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सावधान! जेब में मोबाइल फोन रखना पड़ सकता है भारी, डॉक्टर ने बताया चलते समय क्यों है यह खतरनाक

स्मार्टफोन जेब में रखना आम आदत है, लेकिन फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. क्रिस्टाबेल अकिनोला की चेतावनी से सावधान! रेडिएशन व गर्मी से पुरुषों में स्पर्म काउंट कम, DNA क्षति, महिलाओं में अंडाणु प्रभावित। WHO ने इसे संभावित कैंसरकारक घोषित किया। पेल्विक लिम्फ नोड्स बाधित, हार्ट रिस्क बढ़े। बचाव: बैग में रखें, एयरप्लेन मोड ऑन करें। जागें!

By Pinki Negi

सावधान! जेब में मोबाइल फोन रखना पड़ सकता है भारी, डॉक्टर ने बताया चलते समय क्यों है यह खतरनाक

आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अटूट अंग बन चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे जेब में रखने की आम आदत भारी पड़ सकती है? फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉ. क्रिस्टाबेल अकिनोला ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर चेतावनी जारी की है। उन्होंने बताया कि मोबाइल का रेडियोफ्रीक्वेंसी रेडिएशन और गर्मी पेल्विक क्षेत्र को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे हार्मोन असंतुलन, फर्टिलिटी प्रभावित होना और समग्र स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।

फर्टिलिटी पर गहरा प्रभाव

पुरुषों के मामले में रिसर्च साफ चेतावनी देती है। जेब में फोन रखने से निकलने वाली गर्मी और नॉन-आयोनाइजिंग रेडिएशन शुक्राणु कोशिकाओं पर हमला करती है। अध्ययनों से पता चला है कि इससे स्पर्म काउंट 20-30% तक कम हो सकता है, मोबिलिटी घटती है और DNA क्षति होती है, जो मिसकैरेज का कारण बन सकती है। महिलाओं पर शोध सीमित हैं, लेकिन चिंता यह है कि उनके अंडाणु जन्मजात होते हैं और नष्ट नहीं बनते। लगातार एक्सपोजर से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़कर प्रजनन क्षमता को खतरे में डाल सकता है।

अन्य गंभीर जोखिम

डॉ. अकिनोला के अनुसार, पेल्विक क्षेत्र में लिम्फ नोड्स इंफ्लेमेशन और टॉक्सिन्स साफ करते हैं, लेकिन फोन की गर्मी-रेडिएशन इस प्रक्रिया को बाधित करती है। शर्ट की जेब में रखने पर हृदय के करीब होने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2011 में मोबाइल रेडिएशन को ‘ग्रुप 2B’ – संभावित कैंसरजनक घोषित किया। चलते समय सिग्नल सर्च से रेडिएशन और बढ़ जाता है, जिससे दुर्घटना या त्वचा जलन का जोखिम भी।

वैज्ञानिक आधार और विवाद

जानवरों पर स्टडीज में रेडिएशन से रिप्रोडक्टिव टिश्यू डैमेज साबित हुआ। इंसानी रिसर्च में 70% मामलों में जैविक प्रभाव दर्ज हुए, हालांकि कुछ अध्ययन असर नकारते हैं। मोबाइल कंपनियां जैसे Apple खुद चेतावनी देती हैं- फोन को शरीर से सटाकर न रखें। भारत में प्रो. आर. पॉलराज जैसे विशेषज्ञ भी याददाश्त ह्रास और बांझपन से जोड़ते हैं।

बचाव के आसान उपाय

सुरक्षा आसान है। पैंट जेब से बचें- फोन बैग, जैकेट या डेस्क पर रखें। एयरप्लेन मोड चालू रखें, रेडिएशन कवर यूज करें। सोते समय तकिए के नीचे न रखें, शरीर से कम से कम 20-30 सेमी दूरी बनाए रखें। डॉक्टर सलाह देते हैं- नोटिफिकेशन बंद कर बैकग्राउंड ऐप्स लिमिट करें।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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