
देश में शुक्रवार, 27 मार्च 2026 को सोने की कीमतों में फिर से गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे निवेशकों और खरीददारों के बीच बहस तेज हो गई है। राजधानी दिल्ली में सुबह 24 कैरेट सोने का भाव घटकर 1,44,690 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है, जबकि मुंबई, पुणे और बेंगलुरु में यह 1,44,540 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बना हुआ है। इसी तरह 22 कैरेट सोने का भाव दिल्ली में 1,32,640 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में 1,32,490 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी समान दबाव दिख रहा है, जहां हाजिर सोने का भाव लगभग 4,384.38 डॉलर प्रति औंस है। विशेषज्ञों के मुताबिक, 28 फरवरी को इजरायल‑अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू होने के बाद से सोना लगभग 17 प्रतिशत नीचे आ चुका है, जो इस साल की ओवरऑल उछाल के बाद अब तेज रिट्रेसमेंट की तस्वीर दिखा रहा है।
शहर‑शहर भाव: दिल्ली से लेकर लखनऊ तक
नीचे दिए गए आंकड़े भारत के कुछ बड़े शहरों में आज की सोने की कीमत को दिखाते हैं, जो निवेशकों और ज्वेलरी खरीदने वाले लोगों के लिए रेफरेंस के तौर पर काम आएंगे।
| शहर | 22 कैरेट (₹ प्रति 10 ग्राम) | 24 कैरेट (₹ प्रति 10 ग्राम) |
|---|---|---|
| दिल्ली | 1,32,640 | 1,44,690 |
| मुंबई | 1,32,490 | 1,44,540 |
| अहमदाबाद | 1,32,540 | 1,44,590 |
| चेन्नई | 1,32,490 | 1,44,540 |
| कोलकाता | 1,32,490 | 1,44,540 |
| हैदराबाद | 1,32,490 | 1,44,540 |
| जयपुर | 1,32,640 | 1,44,690 |
| भोपाल | 1,32,540 | 1,44,590 |
| लखनऊ | 1,32,640 | 1,44,690 |
| चंडीगढ़ | 1,32,640 | 1,44,690 |
इस टेबल से साफ दिखता है कि दिल्ली, जयपुर, लखनऊ और चंडीगढ़ जैसे शहरों में 24 कैरेट सोना न्यूनतम स्तर पर बना हुआ है, जबकि मुंबई और दूसरे महानगरों में भी दोनों ग्रेड में लगभग समान रेंज चल रही है।
चांदी पर और ज़्यादा दबाव
दूसरी तरफ चांदी की कीमतों में गिरावट और भी तेज़ है। 27 मार्च की सुबह चांदी का भाव लगभग 2,49,900 रुपये प्रति किलोग्राम है, जो जनवरी में 4 लाख रुपये प्रति किलो के ऊंचे स्तर से लौटकर आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी लगभग 67.71 डॉलर प्रति औंस बनी हुई है, जिससे भारत में चांदी लगभग 9,000 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई है, जो छोटे निवेशकों के लिए निवेश का अच्छा अवसर भी दिखाता है, लेकिन जोखिम वाला अवसर भी इसी साथ जुड़ा है।
बाजार में बदलती धारणा
बाजार में अब यह धारणा मजबूत हो रही है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व इस साल ब्याज दरों में कटौती नहीं करेगा, जबकि कुछ महीने पहले तक बाजार को दरों में कम से कम दो बार कटौती की उम्मीद थी। ऊंची ब्याज दरों का असर यह होता है कि सोने जैसे नॉन‑यील्डिंग एसेट्स में निवेश का आकर्षण कम हो जाता है, क्योंकि उधार लेने और बचत दोनों पर लागत बढ़ जाती है। मिडिल ईस्ट में चल रही जंग के बीच भी यह दबाव बना हुआ है, जिससे सोने की कीमतों पर फिलहाल ग्रोथ पर रोक लगती दिख रही है।
विशेषज्ञों की राय
LKP Securities के रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, जब तक भू‑राजनीतिक तनाव और महंगाई से जुड़ी चिंता बनी रहेगी, सोने की कीमतों में उतार‑चढ़ाव जारी रह सकता है। वहीं PACE 360 के को‑फाउंडर और चीफ ग्लोबल स्ट्रैटेजिस्ट अमित गोयल का मानना है कि सोना और चांदी अब पारंपरिक सुरक्षित निवेश के तौर पर नहीं बल्कि रिस्क एसेट की तरह व्यवहार करने लगे हैं। उनकी राय है कि इन धातुओं में अब बबल बनने और फिर तेज गिरावट का खतरा बढ़ गया है, जिससे लॉन्ग‑टर्म निवेशकों को भी एक्सपोज़र पर नियंत्रित दृष्टि रखने की ज़रूरत है।
कुल मिलाकर, आज की सोने‑चांदी की गिरावट न केवल निवेशकों के लिए एक चेकपॉइंट है, बल्कि भविष्य की रणनीति बनाने का अच्छा समय भी बनाती है, खासकर उन लोगों के लिए जो लंबी अवधि के लिए दोनों धातुओं को अपने पोर्टफोलियो का हिस्सा बनाना चाहते हैं।









