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बैंक में है पैसा और बैंक गया डूब तो ग्राहक को कैसे मिलेगा पैसा, जानें क्या है RBI के नियम

अगर बैंक डूब जाए तो चिंता न करें- RBI की DICGC 5 लाख तक जमा राशि की सुरक्षा देती है। सेविंग्स, FD सब कवर; 90 दिनों में क्लेम। ज्यादा पैसे अलग बैंकों में बांटें। जागरूक रहें, भरोसा बनाए रखें।

By Pinki Negi

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ज्यादातर लोग अपनी कड़ी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने के लिए बैंक अकाउंट्स पर भरोसा करते हैं। वे मानते हैं कि बैंक में जमा पैसा हमेशा उपलब्ध रहेगा और जरूरत पड़ने पर तुरंत निकाला जा सकेगा। लेकिन क्या होगा अगर बैंक ही डूब जाए? भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ऐसी आपात स्थिति के लिए सख्त नियम बनाए हैं, जिसमें डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC) ग्राहकों की जमा राशि की रक्षा करता है। RBI की पूर्ण स्वामित्व वाली यह संस्था सुनिश्चित करती है कि बैंक विफलता की स्थिति में आम आदमी का पैसा सुरक्षित रहे।

DICGC कवरेज: 5 लाख तक की मजबूत ढाल

DICGC सभी RBI-अनुमोदित बैंकों- सरकारी, निजी, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB), कोऑपरेटिव और विदेशी बैंकों की भारतीय शाखाओं- के डिपॉजिट को कवर करता है। प्रति depositor प्रति बैंक अधिकतम 5 लाख रुपये तक का बीमा मिलता है, जिसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल हैं। सेविंग्स, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), रेकरिंग डिपॉजिट (RD), करंट अकाउंट और NRE/NRO खाते सभी आते हैं। लेकिन ध्यान दें: एक ही बैंक में सभी खाते (एक ही व्यक्ति/कैपेसिटी में) जोड़कर कुल 5 लाख तक ही कवर होता है।

उदाहरणस्वरूप, अगर आपके पास एक बैंक में 4 लाख सेविंग्स और 2 लाख FD हैं, तो कुल 6 लाख होने पर भी केवल 5 लाख सुरक्षित। हालांकि, कुछ अपवाद हैं। सरकारी जमाराशियां, RBI/विदेशी सरकारों के डिपॉजिट, इंटर-बैंक लेन-देन या RBI द्वारा छूट दी गई राशि कवर नहीं होती। NBFC, म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार निवेश इस दायरे से बाहर हैं।

क्लेम प्रक्रिया: 90 दिनों में पैसा वापसी

बैंक दिवालिया होने पर RBI लिक्विडेटर नियुक्त करता है, जो depositors की सूची तैयार कर DICGC को सौंपता है। DICGC वेरिफिकेशन के बाद 2 महीने में लिक्विडेटर को भुगतान करता है, जो ग्राहकों तक पहुंचाता है- कुल प्रक्रिया 90 दिनों के अंदर पूरी हो जाती है। ग्राहकों को अलग से आवेदन की जरूरत नहीं; बैंक ही प्रक्रिया संभालता है। ऑनलाइन ट्रैकिंग के लिए DICGC पोर्टल पर Claim Willingness Form भर सकते हैं। 2025 में RBI ने नए नियम प्रस्तावित किए, जो क्लेम सेटलमेंट को और तेज बनाने पर जोर देते हैं।

अधिक सुरक्षा के उपाय और अपडेट

5 लाख से ज्यादा जमा होने पर पैसे अलग-अलग बैंकों में बांटें- हर बैंक में 5 लाख कवर अलग मिलेगा। जॉइंट अकाउंट्स को अलग मानकर कवरेज बढ़ाया जा सकता है। अप्रैल 2026 से RBI रिस्क-बेस्ड प्रीमियम शुरू कर रहा है, लेकिन कवरेज सीमा 5 लाख ही रहेगी। विशेषज्ञ सलाह देते हैं: हमेशा DICGC-कवर वाले बैंक चुनें और जमा विवरण चेक करें।

पिछले वर्षों में PMC बैंक और लक्ष्मी विलास बैंक जैसे मामलों ने इस सुरक्षा की अहमियत साबित की। DICGC ने लाखों ग्राहकों को राहत दी। RBI की यह व्यवस्था आम जनता का भरोसा बनाए रखती है, लेकिन जागरूकता जरूरी है। 

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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