्पक्ष और पर्याप्त पेंशन प्राप्त कर सकें। उनका तर्क है कि महंगाई, ग्रोथ और वास्तविक जीवन खर्चों के मुताबिक आज EPS‑95 की सीमाएं पुरानी पड़ चुकी हैं और इन्हें अपडेट करना जरूरी है। लेकिन सरकार के ताजा जवाब में यह स्पष्ट है कि फिलहाल वेतन सीमा बढ़ाई या “वास्तविक वेतन‑आधारित पेंशन” लागू करने जैसा कोई तात्कालिक निर्णय नहीं लिया गया है।
8वें वेतन आयोग का रोल आगे
इस बीच केंद्र सरकार की ओर से पेंशनरों के लिए अन्य तरीकों से राहत देने पर भी चर्चा जारी है, जैसे 8वें वेतन आयोग के दायरे में पेंशन की संरचना और रिविजन की समीक्षा, जिसके बारे में वित्त मंत्रालय ने पहले ही संसद को बताया है कि यह आयोग पेंशन पर भी अपनी सिफारिशें देगा। इस तरह EPS‑95 की पेंशन की गणना में मूल वेतन की भूमिका तकनीकी रूप से पहले से ही है, लेकिन उसकी सीमाएं अभी भी संकीर्ण बनी हुई हैं और इन्हें बदलने का फैसला अभी आगे की समीक्षा और नीति‑निर्माण पर छोड़ा गया है।









